नालंदा में कांग्रेस का ‘संगठन सृजन’ अभियान:एआईसीसी पर्यवेक्षक बोले- दिल्ली, पटना से नहीं, कार्यकर्ताओं की राय से बनेंगे जिला अध्यक्ष

नालंदा में कांग्रेस का ‘संगठन सृजन’ अभियान:एआईसीसी पर्यवेक्षक बोले- दिल्ली, पटना से नहीं, कार्यकर्ताओं की राय से बनेंगे जिला अध्यक्ष

बिहारशरीफ शहर के धनेश्वर घाट स्थित राजेंद्र आश्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पर्यवेक्षक रणविजय सिंह लोचव ने ‘संगठन सृजन अभियान’ की औपचारिक शुरुआत की है।
नालंदा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला की अध्यक्षता में आयोजित वार्ता का मुख्य उद्देश्य बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक पार्टी संगठन में नई ऊर्जा भरना और उसे मजबूत करने की रणनीति साझा करना था। एआईसीसी पर्यवेक्षक रणविजय सिंह ने पार्टी नेतृत्व की नई रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, शीर्ष नेता राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल कि स्पष्ट सोच है कि अब पार्टी का संगठन दिल्ली या पटना के कमरों में बैठकर नहीं बनेगा। संगठन निर्माण के लिए पार्टी अब सीधे जमीनी स्तर पर जाएगी। पर्यवेक्षकों की टीम जिले के हर विधानसभा और ब्लॉक में जाकर पुराने और नए कार्यकर्ताओं, युवा कांग्रेस, सेवादल और वरिष्ठ नेताओं से सीधा संवाद कर विचार-विमर्श करेगी। टीम गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं की राय लेगी। जहां वर्तमान जिलाध्यक्ष अच्छा कार्य कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं की भी यही मांग है, वहां उन्हें दोबारा मौका दिया जा सकता है। वहीं, जहां बदलाव की आवश्यकता या नए चेहरों की मांग होगी, वहां उस पर विचार किया जाएगा। इस कड़ी में पदों के लिए एक आवेदन फॉर्म भी लाया गया है। जो भी कार्यकर्ता संगठन में जिम्मेदारी लेने के इच्छुक हैं, वे आगामी पांच-छह दिनों के भीतर अपना आवेदन भर कर दे सकते हैं।
रिपोर्ट दिल्ली और प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी रणविजय सिंह ने आगे कहा कि पर्यवेक्षकों की टीम अगले सात दिनों तक गांव-गांव और ब्लॉक स्तर पर लोगों के बीच रहकर जमीनी हकीकत परखेगी। इसके बाद प्राप्त आवेदनों और जमीनी फीडबैक के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली (एआईसीसी) और प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी। उन्होंने आगामी 17 तारीख को एक विशेष सम्मेलन आयोजित करने की भी घोषणा की। इस सम्मेलन में पार्टी के उन सभी पुराने या असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा, जो किन्हीं कारणों से हाशिए पर हैं। ताकि उनकी बातें सुनी जा सकें और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सके। जिलाध्यक्ष को सक्षम बनाया जाएगा पार्टी में जिलाध्यक्ष की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर देते हुए पर्यवेक्षक ने स्पष्ट किया कि जिलाध्यक्ष को अब इतना सक्षम बनाया जाएगा कि वे अपने नीचे मंडल, ब्लॉक और ग्राम समितियों का गठन स्वतंत्र रूप से कर सकें। आने वाले समय में जिलाध्यक्ष की सिफारिश के बिना विधानसभा या लोकसभा का टिकट मिलना भी मुश्किल होगा। इस अभियान में एआईसीसी पर्यवेक्षक की सहायता के लिए बिहार प्रदेश कांग्रेस (बीपीसीसी) की ओर से राजीव मेहता, अभिजीत सिंह, अरविंद चौधरी, डॉ. विवेक राज और राजीव मिश्रा को प्रदेश पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया है, जो इस पूरे दौरे में उनके साथ रहेंगे। वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य स्तर की राजनीति या संगठन की कमजोरियों पर पूछे गए सवालों से बचते हुए रणविजय सिंह ने कहा कि उनका काम सिर्फ संगठन सृजन से जुड़ा है। प्रदेश के किसी भी अन्य मुद्दे या आधिकारिक बयान के लिए प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी प्रभारी ही अधिकृत हैं, जो इस पर बेहतर जानकारी दे सकते हैं। बिहारशरीफ शहर के धनेश्वर घाट स्थित राजेंद्र आश्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के पर्यवेक्षक रणविजय सिंह लोचव ने ‘संगठन सृजन अभियान’ की औपचारिक शुरुआत की है।
