21 Ramadan Procession: पुराने लखनऊ में 21 रमजान के मौके पर निकलने वाले पारंपरिक ताबूत जुलूस को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। हजारों रोजेदारों की मौजूदगी वाले इस धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। जुलूस मार्ग पर पुलिस ने पैदल गश्त तेज कर दी है और ड्रोन तथा सीसीटीवी कैमरों की मदद से निगरानी की व्यवस्था की गई है।
डीसीपी वेस्ट विश्वजीत श्रीवास्तव के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों ने जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान पुलिस और आरएएफ (रैपिड एक्शन फोर्स) की संयुक्त गश्त भी कराई गई।
हजरत अली की याद में निकाला जाता है ताबूत का जुलूस
21 रमजान का दिन इस्लामिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दिन चौथे खलीफा हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में देश के कई हिस्सों में जुलूस निकाले जाते हैं। लखनऊ में भी इस दिन ताबूत का पारंपरिक जुलूस निकलता है, जिसमें हजारों की संख्या में रोजेदार और श्रद्धालु शामिल होते हैं। जुलूस में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं।
पुराने लखनऊ से निकलता है ऐतिहासिक जुलूस
यह पारंपरिक ताबूत जुलूस पुराने लखनऊ के नजफ़ क्षेत्र से शुरू होकर शहर के कई प्रमुख इलाकों से गुजरता है। जुलूस का मार्ग इस प्रकार है,नजफ़ , बुनियाद बाग, कटरा चौराहा, मंसूर नगर , टूरियागंज , हैदरगंज,कर्बला तालकटोरा यह जुलूस अंत में कर्बला तालकटोरा पहुंचकर संपन्न होता है।

हजारों रोजेदार होते हैं शामिल
इस जुलूस में शहर के अलग-अलग इलाकों से हजारों की संख्या में रोजेदार और अकीदतमंद पहुंचते हैं। लोग हजरत अली की शहादत की याद में मातम करते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह आयोजन शिया समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है।
जुलूस को लेकर पुलिस की सख्त सुरक्षा
जुलूस के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। जुलूस मार्ग पर पुलिस, पीएसी और आरएएफ के जवान तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की जाएगी।
ड्रोन कैमरों से होगी निगरानी
पुलिस ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है। जुलूस मार्ग पर ड्रोन कैमरों की मदद से निगरानी की जाएगी। इससे पूरे इलाके की गतिविधियों पर ऊपर से नजर रखी जा सकेगी।
सीसीटीवी कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग
जुलूस के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों से भी लगातार निगरानी की जाएगी। सभी कैमरों की लाइव फीड पुलिस कंट्रोल रूम में देखी जाएगी, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
डीसीपी वेस्ट ने किया निरीक्षण
डीसीपी वेस्ट विश्वजीत श्रीवास्तव ने पुलिस अधिकारियों के साथ जुलूस मार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और संबंधित अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश भी दिए।
पुलिस और RAF की संयुक्त गश्त
जुलूस से पहले इलाके में सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की संयुक्त पैदल गश्त कराई गई। गश्त के दौरान पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों का विशेष रूप से निरीक्षण किया और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की।
यातायात व्यवस्था में बदलाव
जुलूस के दौरान पुराने लखनऊ के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे जुलूस के समय वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें, ताकि किसी को असुविधा न हो।

शांति बनाए रखने की अपील
प्रशासन ने शहरवासियों से अपील की है कि जुलूस के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखें। पुलिस का कहना है कि धार्मिक कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
कंट्रोल रूम से रहेगी पूरी निगरानी
जुलूस के दौरान पुलिस कंट्रोल रूम से पूरे कार्यक्रम की निगरानी की जाएगी। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों से मिलने वाली लाइव तस्वीरों के आधार पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस टीमें तैयार रहेंगी।
प्रशासन की व्यापक तैयारी
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि इस धार्मिक आयोजन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ यातायात और भीड़ प्रबंधन की भी विशेष योजना बनाई गई है। प्रशासन को उम्मीद है कि हर साल की तरह इस बार भी 21 रमजान का ताबूत जुलूस पूरी शांति और अनुशासन के साथ संपन्न होगा और शहर में भाईचारे और सौहार्द का संदेश देगा।


