SIR प्रक्रिया में दावा-आपत्ति का समय बढ़ाने की मांग:कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा निर्वाचन आयोग

SIR प्रक्रिया में दावा-आपत्ति का समय बढ़ाने की मांग:कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पहुंचा निर्वाचन आयोग

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात की। कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वर्तमान में तय समय-सीमा के कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाता अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए शुरू की गई SIR प्रक्रिया लोकतांत्रिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके तहत दावा-आपत्ति की अवधि बेहद कम रखी गई है। इससे खासकर ग्रामीण, आदिवासी, दूरस्थ और पिछड़े इलाकों में रहने वाले नागरिकों को परेशानी हो रही है। कई स्थानों पर दस्तावेजों की उपलब्धता और तकनीकी कठिनाइयों के कारण लोग समय पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। कांग्रेस ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि Bastar जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अति पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और रोज़ी-रोटी के लिए बाहर काम करने वाले मजदूर वर्ग के मतदाताओं को इस प्रक्रिया में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा बना हुआ है। कांग्रेस ने यह भी कहा कि पहले भी सुकमा और अन्य इलाकों से इस संबंध में शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जहां बिना पर्याप्त जानकारी और सहयोग के फॉर्म भरवाने की बातें सामने आई थीं। पार्टी का कहना है कि यदि दावा-आपत्ति की अवधि नहीं बढ़ाई गई, तो इससे मताधिकार जैसे संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की समावेशिता पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि SIR प्रक्रिया के तहत दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि को युक्तिसंगत अवधि तक बढ़ाया जाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। कांग्रेस ने विश्वास जताया कि निर्वाचन आयोग लोकतंत्र की मजबूती को ध्यान में रखते हुए इस मांग पर सकारात्मक और जनहितकारी निर्णय लेगा। 22 के बाद आवेदन नहीं, सिर्फ सत्यापन छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची को दुरुस्त करने के लिए निर्वाचन आयोग 22 जनवरी से 21 फरवरी तक विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा। सूची से कटे नाम, संशोधन इत्यादि की दावा आपत्तियों के अलावा 6.40 लाख मतदाता नो-मैपिंग वाले हैं। यानी बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) इन मतदाताओं तक पहुंच नहीं पाए। इसकी मुख्य वजह उनका पता नहीं मिलना, घर बंद होना या लंबे समय से निवास न होना बताया जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने ऐसे सभी नो-मैपिंग मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को निर्धारित समय सीमा के भीतर एसडीएम के समक्ष उपस्थित होकर 13 मान्य दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज पेश करना होगा। इनमें आयोग की ओर से बताए गए 13 दस्तावेज शामिल हैं। एसडीएम स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बाद ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) यह तय करेंगे कि मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए या नहीं। यदि ईआरओ के निर्णय से मतदाता संतुष्ट नहीं होता है, तो उसे जिला कलेक्टर के पास अपील करने का अधिकार दिया गया है। अगले एसआईआर में 2025 की मतदाता सूची बनेगी नाम जुड़वाने का आधार अभी एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग 2003 के एसआईआर को आधार ले रहा है। सत्यापन के लिए यह देखा जा रहा है कि मतदाता का नाम 2003 के एसआईआर में है या नहीं। जिन लोगों के नाम 2003 की सूची में नहीं है, उन्हें अपने रिश्तेदारों के रिफरेंस देने पड़ रहे हैं। रिश्तेदारों के नाम भी नहीं होने पर ऐसे लोगों को सी कैटेगरी में रखकर अलग से नोटिस जारी किया गया। उन्हें अब नाम जुड़वाने के लिए 13 तरह के दस्तावेजों में से कोई एक मांगा जा रहा है। ये दस्तावेज बहुत से लोगों के लिए सहज नहीं है। यही दिक्कत उन लोगों को बाद में आएगी जब अगला एसआईआर होगा। भाजपा की मुख्य निर्वाचन अधिकारी से दावा-आपत्ति की समय-सीमा बढ़ाने की मांग विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में नाम जोड़ने में लोगों को हो रही परेशानियों को लेकर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत की है। सोमवार को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। इसमें ईआरओ और बीएलओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा-आपत्ति की समय-सीमा 31 जनवरी तक बढ़ाने की मांग की गई है। एसआईआर पर भाजपा के आरोप ्{ईआरओ और बीएलओ दावा-आपत्ति फॉर्म नहीं ले रहे। {बिना ठोस कारण के फॉर्म-7 खारिज किया जा रहा। {दावा-आपत्ति केंद्रों पर बीएलओ की नियमित उपस्थिति नहीं। {बीएलओ वोटर के घर जाकर दावा-आपत्ति का सत्यापन नहीं कर रहे। {कई केंद्रों पर फॉर्म-7 उपलब्ध ही नहीं हैं। {योग्य वोटर का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो रहे। {अपात्र मतदाताओं के नाम नहीं कट रहे। {शिकायतों पर जिला निर्वाचन अधिकारी नहीं दे रहे ध्यान।

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