अररिया में शीतलहर का प्रकोप, अस्पताल में मरीजों की भीड़:इमरजेंसी वार्ड में स्टाफ की कमी, झुलसने के मामले भी बढ़े

अररिया में शीतलहर का प्रकोप, अस्पताल में मरीजों की भीड़:इमरजेंसी वार्ड में स्टाफ की कमी, झुलसने के मामले भी बढ़े

अररिया जिले में भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसके चलते सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। हालांकि, अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी है। अस्पताल कर्मियों के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड वर्तमान में केवल एक डॉक्टर, दो जीएनएम और एक चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के भरोसे चल रहा है। इस सीमित स्टाफ के बावजूद प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, सर्दी-खांसी और बुखार से ग्रस्त मरीज शामिल हैं, जिनमें छोटे बच्चे और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। प्रतिदिन 10 महिलाएं झुलसकर पहुंच रही अस्पताल इस मौसम की एक और चिंताजनक बात यह है कि अलाव या बोरसी से जलने (बर्न) के मामलों में तेजी आई है। प्रतिदिन 5 से 10 महिलाएं झुलसकर अस्पताल पहुंच रही हैं। ये महिलाएं ठंड से बचने के लिए अलाव सेंकते समय लापरवाही या दुर्घटना का शिकार हो रही हैं। बिहार के अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें गंभीर रूप से झुलसी महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया और कुछ मामलों में मौतें भी हुईं। डॉक्टर की कमी से मरीज परेशान महिला मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद, सदर अस्पताल में महिला चिकित्सा कर्मियों की भारी कमी है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ की कमी के कारण इलाज में देरी होती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर और कोल्ड डे की स्थिति बनी रहेगी। प्रशासन ने अलाव जलाते समय सावधानी बरतने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। स्थानीय लोग स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और अस्पताल में स्टाफ बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अररिया जिले में भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसके चलते सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। हालांकि, अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी है। अस्पताल कर्मियों के अनुसार, इमरजेंसी वार्ड वर्तमान में केवल एक डॉक्टर, दो जीएनएम और एक चतुर्थ श्रेणी स्टाफ के भरोसे चल रहा है। इस सीमित स्टाफ के बावजूद प्रतिदिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से हाई ब्लड प्रेशर, सर्दी-खांसी और बुखार से ग्रस्त मरीज शामिल हैं, जिनमें छोटे बच्चे और बुजुर्गों की संख्या अधिक है। प्रतिदिन 10 महिलाएं झुलसकर पहुंच रही अस्पताल इस मौसम की एक और चिंताजनक बात यह है कि अलाव या बोरसी से जलने (बर्न) के मामलों में तेजी आई है। प्रतिदिन 5 से 10 महिलाएं झुलसकर अस्पताल पहुंच रही हैं। ये महिलाएं ठंड से बचने के लिए अलाव सेंकते समय लापरवाही या दुर्घटना का शिकार हो रही हैं। बिहार के अन्य जिलों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें गंभीर रूप से झुलसी महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया और कुछ मामलों में मौतें भी हुईं। डॉक्टर की कमी से मरीज परेशान महिला मरीजों की बढ़ती संख्या के बावजूद, सदर अस्पताल में महिला चिकित्सा कर्मियों की भारी कमी है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ की कमी के कारण इलाज में देरी होती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है। मौसम विभाग के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले कुछ दिनों तक शीतलहर और कोल्ड डे की स्थिति बनी रहेगी। प्रशासन ने अलाव जलाते समय सावधानी बरतने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। स्थानीय लोग स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और अस्पताल में स्टाफ बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।  

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