बाराबंकी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीएल पुनिया और सांसद तनुज पुनिया मंगलवार को एक दिवसीय उपवास पर बैठे। यह उपवास शहर के छाया चौराहे स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय पर जिला अध्यक्ष और पूरी जिला कमेटी के साथ किया गया। इस अचानक हुए धरने से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने उपवास का कारण बताते हुए कहा कि मनरेगा योजना को कमजोर किया जा रहा है और उसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के रोजगार के अधिकार पर हमला बताया। पुनिया ने कहा कि रोजगार का यह अधिकार देश को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के प्रयासों से मिला था। हालांकि, वर्तमान सरकार की नीतियों से इस अधिकार को धीरे-धीरे खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। तनुज पुनिया ने स्पष्ट किया कि इस एक दिवसीय उपवास और विरोध के माध्यम से कांग्रेस सरकार को उसकी जनविरोधी नीतियों का विरोध जताना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उन गरीब मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है, जिनका पूरा परिवार मनरेगा के काम पर निर्भर है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदले जाने के बाद से ही उसकी मूल भावना को कमजोर करने का सिलसिला शुरू हो गया है। कांग्रेस पार्टी लगातार इस फैसले का विरोध कर रही है और केंद्र सरकार से योजना को पुराने स्वरूप और पूरी मजबूती के साथ लागू करने की मांग करती रही है। नेताओं का कहना है कि नाम बदलना सिर्फ शुरुआत थी, अब बजट में कटौती कर योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। धरना स्थल पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और मनरेगा को ‘गरीबों की जीवन रेखा’ बताते हुए इसे कमजोर करने के किसी भी प्रयास का विरोध करने का संकल्प लिया।


