Colon Cancer Risk: 8 घंटे से ज्यादा बैठते हैं? बढ़ सकता है कोलन कैंसर का खतरा, डॉक्टरों की चेतावनी

Colon Cancer Risk: 8 घंटे से ज्यादा बैठते हैं? बढ़ सकता है कोलन कैंसर का खतरा, डॉक्टरों की चेतावनी

Colon Cancer Risk: आजकल ज्यादातर लोग दिन का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करते हुए बिताते हैं। ऑफिस जॉब, ऑनलाइन मीटिंग और लंबे समय तक स्क्रीन देखने की वजह से कई लोग रोजाना 8-9 घंटे या उससे ज्यादा बैठे रहते हैं। देखने में यह सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक बैठे रहना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है और इससे कुछ गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा देर तक बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल को सेडेंटरी लाइफस्टाइल कहा जाता है। इस तरह की जीवनशैली शरीर के कई जरूरी सिस्टम को प्रभावित करती है। रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बैठने से पाचन, मेटाबॉलिज्म और शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं। यही कारण है कि इससे कोलन कैंसर यानी बड़ी आंत के कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

लंबे समय तक बैठने से कैसे बढ़ सकता है कैंसर का खतरा

डॉक्टर बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक लगातार बैठा रहता है तो शरीर की मांसपेशियां कम सक्रिय हो जाती हैं और शरीर कम कैलोरी खर्च करता है। धीरे-धीरे इससे वजन बढ़ना, मेटाबॉलिज्म बिगड़ना और शरीर में सूजन जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं। ये सभी चीजें कई तरह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

कैंसर विशेषज्ञ Surender Kumar Dabas के मुताबिक ज्यादा देर तक बैठने से पाचन क्रिया भी धीमी पड़ सकती है। जब आंतों की गति धीमी हो जाती है तो शरीर के अंदर मौजूद हानिकारक पदार्थ ज्यादा समय तक आंतों की दीवार के संपर्क में रहते हैं। इससे असामान्य कोशिकाएं बनने का खतरा बढ़ सकता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती हैं। कुछ स्टडी में यह भी पाया गया है कि जो लोग लंबे समय तक बैठे रहते हैं, उनमें कोलन कैंसर का खतरा लगभग 24 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है, भले ही वे दिन में थोड़ा बहुत व्यायाम करते हों।

कोलन कैंसर क्या होता है

कोलन कैंसर बड़ी आंत में शुरू होने वाला कैंसर है। बड़ी आंत हमारे पाचन तंत्र का आखिरी हिस्सा होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी World Health Organization के अनुसार, कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले कैंसर में तीसरे नंबर पर आता है। यह बीमारी अक्सर छोटी-छोटी गांठों से शुरू होती है जिन्हें पॉलिप्स कहा जाता है। अगर इनका समय पर इलाज न किया जाए तो ये आगे चलकर कैंसर में बदल सकती हैं।

इसके शुरुआती लक्षण

कोलन कैंसर के शुरुआती चरण में कई बार कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जैसे:

  • मल त्याग की आदत में लगातार बदलाव
  • मल में खून आना
  • बिना वजह वजन कम होना
  • लगातार थकान या कमजोरी
  • पेट में दर्द या असहजता

खतरे को कैसे कम करें

डॉक्टरों का कहना है कि अगर आपकी नौकरी बैठकर काम करने वाली है तो भी कुछ छोटी आदतें अपनाकर इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

  • हर 30 से 60 मिनट में थोड़ा चलें या खड़े हो जाएं
  • संभव हो तो स्टैंडिंग डेस्क का इस्तेमाल करें
  • रोजाना वॉक, साइकिलिंग या एक्सरसाइज करें
  • फाइबर से भरपूर खाना जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं
  • पर्याप्त पानी पिएं और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचें

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से शरीर की गतिविधि बढ़ती है और इससे कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

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