चंडीगढ़ सेक्टर-11 थाना पुलिस द्वारा दर्ज NDPS एक्ट के मामले में अदालत ने आरोपी दीपक को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पुलिस गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास, कोई स्वतंत्र गवाह शामिल न किया जाना, महत्वपूर्ण CCTV फुटेज उपलब्ध न कराना और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) जैसे साक्ष्य अभियोजन की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। यह मामला 3 अक्तूबर 2019, धारा 21 NDPS एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। केस की सुनवाई विशेष अदालत, चंडीगढ़ में जज हरगुरजीत कौर की अदालत में हुई। सभी गवाह पुलिसकर्मी, बयान आपस में मेल नहीं खाते पुलिस के अनुसार, 2 अक्तूबर 2019 की रात सेक्टर-24/15 डिवाइडिंग रोड पर गश्त के दौरान आरोपी दीपक को रोका गया। आरोप था कि उसने पुलिस को देखकर पॉलिथीन फेंकने की कोशिश की, जिसकी जांच में 57 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। इसके आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर मामला दर्ज किया गया। अदालत ने कहा कि इस मामले में सभी गवाह पुलिसकर्मी ही थे। किसी भी चरण पर कोई आम या स्वतंत्र गवाह नहीं जोड़ा गया, जबकि पुलिस ने जिस जगह बरामदगी दिखाई, वह सार्वजनिक स्थान था। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस गवाहों के बयानों में समय, स्थान और घटनाक्रम को लेकर आपसी विरोधाभास हैं, जिससे अभियोजन की विश्वसनीयता कमजोर होती है। SSP के आदेश किए दरकिनार सीनियर वकील तरमिंदर सिंह ने दलील दी कि थाना सेक्टर-11 का CCTV फुटेज, जो मामले के लिए अहम था, उसे एसएसपी के स्पष्ट आदेश के बावजूद आरोपी को उपलब्ध नहीं कराया गया। अदालत ने इसे सरकार की तरफ से बड़ी लापरवाही माना। अदालत के समक्ष पेश की गई कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से यह तथ्य सामने आया कि आरोपी दीपक और उसके माता-पिता एफआईआर दर्ज होने से पहले ही थाना सेक्टर-11 में मौजूद थे। यह तथ्य पुलिस की उस कहानी से मेल नहीं खाता, जिसमें आरोपी की गिरफ्तारी मौके पर दिखाई गई थी। आरोपी दीपक की ओर से सीनियर अधिवक्ता तरमिंदर सिंह ने पैरवी करते हुए अभियोजन की पूरी कहानी को चुनौती दी। उन्होंने गवाहों के विरोधाभास, CCTV फुटेज न देने और कॉल डिटेल्स के आधार पर गिरफ्तारी की टाइमलाइन पर सवाल उठाए।


