श्रीगंगानगर। शहर में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर एक अजीब स्थिति बनती नजर आ रही है। जहां एक ओर आम उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर के लिए बुकिंग और आपूर्ति में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर बाजार में दुकानदारों को गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। हालात यह हैं कि शहर के कई इलाकों में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर लगभग गायब हो चुके हैं और उनकी जगह खुलेआम घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जा रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों और चौराहों पर संचालित स्ट्रीट फूड की रेहड़ियों और छोटे ढाबों पर 14.5 किलोग्राम वजन वाले घरेलू सिलेंडरों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है। नियमानुसार घरेलू सिलेंडर केवल घरों में उपयोग के लिए निर्धारित हैं, जबकि व्यावसायिक उपयोग के लिए अलग से कॉमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके बावजूद शहर में कई जगहों पर नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। स्थिति यह है कि नेहरू पार्क के पास, केंद्रीय बस स्टैंड के बाहर, सुखाड़िया सर्किल, आंबेडकर चौक, कोड़ा चौक, अग्रसेननगर चौक, चहल चौक, शिव चौक, रेलवे स्टेशन के बाहर, गांधी चौक, उदाराम चौक, ताराचंद वाटिका, दुर्गा मंदिर मार्केट, स्वामी दयानंद मार्ग और इंदिरा वाटिका सहित कई क्षेत्रों में स्ट्रीट फूड की रेहड़ियों पर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग सामान्य बात बन गया है। शाम के समय इन स्थानों पर खाने-पीने की दुकानों की भीड़ रहती है और लगभग हर रेहड़ी पर घरेलू गैस सिलेंडर ही नजर आते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे गैस की आपूर्ति व्यवस्था भी प्रभावित होती है। जब घरेलू सिलेंडर बाजार में व्यावसायिक कामों में इस्तेमाल होने लगते हैं, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली गैस आपूर्ति पर पड़ता है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले में जिला प्रशासन, रसद विभाग और ऑयल कंपनियों के सेल्स अधिकारियों की ओर से अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। खुलेआम हो रहे इस दुरुपयोग के बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।


