Cocomelon Effect on Kids: आजकल बच्चों के कार्टून पहले के मुकाबले काफी अलग हो गए हैं। पहले जहां कार्टून की कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती थी, वहीं अब ज्यादातर बच्चों के शो में तेज म्यूजिक, चमकीले रंग, तेज एडिटिंग और लगातार बदलते सीन देखने को मिलते हैं। इनका मकसद बच्चों का ध्यान तुरंत खींचना होता है, लेकिन अब कई पैरेंट्स और एक्सपर्ट्स यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्या ये तेज-तर्रार कार्टून बच्चों के दिमाग के लिए ज्यादा उत्तेजक (ओवरस्टिमुलेटिंग) तो नहीं हैं।
इसी चर्चा में अक्सर जिस शो का नाम लिया जाता है, वह है CoComelon। यह शो छोटे बच्चों और टॉडलर्स के बीच बहुत लोकप्रिय है। इसमें रंग-बिरंगे एनिमेशन, नर्सरी राइम्स और रोजमर्रा की चीजों जैसे नहाना, शेयर करना या अच्छे व्यवहार की बातें दिखाई जाती हैं। लेकिन कई पैरेंट्स का कहना है कि इस शो के गाने और विजुअल इतने तेज और बार-बार दोहराए जाने वाले होते हैं कि बच्चे इसमें जरूरत से ज्यादा खो जाते हैं।
तेज रफ्तार कार्टून क्यों बन रहे हैं चिंता का कारण
कुछ कंटेंट क्रिएटर्स और एनालिस्ट ने इन शो की स्टाइल का विश्लेषण किया है। उनके मुताबिक कई बार ऐसे कार्टून में हर 1 से 3 सेकंड में सीन बदल जाता है। कैमरा कभी ज़ूम इन करता है, कभी जूम आउट और कभी स्क्रीन तेजी से इधर-उधर घूमती है। यह लगातार बदलते दृश्य बच्चों को स्क्रीन से जोड़े रखने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि छोटे बच्चों का दिमाग अभी विकसित हो रहा होता है। ऐसे में बहुत तेज विजुअल और आवाजें उन्हें थका सकती हैं या जानकारी को आराम से समझने में मुश्किल पैदा कर सकती हैं।
रिसर्च क्या कहती है
इस विषय पर अभी भी शोध जारी है, लेकिन कुछ स्टडीज में तेज-तर्रार प्रोग्रामिंग के असर की ओर इशारा किया गया है। उदाहरण के लिए American Academy of Pediatrics से जुड़ी जर्नल Pediatrics में 2011 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि सिर्फ 9 मिनट तक तेज गति वाले कार्टून देखने के बाद छोटे बच्चों की “एग्जीक्यूटिव फंक्शन” क्षमता थोड़ी देर के लिए प्रभावित हो सकती है। एग्जीक्यूटिव फंक्शन में ध्यान लगाना, प्लान बनाना, याददाश्त और अपनी भावनाओं को नियंत्रित करना जैसी क्षमताएं शामिल होती हैं। हालांकि यह स्टडी खास तौर पर CoComelon पर नहीं थी, लेकिन इससे यह जरूर संकेत मिलता है कि बहुत तेज कंटेंट बच्चों के दिमाग पर तुरंत असर डाल सकता है।
बच्चों के लिए धीमी कहानी भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को ऐसे कंटेंट भी दिखाना चाहिए जिसमें कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती हो। उदाहरण के तौर पर Winnie the Pooh जैसी क्लासिक कहानियां या फिल्म WALL‑E में शांत पल और धीमी कहानी देखने को मिलती है। ऐसे कंटेंट बच्चों को कल्पना करने, भावनाओं को समझने और कहानी को अपने तरीके से महसूस करने का मौका देते हैं, जिससे उनकी रचनात्मकता भी बढ़ती है।
बच्चों को ओवरस्टिमुलेशन से बचाने के आसान तरीके
अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा बहुत तेज कार्टून ज्यादा देख रहा है, तो कुछ आसान बदलाव मदद कर सकते हैं। लगातार कई एपिसोड देखने से बचें और बीच-बीच में ब्रेक दें। धीरे-धीरे शांत और स्टोरी-बेस्ड कार्टून दिखाना शुरू करें। बच्चों के साथ बैठकर कार्टून देखें ताकि आप समझ सकें वे क्या देख रहे हैं। स्क्रीन टाइम के बाद बच्चों को ड्रॉइंग, पजल या आउटडोर खेल खेलने के लिए प्रेरित करें। दिन के कुछ समय जैसे खाना खाते समय या सोने से पहले “नो स्क्रीन टाइम” रखें।
आज के डिजिटल दौर में स्क्रीन से पूरी तरह दूरी बनाना मुश्किल है, लेकिन संतुलन बनाना जरूरी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेज-तर्रार कार्टून बच्चों को आकर्षित जरूर करते हैं, लेकिन उनकी बढ़ती उम्र में धीमी कहानी, खेल और असली दुनिया के अनुभव भी उतने ही जरूरी हैं।


