किशनगंज में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के निधन को लेकर शिया मुस्लिम समुदाय में गहरा आक्रोश और मातम का माहौल छा गया। मोती बाग करबला पर सैकड़ों शिया समुदाय के लोग एकत्र हुए। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, सभी के चेहरे पर उदासी और आंखों में आंसू थे। हाथों में जलती मोमबत्तियां लिए लोग खामनेई को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। कई लोग अपनी छाती पीटते हुए मातम मना रहे थे, जो शिया परंपरा में गहन शोक व्यक्त करने का प्रतीक है। रोते हुए चेहरे, काले कपड़े और काले झंडे इस दृश्य को और भावुक बना रहे थे। इसके बाद एक विशाल जुलूस निकला, जिसमें युवा, बच्चे और महिलाएं शामिल थे। वहीं लोगों ने हाथों में बैनर और तख्तियां थामीं, जिन पर लिखा था – “खामनेई मारोगे, हर घर से खामनेई निकलेगा”, “इजराइल मुर्दाबाद”, “अमेरिका मुर्दाबाद”। नारे लगाते हुए वे अमेरिका और इजराइल की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। जुलूस में शामिल एक युवक ने भावुक होकर कहा, “खामनेई साहब सिर्फ ईरान के नेता नहीं थे, वे पूरे विश्व के शिया मुसलमानों के मार्गदर्शक थे। उनकी मौत से हमें अपूरणीय क्षति हुई है। यह हमला न सिर्फ ईरान पर, बल्कि पूरी शिया उम्माह पर है।” खामनेई ने शिया मुसलमानों को रखा एकजुट शिया समुदाय के नेताओं ने बताया कि खामनेई एक धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व थे, जिन्होंने शिया मुसलमानों को एकजुट रखा और फिलिस्तीन, लेबनान जैसे मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाई। उनकी मौत से समुदाय में क्रोध के साथ-साथ एक नई क्रांतिकारी भावना भी जागृत हुई है। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम देशों के साथ हो रहे कथित अन्याय के खिलाफ भी नारेबाजी की। किशनगंज में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई के निधन को लेकर शिया मुस्लिम समुदाय में गहरा आक्रोश और मातम का माहौल छा गया। मोती बाग करबला पर सैकड़ों शिया समुदाय के लोग एकत्र हुए। छोटे बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, सभी के चेहरे पर उदासी और आंखों में आंसू थे। हाथों में जलती मोमबत्तियां लिए लोग खामनेई को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे। कई लोग अपनी छाती पीटते हुए मातम मना रहे थे, जो शिया परंपरा में गहन शोक व्यक्त करने का प्रतीक है। रोते हुए चेहरे, काले कपड़े और काले झंडे इस दृश्य को और भावुक बना रहे थे। इसके बाद एक विशाल जुलूस निकला, जिसमें युवा, बच्चे और महिलाएं शामिल थे। वहीं लोगों ने हाथों में बैनर और तख्तियां थामीं, जिन पर लिखा था – “खामनेई मारोगे, हर घर से खामनेई निकलेगा”, “इजराइल मुर्दाबाद”, “अमेरिका मुर्दाबाद”। नारे लगाते हुए वे अमेरिका और इजराइल की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। जुलूस में शामिल एक युवक ने भावुक होकर कहा, “खामनेई साहब सिर्फ ईरान के नेता नहीं थे, वे पूरे विश्व के शिया मुसलमानों के मार्गदर्शक थे। उनकी मौत से हमें अपूरणीय क्षति हुई है। यह हमला न सिर्फ ईरान पर, बल्कि पूरी शिया उम्माह पर है।” खामनेई ने शिया मुसलमानों को रखा एकजुट शिया समुदाय के नेताओं ने बताया कि खामनेई एक धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व थे, जिन्होंने शिया मुसलमानों को एकजुट रखा और फिलिस्तीन, लेबनान जैसे मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाई। उनकी मौत से समुदाय में क्रोध के साथ-साथ एक नई क्रांतिकारी भावना भी जागृत हुई है। प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुस्लिम देशों के साथ हो रहे कथित अन्याय के खिलाफ भी नारेबाजी की।


