प्राधिकरण प्रदूषण से जुड़ी शिकायतें लेने और उनका निपटारा कर जवाब देने के लिए मोबाइल ऐप लेकर आ रहा है। ‘नोएडा वन’ नाम से आने जा रहे इस ऐप पर फोटो के साथ शहर में प्रदूषण से जुड़ी कोई भी शिकायत की जा सकेगी। महज फोटो देनी होगी और जगह बतानी होगी। फिर शिकायत का ऐप पर ही निपटारा कर प्राधिकरण अवगत करवाएगा। खास बात यह है कि इस ऐप की वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) सीधी निगरानी करेगा। अगर शिकायत के निपटारा में देरी हुई तो प्राधिकरण के जिम्मेदारों से सीएक्यूएम जवाब मांगेगा। यूपीडेस्को के साथ मिलकर बनाएंंगे ऐप विकसित किए जाने की तैयारी को लेकर बुधवार को प्राधिकरण के सीईओ डॉ लोकेश एम ने जन स्वास्थ्य विभाग, कम्प्यूटर सेल और यूपीडेस्को के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। सीईओ ने ऐप को लेकर सीएक्यूएम की गाइड लाइंस की जानकारी ली। फिर निर्देश दिया कि इस ऐप को ज्यादा से ज्यादा जन उपयोगी बनाया जाए। ऐप के जरिए आने वाली शिकायतों का निपटारा करने के बाद कैसे जानकारी ऐप पर ही साझा की जानी है इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाए। प्रतिवर्ष अक्टूबर से प्रदूषण बढ़ने के साथ ही इससे जुड़ी शिकायतें भी बढ़ती हैं। हर महीने आती है 60 हजार शिकायत
इस बार एक महीने में 60 हजार से ज्यादा शिकायतें वायु प्रदूषण से जुड़ी हुई नोएडा से विभिन्न विभागों व उनके प्लेटफार्म पर आई हैं। इनमें धूल उड़ने, सफाई संबंधी, सड़क टूटी होने व निर्माण संबंधी शिकायतें ज्यादा रहती हैं। शिकायतों के निपटारा के लिए प्राधिकरण ने पर्यावरण सेल व 14 टीमें बनाई हुई हैं। प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि पहले भी इन शिकायतों व उनके निपटारा का डेटा तैयार कर सीएक्यूएम को फोटो के साथ भेजा जाता था। अब ऐप के जरिए पूरी जानकारी सीधे आयोग को मिलती रहेगी। इन प्रकार की करे शिकायत
ऐप को लेकर सीएक्यूएम की तरफ से मानक निर्देश भी प्राधिकरण को दिए गए हैं। इनमें शिकायतों के प्रकार बताए गए हैं। वायु प्रदूषण से जुड़ी सड़क के गड्ढ़ों, कच्चे हिस्सों, टूट फुटपाथ व डिवाइडर, कच्ची पार्किंग जगह, मलबा, कूड़ा, मिट्टी के ढ़ेर, सिल्ट, बगैर सावधानी के निर्माण व ध्वस्तीकरण, अतिक्रमण व निर्माण सामग्री खुले में डाले जाने, कूड़ा व प्लास्टिक जलाए जाने, खाली पड़ी जगह पर हरियाली न होने की शिकायतें ऐप के जरिए की जा सकेंगी।


