रामगढ़ स्थित राधा गोविंद विश्वविद्यालय में जेईई मेंस परीक्षा से ठीक पहले बड़े फर्जीवाड़े की साजिश का खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव निर्मल कुमार मंडल की शिकायत पर रामगढ़ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला 29 मार्च का है, जब 2 अप्रैल को प्रस्तावित परीक्षा से पहले कंप्यूटर लैब में संदिग्ध गतिविधियां देखी गईं। आरोप है कि विश्वविद्यालय के कर्मचारी दिनेश कुमार महतो ने ओरमांझी निवासी टीसीएस कर्मचारी राजेश ठाकुर और तीन अन्य के साथ मिलकर बिना अनुमति लैब में मॉनिटर बदलने का काम शुरू कर दिया। इस दौरान कई कंप्यूटर सिस्टम और सीपीयू से छेड़छाड़ भी की गई। पूरी कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की जा रही थी, जिससे संदेह और गहरा गया। फॉर्च्यूनर में लोड हो रहे थे मॉनिटर, पूछताछ में खुला राज घटना का खुलासा तब हुआ जब विश्वविद्यालय के कर्मचारी उमेश कुमार साव ने लैब के बाहर एक फॉर्च्यूनर गाड़ी में मॉनिटर लोड होते देखा। उन्होंने मौके पर मौजूद सूरज कुमार से पूछताछ की। जिसने बताया कि टीसीएस के निर्देश पर परीक्षा से पहले कुछ सिस्टम बदले जा रहे हैं। हालांकि, जब विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक स्तर पर जानकारी ली, तो ऐसी किसी अनुमति से इनकार कर दिया गया। इसके बाद मामला और संदिग्ध हो गया। प्रशासन ने जब आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की, तो राजेश ठाकुर समेत तीन लोग लैब की चारदीवारी फांदकर फरार हो गए। मौके पर दिनेश कुमार महतो को पकड़ लिया गया, जबकि फॉर्च्यूनर में सवार सूरज कुमार और शाकिर अंसारी को भी हिरासत में लिया गया। पैसे लेकर छात्रों को फायदा पहुंचाने की थी साजिश पूछताछ में आरोपियों ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि परीक्षा में ‘सेटिंग’ कर कुछ चुनिंदा छात्रों को लाभ पहुंचाने और इसके बदले मोटी रकम वसूलने की योजना थी। इस साजिश के तहत कंप्यूटर सिस्टम में बदलाव किया जा रहा था, जिससे परीक्षा परिणाम प्रभावित किया जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान की छवि को धूमिल करने की गंभीर कोशिश बताया है। थाना प्रभारी नवीन प्रकाश पांडेय के अनुसार, पुलिस ने एक फॉर्च्यूनर गाड़ी, 70 मॉनिटर और तीन मोबाइल फोन जब्त किए हैं। मामले में पकड़े गए तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।


