जामताड़ा में केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी किए जाने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। जामताड़ा सदर प्रखंड परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला परिषद सदस्य दीपिका बेसरा ने की। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी उपस्थित रहे। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक मौजूद थे। मुख्य अतिथि डॉ. इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के इस फैसले को ‘काला कानून’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलना केवल एक बहाना है, जबकि इसका असली उद्देश्य इस जनकल्याणकारी योजना को धीरे-धीरे समाप्त करना है। मजदूरों और किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है मंत्री अंसारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना से देश के लगभग 80 प्रतिशत गरीब, मजदूर और किसानों को लाभ मिला था। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपने ही प्रखंड में रोजगार मिलता था। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस नए फैसले से मजदूरों और किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। डॉ. अंसारी ने यह भी आरोप लगाया कि इस निर्णय से पूरे देश में आक्रोश है और लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं, जबकि भाजपा के नेता विदेश भ्रमण में व्यस्त हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यह योजना सोनिया गांधी के प्रयासों से अस्तित्व में आई थी और गरीबों के लिए वरदान साबित हुई थी। इस धरना कार्यक्रम में तनवीर आलम, आरसी विनोद छतरी, दानिश हुसैन, अजीत दुबे, बीरबल अंसारी, आकूब अंसारी सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे। जामताड़ा में केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जी राम जी किए जाने के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। जामताड़ा सदर प्रखंड परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला परिषद सदस्य दीपिका बेसरा ने की। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी उपस्थित रहे। धरनास्थल पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, पदाधिकारी और समर्थक मौजूद थे। मुख्य अतिथि डॉ. इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के इस फैसले को ‘काला कानून’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलना केवल एक बहाना है, जबकि इसका असली उद्देश्य इस जनकल्याणकारी योजना को धीरे-धीरे समाप्त करना है। मजदूरों और किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है मंत्री अंसारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा शुरू की गई मनरेगा योजना से देश के लगभग 80 प्रतिशत गरीब, मजदूर और किसानों को लाभ मिला था। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को अपने ही प्रखंड में रोजगार मिलता था। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि इस नए फैसले से मजदूरों और किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। डॉ. अंसारी ने यह भी आरोप लगाया कि इस निर्णय से पूरे देश में आक्रोश है और लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं, जबकि भाजपा के नेता विदेश भ्रमण में व्यस्त हैं। उन्होंने याद दिलाया कि यह योजना सोनिया गांधी के प्रयासों से अस्तित्व में आई थी और गरीबों के लिए वरदान साबित हुई थी। इस धरना कार्यक्रम में तनवीर आलम, आरसी विनोद छतरी, दानिश हुसैन, अजीत दुबे, बीरबल अंसारी, आकूब अंसारी सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।


