औरंगाबाद में समकालीन जवाबदेही पत्रिका का लोकार्पण:बिहार झारखंड और यूपी से साहित्यकार पहुंचे, बोले- डिजिटल युग में पढ़ने की परंपरा को जीवित रखना बड़ी चुनौती

औरंगाबाद में समकालीन जवाबदेही पत्रिका का लोकार्पण:बिहार झारखंड और यूपी से साहित्यकार पहुंचे, बोले- डिजिटल युग में पढ़ने की परंपरा को जीवित रखना बड़ी चुनौती

औरंगाबाद शहर के सम्राट अशोक भवन में रविवार को समकालीन जवाबदेही पत्रिका के निबंध अंक का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और इलाहाबाद से आए कई प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद और बुद्धिजीवी शामिल हुए। इस अवसर पर वक्ताओं ने साहित्य, संस्कृति और विचार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि औरंगाबाद धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक हर क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि समकालीन जवाबदेही पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र और उनकी टीम द्वारा निरंतर साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन जिले को साहित्य के मानचित्र पर स्थापित करने का सराहनीय प्रयास है। पूर्व सांसद ने कहा कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल लोगों की दुनिया बन चुका है, ऐसे समय में पत्र-पत्रिका निकालना और पढ़ने की परंपरा को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है और इसके लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। पूर्व सांसद समेत अन्य अतिथियों ने किया पत्रिका का लोकार्पण कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह के साथ दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज के प्रोफेसर डॉ. कुमार वीरेंद्र, पूर्व प्राचार्य डॉ. सचिदानंद प्रेमी, हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ. शीला वर्मा, हिंदी साहित्य भारती के केंद्रीय महामंत्री कवि राकेश कुमार, रघुनाथ पांडेय और प्रधान संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचदेव धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन वकील प्रमेंद्र मिश्रा ने किया। वक्ता बोले – अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है पुस्तक मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्र ने कहा कि पत्रिका का प्रकाशन अत्यंत दायित्वपूर्ण कार्य है। साहित्य हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है और समाज के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि पत्रिकाएं अनुशासन और विचार दोनों को मजबूत करती हैं। वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि निबंध साहित्य की एक गंभीर विधा है। औरंगाबाद का निबंध साहित्य में विशेष योगदान रहा है और समकालीन जवाबदेही पत्रिका में विभिन्न विषयों एआई, स्त्री विमर्श, पर्यावरण, जल, पवन और धूप पर लिखे गए निबंध इसे समृद्ध बनाते हैं। 2016 से निरंतर किया जा रहा पत्रिका का प्रकाशन पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि पत्रिका निकालना गोवर्धन पर्वत उठाने जैसा कार्य है। वर्ष 2016 से शुरू इस प्रयास में साहित्यकारों के सहयोग से निरंतर कार्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल लिखने की नहीं, बल्कि जीने की विधा है। इस निबंध अंक में 12 खंडों में कुल 108 रचनाएं शामिल हैं, जिनमें कई राज्यों के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष सतीश कुमार सिंह ने पत्रिका के लिए प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया और पत्रिका से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण का सुझाव रखा। कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा मंगलाचरण, काव्यात्मक स्वागत और अतिथियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर देव के पूर्व प्रमुख मनीष पाठक, प्रो. रामाधार सिंह, प्रो. शिवपूजन सिंह, कवि विद्या वैभव मिश्र सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। औरंगाबाद शहर के सम्राट अशोक भवन में रविवार को समकालीन जवाबदेही पत्रिका के निबंध अंक का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और इलाहाबाद से आए कई प्रख्यात साहित्यकार, शिक्षाविद और बुद्धिजीवी शामिल हुए। इस अवसर पर वक्ताओं ने साहित्य, संस्कृति और विचार की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने कहा कि औरंगाबाद धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक हर क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि समकालीन जवाबदेही पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र और उनकी टीम द्वारा निरंतर साहित्यिक पत्रिका का प्रकाशन जिले को साहित्य के मानचित्र पर स्थापित करने का सराहनीय प्रयास है। पूर्व सांसद ने कहा कि आज के डिजिटल युग में मोबाइल लोगों की दुनिया बन चुका है, ऐसे समय में पत्र-पत्रिका निकालना और पढ़ने की परंपरा को जीवित रखना बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है और इसके लिए हरसंभव सहयोग किया जाएगा। पूर्व सांसद समेत अन्य अतिथियों ने किया पत्रिका का लोकार्पण कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह के साथ दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय गया के प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज के प्रोफेसर डॉ. कुमार वीरेंद्र, पूर्व प्राचार्य डॉ. सचिदानंद प्रेमी, हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ. शीला वर्मा, हिंदी साहित्य भारती के केंद्रीय महामंत्री कवि राकेश कुमार, रघुनाथ पांडेय और प्रधान संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंचदेव धाम के संस्थापक अशोक कुमार सिंह ने की, जबकि संचालन वकील प्रमेंद्र मिश्रा ने किया। वक्ता बोले – अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है पुस्तक मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर डॉ. सुरेश चंद्र ने कहा कि पत्रिका का प्रकाशन अत्यंत दायित्वपूर्ण कार्य है। साहित्य हमें अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाता है और समाज के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का बोध कराता है। उन्होंने कहा कि पत्रिकाएं अनुशासन और विचार दोनों को मजबूत करती हैं। वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कुमार वीरेंद्र ने कहा कि निबंध साहित्य की एक गंभीर विधा है। औरंगाबाद का निबंध साहित्य में विशेष योगदान रहा है और समकालीन जवाबदेही पत्रिका में विभिन्न विषयों एआई, स्त्री विमर्श, पर्यावरण, जल, पवन और धूप पर लिखे गए निबंध इसे समृद्ध बनाते हैं। 2016 से निरंतर किया जा रहा पत्रिका का प्रकाशन पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ. सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि पत्रिका निकालना गोवर्धन पर्वत उठाने जैसा कार्य है। वर्ष 2016 से शुरू इस प्रयास में साहित्यकारों के सहयोग से निरंतर कार्य आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल लिखने की नहीं, बल्कि जीने की विधा है। इस निबंध अंक में 12 खंडों में कुल 108 रचनाएं शामिल हैं, जिनमें कई राज्यों के प्रतिष्ठित साहित्यकारों के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष सतीश कुमार सिंह ने पत्रिका के लिए प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिया और पत्रिका से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण का सुझाव रखा। कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा मंगलाचरण, काव्यात्मक स्वागत और अतिथियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर देव के पूर्व प्रमुख मनीष पाठक, प्रो. रामाधार सिंह, प्रो. शिवपूजन सिंह, कवि विद्या वैभव मिश्र सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और बुद्धिजीवी मौजूद रहे।  

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