भारतीय जनता पार्टी ने मनरेगा को बदलकर विकसित भारत गारंटी फोर रोजगार एंड आजीविका मिशन (जीवी-जी राम जी) कर दिया है। इसमें कई बदलाव किए हैं, जिसका कांग्रेस विरोध कर रही हैं। वहीं कांग्रेस द्वारा इस योजना को जनता विरोधी व रोजगार गारंटी खत्म करने वाला बताया गया है। जिसके खिलाफ कांग्रेस सड़क से लेकर संसद तक विरोध करेगी। कांग्रेस द्वारा जीवी-जी राम जी का विरोध करने को लेकर हरियाणा कांग्रेस के सह प्रभारी जितेंद्र बघेल, शहरी अध्यक्ष प्रदीप गुलिया व ग्रामीण अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। हरियाणा कांग्रेस के सह प्रभारी जितेंद्र बघेल से बातचीत
प्रश्न : मनरेगा में सरकार द्वारा बदलाव किया गया है। उसका कांग्रेस द्वारा क्यों विरोध किया जा रहा है?
जितेंद्र बघेल : भाजपा सुनियोजित तरिके से मजदूरों, महिलाओं व युवाओं की योजना खत्म करने जा रही है। उनके जीवन स्तर व रहन-सहन को निम्न स्तर पर लाना चाहती है। कांग्रेस मांग करती है कि 2005 में यूपीए की सरकार ने मजदूर वर्ग के लिए जो कानून बनाया था और उसमें पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी। जो अपने से पल्ला झाड़कर खुद पर आश्रित करने में जुटी है। यह पंचायत सिस्टम खत्म कर रही है। मजदूरी गारंटी खत्म कर रही है और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। प्रश्न : कांग्रेस द्वारा इसके खिलाफ क्या कदम उठाए जाएंगे?
जितेंद्र बघेल : कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी है और विपक्ष में इंडिया गठबंधन है। वे चाहते हैं कि मजदूरों को उनका हक मिले और यह बिल वापस हो। पहले 100 दिन के रोजगार की गारंटी व न्यूनतम वेतन 400 रुपए था, उसकी कांग्रेस मांग करती है। इसके लिए कांग्रेस प्रदेश स्तर से जिला लेवल, पंचायत व वार्ड लेवल पर उनके अधिकारों के लिए बात करने जा रही है और पूरे प्रदेश में आंदोलन चलेगा।
प्रश्न : भाजपा कहती है कि यह योजना मजदूरों के लिए फायदेमंद होगी और कांग्रेस बरगलाने का काम कर रही है?
जितेंद्र बघेल : भाजपा हमेशा से मुद्दों को भटकाती है। 2014 के बाद जितनी भी भाजपा ने बात की है, तो उन्होंने केवल नाम बदला है। कोई भी उनका वायदा पूरा नहीं हुआ। वह हर मुद्दे को धर्म से जोड़ने का काम करती है। वह मनरेगा को धीरे-धीरे खत्म करने की कगार पर जा रही है।
प्रश्न : क्या इसको लेकर कांग्रेस सड़कों पर उतरेगी?
जितेंद्र बघेल : बिल्कुल। अब जिले स्तर पर विरोध किया है। आगे गांव व वार्ड लेवल पर भी विरोध करेंगे। कांग्रेस सड़क से संसद तक विरोध करेंगे ताकि मजदूरों का हक वापस मिले। कांग्रेस के शहरी अध्यक्ष प्रदीप गुलिया से बातचीत
प्रश्न : मनरेगा में बदलाव का क्या असर पड़ेगा?
प्रदीप गुलिया : मनरेगा पंचायत स्तर पर होती है। ये पूरी तरिके से इस योजना को खत्म करने का काम किया है। 40 प्रतिशत खर्चा राज्य सरकार भरेगी। लेकिन वह खर्चा नहीं भर सकती। केंद्र की यह योजना है और केंद्र से ही पैसा आता था। अब केंद्र ने इसका पैसा कम कर दिया और राज्य के पास पैसा नहीं होगा तो वह कैसे लागू करवाएगा। दूसरा झोल यह है कि दिल्ली में बैठक बाबू व अफसर यह तय करेंगे कि किस गांव में क्या काम होगा। उन्हें नहीं पता कि किस गांव में क्या काम करवाना है। पहले सरपंच को पता होता था कि गांव में क्या काम करवाना है। इसके अलावा यह भी प्रावधान यह भी किया है कि जो बड़े ठेकेदार काम करते हैं तो उन कार्यों में भी मनरेगा मजदूर काम करेंगे और खर्च सरकार वहन करेगी। यह उन ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए फैसला है जो सरकार के साथ मिलकर काम करते हैं। इस योजना में 90 प्रतिशत लोग एससी व पिछड़ा वर्ग के लोग शामिल थे, वे गांव में रहकर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। अब उन्हें मजदूरी करने के लिए शहर में या अन्य जगह जाना पड़ेगा। इसको हम लागू नहीं होने देंगे।
प्रश्न : कांग्रेस द्वारा किस तरह के कदम उठाए जाएंगे और विरोध किया जाएगा?
