बुरहानपुर जिले के उमरदा गांव में शनिवार को होने वाली पारंपरिक हेलों (बैलों) की टक्कर को पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया। शिकारपुरा थाना क्षेत्र के तहत यह आयोजन नहीं होने दिया गया। इस दौरान नेपानगर तहसीलदार दिनेश भेवंदिया और शिकारपुरा थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। दरअसल, हर साल यहां मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के गांवों से लोग बड़ी संख्या में अपने सजे-धजे हेलों बैल लेकर आते थे। पुरानी परंपरा के अनुसार, ढोल-ताशों के साथ धूमधाम से इन हेलों की टक्कर कराई जाती थी। प्रतिबंध के बावजूद आयोजन होते हैं
हालांकि, शासन द्वारा हेलों की टक्कर पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद ग्रामीण अक्सर ऐसे आयोजन करते रहे हैं। इस बार पुलिस अधीक्षक देवेंद्र पाटीदार के निर्देश पर थाना प्रभारी विक्रम सिंह चौहान और तहसीलदार दिनेश भेवंदिया ने आयोजन रोकने के लिए पुख्ता व्यवस्था की थी। इसमें ग्राम पंचायत उमरदा के सरपंच, उपसरपंच और सदस्यों का भी सहयोग मिला। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी स्थान पर होने वाली पारंपरिक हेलों की टक्कर पर रोक लगाई जाएगी। हेलों का परिवहन करने वाले वाहनों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराकर वाहन मालिकों पर परिवहन विभाग की मदद से वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अवैधानिक परिवहन के लिए एक से अधिक अपराध करने पर वाहन का रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जा सकता है। तहसीलदार दिनेश भेवंदिया ने बताया कि इस प्रकार की हेलों की टक्कर से न केवल पशुओं के प्रति क्रूरता होती है, बल्कि इससे समाज के विभिन्न समुदायों के बीच कटुता और वैमनस्यता भी उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि इन तनावों के दूरगामी परिणाम अपराध के रूप में सामने आते हैं, और पूर्व में भी ऐसी घटनाओं के कारण विभिन्न समुदायों के बीच तनाव उत्पन्न हुआ है।


