पटना| आज विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस है। इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को खोए हुए वेटिंग टिकट का भी रिफंड देने का आदेश दिया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि यदि किसी यात्री का वेटिंग लिस्ट टिकट कन्फर्म नहीं होता और वह यात्रा नहीं करता है तो केवल टिकट खो जाने के आधार पर उसका रिफंड रोकना उचित नहीं है। आयोग ने इसे रेलवे की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने दिया। दरअसल, कंकड़बाग निवासी शंभू नाथ ने दिल्ली से पटना के लिए रेलवे काउंटर से टिकट खरीदा था, जो वेटिंग लिस्ट में था और कन्फर्म नहीं हुआ। यात्री ने यात्रा नहीं की, लेकिन इस दौरान उसका मूल टिकट खो गया। जब उन्होंने टिकट के रिफंड के लिए रेलवे से संपर्क किया तो रेलवे ने मूल टिकट प्रस्तुत नहीं होने का हवाला देकर भुगतान से इनकार कर दिया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता एसके दुबे ने आयोग के समक्ष दलील दी कि यात्री ने टिकट खरीदा था और यात्रा नहीं की, इसलिए रेलवे को राशि वापस करनी चाहिए। वहीं रेलवे की ओर से अधिवक्ता आलोक कुमार शरण और कुमार सत्यकृति ने पक्ष रखा। आयोग ने रेलवे को शिकायतकर्ता को 2,398 रुपए टिकट सहित 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ (28 मार्च 2014 से) लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये मुआवजा, 5000 रुपए मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया गया है। 120 दिनों के भीतर आदेश लागू नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी। पटना| आज विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस है। इससे पहले जिला उपभोक्ता आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को खोए हुए वेटिंग टिकट का भी रिफंड देने का आदेश दिया है। जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि यदि किसी यात्री का वेटिंग लिस्ट टिकट कन्फर्म नहीं होता और वह यात्रा नहीं करता है तो केवल टिकट खो जाने के आधार पर उसका रिफंड रोकना उचित नहीं है। आयोग ने इसे रेलवे की सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। यह आदेश आयोग के अध्यक्ष प्रेम रंजन मिश्रा और सदस्य रजनीश कुमार की पीठ ने दिया। दरअसल, कंकड़बाग निवासी शंभू नाथ ने दिल्ली से पटना के लिए रेलवे काउंटर से टिकट खरीदा था, जो वेटिंग लिस्ट में था और कन्फर्म नहीं हुआ। यात्री ने यात्रा नहीं की, लेकिन इस दौरान उसका मूल टिकट खो गया। जब उन्होंने टिकट के रिफंड के लिए रेलवे से संपर्क किया तो रेलवे ने मूल टिकट प्रस्तुत नहीं होने का हवाला देकर भुगतान से इनकार कर दिया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता एसके दुबे ने आयोग के समक्ष दलील दी कि यात्री ने टिकट खरीदा था और यात्रा नहीं की, इसलिए रेलवे को राशि वापस करनी चाहिए। वहीं रेलवे की ओर से अधिवक्ता आलोक कुमार शरण और कुमार सत्यकृति ने पक्ष रखा। आयोग ने रेलवे को शिकायतकर्ता को 2,398 रुपए टिकट सहित 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ (28 मार्च 2014 से) लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये मुआवजा, 5000 रुपए मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया गया है। 120 दिनों के भीतर आदेश लागू नहीं होने पर कार्रवाई की जाएगी।


