बड़ी काली मंदिर में सात दिवसीय भागवत कथा का समापन:कथा व्यास बोले- भागवत कथा जीवन को सही दिशा देने का मार्ग

बड़ी काली मंदिर में सात दिवसीय भागवत कथा का समापन:कथा व्यास बोले- भागवत कथा जीवन को सही दिशा देने का मार्ग

माँ श्री बड़ी काली जी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का सातवें दिन भावपूर्ण वातावरण में समापन हो गया। अंतिम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं के मन को भाव-विभोर कर दिया। मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जय श्रीकृष्ण और हरि नाम के संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। समापन दिवस की विशेष आकर्षण वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा प्रस्तुत श्रीकृष्ण-राधा और सुदामा की मनोहारी झांकियां रहीं। भगवान श्रीकृष्ण और राधा के अलौकिक स्वरूप ने भक्तों को मानो वृंदावन की अनुभूति करा दी। वहीं सुदामा-श्रीकृष्ण की मित्रता को दर्शाती झांकी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया। मित्रता, प्रेम और निस्वार्थ भावना के इस जीवंत चित्रण को देख कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। झांकियों के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में देर तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। भागवत की कथा जीवन को सही दिशा देने का मार्ग कथा व्यास आचार्य राघवाचार्य ने सातवें दिन श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन कराया। उन्होंने श्रीकृष्ण लीलाओं का सार बताते हुए कहा कि भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का मार्ग है। उन्होंने भक्ति मार्ग, प्रेम, सेवा और सदाचार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। आचार्य ने कहा कि मानव जीवन तभी सार्थक है, जब उसमें करुणा, सत्य और सेवा का समावेश हो। सात दिवसीय इस धार्मिक आयोजन के निवेदक मंदिर प्रबंधक देवराज सिंह रहे। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी श्रद्धालुओं, कलाकारों, महिला मंडल एवं सहयोगकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्था और संचालन में महिला मंडल की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही, जिसमें पंखुरी अग्रवाल और लक्ष्मी अग्रवाल का विशेष योगदान रहा।

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