कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने कटिहार सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल में पार्टी की चुनावी रणनीति पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस बिहार में अकेले चुनाव लड़ सकती है, जबकि पश्चिम बंगाल में पार्टी सभी 294 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। खान ने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हालिया चुनावी परिणामों के बाद कांग्रेस के भीतर गहन मंथन हुआ है। विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली और पटना स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में 99.9 प्रतिशत कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राय दी कि कांग्रेस को अब अकेले चुनावी संघर्ष का रास्ता अपनाना चाहिए। ”केवल गठबंधन की घोषणा से कोई फायदा नहीं हुआ” शकील अहमद खान ने जोर देकर कहा कि यदि कांग्रेस बिहार की सभी 243 विधानसभा और 40 लोकसभा सीटों पर मजबूती से अकेले चुनाव लड़ती है, तो इसका सीधा लाभ पार्टी को मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गठबंधन की घोषणा से कोई फायदा नहीं हुआ है, अब जमीनी संघर्ष की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है, और राहुल गांधी तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी इसी सोच के पक्षधर हैं। यह निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पार्टी की सामूहिक भावना की अभिव्यक्ति है। ”1990 के बाद से राज्य में बनी सभी सरकारों को जनता देख चुकी” उन्होंने बिहार के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1990 के बाद से राज्य में बनी सभी सरकारों को जनता देख चुकी है। कांग्रेस चाहती है कि बिहार एक बार फिर उस दौर की ओर बढ़े, जब डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (कृष्ण बाबू) के नेतृत्व में राज्य में सुशासन और विकास का माहौल था। ”फिलहाल पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में संघर्ष कर रही” पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संबंध में शकील अहमद खान ने बताया कि कांग्रेस वहां सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में कांग्रेस की पहली प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे नफरती माहौल के खिलाफ लड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को कैसे शिकस्त दी जाएगी, इसका खुलासा समय आने पर किया जाएगा, लेकिन फिलहाल पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में संघर्ष कर रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक शकील अहमद खान ने कटिहार सर्किट हाउस में एक प्रेस वार्ता के दौरान बिहार और पश्चिम बंगाल में पार्टी की चुनावी रणनीति पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस बिहार में अकेले चुनाव लड़ सकती है, जबकि पश्चिम बंगाल में पार्टी सभी 294 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। खान ने बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ गठबंधन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हालिया चुनावी परिणामों के बाद कांग्रेस के भीतर गहन मंथन हुआ है। विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली और पटना स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में 99.9 प्रतिशत कार्यकर्ताओं और नेताओं ने राय दी कि कांग्रेस को अब अकेले चुनावी संघर्ष का रास्ता अपनाना चाहिए। ”केवल गठबंधन की घोषणा से कोई फायदा नहीं हुआ” शकील अहमद खान ने जोर देकर कहा कि यदि कांग्रेस बिहार की सभी 243 विधानसभा और 40 लोकसभा सीटों पर मजबूती से अकेले चुनाव लड़ती है, तो इसका सीधा लाभ पार्टी को मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल गठबंधन की घोषणा से कोई फायदा नहीं हुआ है, अब जमीनी संघर्ष की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है, और राहुल गांधी तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी इसी सोच के पक्षधर हैं। यह निर्णय किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पार्टी की सामूहिक भावना की अभिव्यक्ति है। ”1990 के बाद से राज्य में बनी सभी सरकारों को जनता देख चुकी” उन्होंने बिहार के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि 1990 के बाद से राज्य में बनी सभी सरकारों को जनता देख चुकी है। कांग्रेस चाहती है कि बिहार एक बार फिर उस दौर की ओर बढ़े, जब डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (कृष्ण बाबू) के नेतृत्व में राज्य में सुशासन और विकास का माहौल था। ”फिलहाल पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में संघर्ष कर रही” पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के संबंध में शकील अहमद खान ने बताया कि कांग्रेस वहां सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में कांग्रेस की पहली प्राथमिकता भारतीय जनता पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे नफरती माहौल के खिलाफ लड़ना है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को कैसे शिकस्त दी जाएगी, इसका खुलासा समय आने पर किया जाएगा, लेकिन फिलहाल पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में संघर्ष कर रही है।


