केजड़ तालाब में सेहतमंद पारिस्थितिकी का संकेत ताराचंद गवारिया . उदयपुर| मेवाड़ की ऐतिहासिक नगरी चावंड, जो महाराणा प्रताप की अंतिम राजधानी रही, इन दिनों एक दुर्लभ वन्यजीव दृश्य की साक्षी बन रही है। चावंड स्थित केजड़ तालाब के बीच ऊंचे पेड़ पर ओपन बिल स्टॉर्क (घोंघिल) पक्षियों के दर्जनों घोंसले देखे गए हैं। इनमें चूजों का पालन-पोषण जारी है। इसे इस क्षेत्र की जल गुणवत्ता और जैव विविधता के लिए शुभ संकेत माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञ कमलेश शर्मा के अनुसार किसी जलाशय में घोंघिल का प्रजनन करना वहां घोंघों की पर्याप्त उपलब्धता और स्वच्छ जल प्रणाली को दर्शाता है। तालाब के बीच स्थित पेड़ पर घोंसला बनाना पक्षियों की प्राकृतिक सुरक्षा रणनीति है, जिससे चूजे जमीनी शिकारियों से सुरक्षित रहते हैं। ड्रोन से लिए गए दृश्य में यह पेड़ सफेद फूलों से ढका नजर आता है।