प्रदीप गुलिया : हम गांव-गांव जाएंगे। वहां सरकार द्वारा की जा रही गड़बड़ों के बारे में बताया जाएगा और लोगों को जागरूक किया जाएगा।
प्रश्न : भाजपा कहती है कि कांग्रेस लोगों को बरगला रही है?
प्रदीप गुलिया : हम बरगला नहीं रहे, हम सवाल पूछ रहे हैं। कांग्रेस सवाल पूछ रही है कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकार पर 40 प्रतिशत खर्च का बोझ डाल दिया। जबकि राज्य सरकार पहले ही कर्ज में है, खासकर हरियाणा की बात करें तो प्रदेश सरकार कर्ज में है। पैसे के लिए एक-दूसरे पर टाल-मटोल करेंगे और यह स्कीम खत्म हो जाएगी। यह एक गहरी साजिश है। धीरे-धीरे करके पूंजीपतियों के हाथ में देश को सौंपने की कौशिश कर रहे हैं। ताकि कोई व्यक्ति आवाज नहीं उठा सके।
प्रश्न : केंद्र सरकार पर जो भेदभाव का आरोप लगाया, वह क्या है?
प्रदीप गुलिया : 100 प्रतिशत भेदभाव होगा। जिसको यह चाहेंगे उसे फायदा होगा। जैसे अब जो राष्ट्रमंडल खेल होने हैं, उसमें 3500 करोड़ का बजट पास हुआ है। हरियाणा ने सबसे ज्यादा मेडल दिया और प्रदेश को केवल 80 करोड़ रुपए मिले। पूरे देश के आधे मेडल हरियाणा देता है और रुपए देने की बात आई तो गुजरात में पैसे दे रहे हैं और वहां खेल करवा रहे हैं। यह दर्शाता है कि भाजपा अपने हिसाब से फैसले करती है। कांग्रेस के ग्रामीण अध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी से बातचीत
प्रश्न : मनरेगा ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े लोगों से संबंधित माना जाता है, इसलिए इसे कैसे देखते हैं?
अनिरुद्ध चौधरी : कांग्रेस की जो मांगे है, वे बहुत जायज हैं, इस समय। नए कानून है, उसमें रोजगार की गारंटी खत्म कर दी है। कहीं भी तसल्ली वाली बात नहीं हैं। सरपंचों के हाथ से पावर ले ली है। केंद्र से राज्य सरकार की तरफ योजना टरका दी है। इस योजना में जो लोकतंत्र वाली बात दिख रही थी, वह खत्म होती दिख रही है। प्रश्न : कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है, तो क्या उसकी जिम्मेदारी नहीं लोगों की आवाज उठाना। किस तरह से आवाज उठाई जाएगी?
अनिरुद्ध चौधरी : जी, कांग्रेस आवाज उठाएंगी। विधानसभा में कांग्रेस के विधायक तो लोकसभा में सांसद आवाज उठाएंगे। सड़क पर पार्टी का संगठन आवाज उठाएगा।
प्रश्न : भाजपा कह रही है कि इस योजना में रोजगार अवधि 100 दिन से बढ़ाकर 125 कर दी, उससे फायदा नहीं है क्या?
अनिरुद्ध चौधरी : कोई गारंटी तो नहीं है। ऐसा करेंगे या नहीं करेंगे। जो बोलते हैं और जो जमीन पर उतरती है, उसमें बहुत अंतर होता है। हम एमएसपी की गारंटी मांगते हैं। आज आप कुछ बोल दोगे तो उस पर भरोसा नहीं होता। पुराने जो नेता होते थे वे कुछ बोलते थे तो उस पर भरोसा होता था। जनता की आवाज है कि एक्ट में ही गारंटी दी जाए। कांग्रेस ने मांग उठाई है कि 400 रुपए प्रतिदिन वेतन दिया जाए और रोजगार गारंटी दी जाए।
प्रश्न : ऐसी नौबत क्यों आती है कि कांग्रेस को विरोध करना पड़े?
अनिरुद्ध चौधरी : क्योंकि योजनाएं ठीक तरीके से बनाई नहीं जाती। इसलिए विरोध करने की नौबत आती है। ठीक तरीके से बताएं तो विरोध करने की नौबत नहीं आए।
प्रश्न : उम्मीद है भाजपा इसमें सुधार करेगी?
अनिरुद्ध चौधरी : अगर भाजपा वाकई में लोगों का भला चाहती है तो बदलाव कर देगी। अगर लोगों का भला नहीं चाहती तो बदलाव नहीं करेगी।


