होली पर रंग और गुलाल से सराबोर लोगों की तस्वीर उभरने लगती है, होली जलने के साथ शुरू होने वाला यह पर्व पांच दिनों तक अलग-अलग स्वरूपों में चलता है। इस बार होली 4 मार्च को खेली गई। पूरा शहर रंगों में भीगेगा, लेकिन जिला मुख्यालय से 20 किमी दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत सिनावल में होली के दिन न तो किसी पर रंग डाला जाता है और न ही गुलाल। होली के दिन भी इस गांव में लोग साफ सुथरे कपड़ों में नजर आते हैं। वजह, यहां पहाड़ी पर स्थित जैन मंदिरों पर लगने वाला पांच दिवसीय मेला है, जिसमें देशभर से आने वाले जैन धर्म के अनुयायी जुटते हैं। इस मेले होने वाली व्यवस्थाओं पर पूरा गांव जुटा हुआ नजर आता है। होली नहीं खेले जाने की परंपरा पर जैन तीर्थ के कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन ने बताया कि, होली नहीं खेलने की कोई विशेष वजह नहीं है। जिस दिन होली होती है उसी दिन इस गांव में देशभर के जैन धर्म के जुटना शुरू हो जाते हैं। इनमें कई महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी होते हैं। होली के दिन इनके कोई रंग गुलाल डालकर कोई छींटाकशी न करे इसीलिए यहां बुजुर्गों ने होली नहीं खेलने की परंपरा रखी होगी। पांच दिन चलता है मेला
दूसरी वजह यह भी है कि, यहां पांच दिन तक मेला लगता है। इस मेले में पूरे गांव के लोग शामिल रहते हैं। उन्हें खुद भी होली खेलने का वक्त ही नहीं मिलता। हालाकिं रंग पंचमी के अवसर पर गांव के गोपाल जी मंदिर पर होली खेलने की परंपरा है। एक खास बात यह भी है कि, जैन धर्म के इस सिद्ध क्षेत्र में जैन समाज के लोगों का मूलनिवास नहीं हैं। वर्तमान में यहां 35 परिवार हैं जो कि दिल्ली, राजस्थान और शिवपुरी से आकर बस गए हैं।