नालंदा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नरेश प्रसाद अकेला की अध्यक्षता में आयोजित वार्ता का मुख्य उद्देश्य बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक पार्टी संगठन में नई ऊर्जा भरना और उसे मजबूत करने की रणनीति साझा करना था। एआईसीसी पर्यवेक्षक रणविजय सिंह ने पार्टी नेतृत्व की नई रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, शीर्ष नेता राहुल गांधी और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल कि स्पष्ट सोच है कि अब पार्टी का संगठन दिल्ली या पटना के कमरों में बैठकर नहीं बनेगा। संगठन निर्माण के लिए पार्टी अब सीधे जमीनी स्तर पर जाएगी। पर्यवेक्षकों की टीम जिले के हर विधानसभा और ब्लॉक में जाकर पुराने और नए कार्यकर्ताओं, युवा कांग्रेस, सेवादल और वरिष्ठ नेताओं से सीधा संवाद कर विचार-विमर्श करेगी। टीम गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं की राय लेगी। जहां वर्तमान जिलाध्यक्ष अच्छा कार्य कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं की भी यही मांग है, वहां उन्हें दोबारा मौका दिया जा सकता है। वहीं, जहां बदलाव की आवश्यकता या नए चेहरों की मांग होगी, वहां उस पर विचार किया जाएगा। इस कड़ी में पदों के लिए एक आवेदन फॉर्म भी लाया गया है। जो भी कार्यकर्ता संगठन में जिम्मेदारी लेने के इच्छुक हैं, वे आगामी पांच-छह दिनों के भीतर अपना आवेदन भर कर दे सकते हैं।
रिपोर्ट दिल्ली और प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी रणविजय सिंह ने आगे कहा कि पर्यवेक्षकों की टीम अगले सात दिनों तक गांव-गांव और ब्लॉक स्तर पर लोगों के बीच रहकर जमीनी हकीकत परखेगी। इसके बाद प्राप्त आवेदनों और जमीनी फीडबैक के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली (एआईसीसी) और प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी। उन्होंने आगामी 17 तारीख को एक विशेष सम्मेलन आयोजित करने की भी घोषणा की। इस सम्मेलन में पार्टी के उन सभी पुराने या असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया जाएगा, जो किन्हीं कारणों से हाशिए पर हैं। ताकि उनकी बातें सुनी जा सकें और उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सके। जिलाध्यक्ष को सक्षम बनाया जाएगा पार्टी में जिलाध्यक्ष की भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर देते हुए पर्यवेक्षक ने स्पष्ट किया कि जिलाध्यक्ष को अब इतना सक्षम बनाया जाएगा कि वे अपने नीचे मंडल, ब्लॉक और ग्राम समितियों का गठन स्वतंत्र रूप से कर सकें। आने वाले समय में जिलाध्यक्ष की सिफारिश के बिना विधानसभा या लोकसभा का टिकट मिलना भी मुश्किल होगा। इस अभियान में एआईसीसी पर्यवेक्षक की सहायता के लिए बिहार प्रदेश कांग्रेस (बीपीसीसी) की ओर से राजीव मेहता, अभिजीत सिंह, अरविंद चौधरी, डॉ. विवेक राज और राजीव मिश्रा को प्रदेश पर्यवेक्षक के तौर पर नियुक्त किया गया है, जो इस पूरे दौरे में उनके साथ रहेंगे। वहीं, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य स्तर की राजनीति या संगठन की कमजोरियों पर पूछे गए सवालों से बचते हुए रणविजय सिंह ने कहा कि उनका काम सिर्फ संगठन सृजन से जुड़ा है। प्रदेश के किसी भी अन्य मुद्दे या आधिकारिक बयान के लिए प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी प्रभारी ही अधिकृत हैं, जो इस पर बेहतर जानकारी दे सकते हैं।  

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