आपदा में जान गंवाने वाले झारखंड के लोगों के परिजनों को बड़ी राहत देने की तैयारी है। अगर राज्य के किसी भी व्यक्ति की राज्य से बाहर भी कहीं आपदा से मौत होगी तो उनके परिजनों को मुआवजा मिलेगा। आपदा प्रबंधन की राज्य कार्यकारिणी समिति ने इस पर फैसला ले लिया है। झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी। अब तक विशिष्ट स्थानीय आपदा के मामलों में तभी मुआवजा दिया जाता है, जब मौत राज्य में हो। राज्य और देश से बाहर मौत होने पर किसी तरह की सहायता का कोई प्रावधान नहीं है। अब इसमें संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि ऐसे हर परिवार को सहायता मिल सके। राज्य सरकार का मानना है कि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए राज्य और देश से बाहर जाते हैं। ऐसे में आपदा में मौत होने पर उनके परिजनों को सिर्फ इस आधार पर मुआवजे से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है कि उनकी मौत राज्य से बाहर हुई है। नए प्रस्ताव से ऐसे परिवारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है राज्य में वज्रपात, अतिवृष्टि, सर्पदंश, खनन जनित आपदा, रेडिएशन संबंधी आपदा, पानी में डूबने, भगदड़, गैस रिसाव, सड़क दुर्घटना, आंधी-तूफान और लू को विशिष्ट स्थानीय आपदा की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से किसी आपदा में मौत होने पर मृतक के आश्रितों को मुआवजा देने का प्रावधान है। सड़क दुर्घटना को छोड़कर अन्य मामलों में अभी चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। आपदा से मौत होने पर अभी संबंधित परिवार को जिले के डीसी के यहाँ आवेदन देना पड़ता है। नई व्यवस्था में भी ऐसा ही होगा। कहीं भी मौत होने पर परिवार को डीसी के पास आवेदन देना पड़ेगा। डीसी घटनास्थल से घटना का सत्यापन कराएंगे, फिर उन्हें सहायता राशि दी जाएगी। हर हाल में मुआवजे की यह राशि गृह जिले से ही दी जाएगी। साथ ही यह ध्यान रखा जाएगा कि किसी को दोहरी सहायता न मिले। राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटना को भी आपदा की श्रेणी में शामिल किया है, लेकिन सड़क दुर्घटना में मौत होने पर आश्रित को सिर्फ एक लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। मुख्य सचिव सह राज्य कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई बैठक में सड़क दुर्घटना में मौत पर मुआवजा राशि बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। अब राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में भी इस पर चर्चा होगी। इसमें मुआवजा राशि बढ़ाने पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है। झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं, जबकि आपदा प्रबंधन मंत्री प्राधिकार के उपाध्यक्ष हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद प्राधिकार की बैठक की तिथि तय होगी। बैठक के लिए जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें कई मुद्दे शामिल किए गए हैं। इन पर प्राधिकार की बैठक में निर्णय लिए जाएँगे। विभाग की ओर से प्राधिकार की बैठक को लेकर प्रस्ताव बढ़ाया गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही बैठक बुलाई जाएगी। आपदा में जान गंवाने वाले झारखंड के लोगों के परिजनों को बड़ी राहत देने की तैयारी है। अगर राज्य के किसी भी व्यक्ति की राज्य से बाहर भी कहीं आपदा से मौत होगी तो उनके परिजनों को मुआवजा मिलेगा। आपदा प्रबंधन की राज्य कार्यकारिणी समिति ने इस पर फैसला ले लिया है। झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी। अब तक विशिष्ट स्थानीय आपदा के मामलों में तभी मुआवजा दिया जाता है, जब मौत राज्य में हो। राज्य और देश से बाहर मौत होने पर किसी तरह की सहायता का कोई प्रावधान नहीं है। अब इसमें संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है, ताकि ऐसे हर परिवार को सहायता मिल सके। राज्य सरकार का मानना है कि झारखंड से बड़ी संख्या में लोग रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय के लिए राज्य और देश से बाहर जाते हैं। ऐसे में आपदा में मौत होने पर उनके परिजनों को सिर्फ इस आधार पर मुआवजे से वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है कि उनकी मौत राज्य से बाहर हुई है। नए प्रस्ताव से ऐसे परिवारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है राज्य में वज्रपात, अतिवृष्टि, सर्पदंश, खनन जनित आपदा, रेडिएशन संबंधी आपदा, पानी में डूबने, भगदड़, गैस रिसाव, सड़क दुर्घटना, आंधी-तूफान और लू को विशिष्ट स्थानीय आपदा की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से किसी आपदा में मौत होने पर मृतक के आश्रितों को मुआवजा देने का प्रावधान है। सड़क दुर्घटना को छोड़कर अन्य मामलों में अभी चार लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। आपदा से मौत होने पर अभी संबंधित परिवार को जिले के डीसी के यहाँ आवेदन देना पड़ता है। नई व्यवस्था में भी ऐसा ही होगा। कहीं भी मौत होने पर परिवार को डीसी के पास आवेदन देना पड़ेगा। डीसी घटनास्थल से घटना का सत्यापन कराएंगे, फिर उन्हें सहायता राशि दी जाएगी। हर हाल में मुआवजे की यह राशि गृह जिले से ही दी जाएगी। साथ ही यह ध्यान रखा जाएगा कि किसी को दोहरी सहायता न मिले। राज्य सरकार ने सड़क दुर्घटना को भी आपदा की श्रेणी में शामिल किया है, लेकिन सड़क दुर्घटना में मौत होने पर आश्रित को सिर्फ एक लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। मुख्य सचिव सह राज्य कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई बैठक में सड़क दुर्घटना में मौत पर मुआवजा राशि बढ़ाने पर भी चर्चा की गई। अब राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में भी इस पर चर्चा होगी। इसमें मुआवजा राशि बढ़ाने पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है। झारखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अध्यक्ष मुख्यमंत्री हैं, जबकि आपदा प्रबंधन मंत्री प्राधिकार के उपाध्यक्ष हैं। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक की तिथि अभी तय नहीं हुई है। मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद प्राधिकार की बैठक की तिथि तय होगी। बैठक के लिए जो प्रस्ताव तैयार किया गया है, उसमें कई मुद्दे शामिल किए गए हैं। इन पर प्राधिकार की बैठक में निर्णय लिए जाएँगे। विभाग की ओर से प्राधिकार की बैठक को लेकर प्रस्ताव बढ़ाया गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही बैठक बुलाई जाएगी।


