प्रयागराज के माघ मेले में 5 लाख से ज्यादा कल्पवासी कर रहे हैं। जिले के CMO डॉ. एके तिवारी ने भी पहली बार माघ मेले में कल्पवासी बने हैं। वह अपने शिविर में बकायदा पूजन अर्चन कर रहे हैं और यहां स्वास्थ्य सेवाओं की खुद मानिटरिंग कर रहे हैं। वह माघ मेले में दिन रात यहीं पर रह रहे हैं। पत्नी के साथ वह पूरे विधि विधान से कल्पवास करते हैं और फिर पूरी टीम के साथ मेला क्षेत्र में बने अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य संबंधित कार्यों की भी मानिटरिंग कर रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्षों से संगम पर लगने वाले विभिन्न माघ मेला व कुंभ-महाकुंभ में ड्यूटी करते आ रहे हैं। लेकिन इस बार वह खुद कल्पवास कर रहे हैं। मेला सकुशल संपन्न हो, यह भी कामना करने के लिए यह कल्पवास है। उन्होंने कहा, यदि कोई जरूरी कार्य की वजह से शहर के आफिस जाना पड़ा तो जाऊंगा वरना रात्रि में यहीं शिविर में प्रवास करूंगा। मां गंगा की आराधना के साथ-साथ अपने कार्याें का निर्वहन करता रहूंगा। जानिए, क्या है कल्पवास का महत्व पद्य पुराण और मत्स्य पुराण में कल्पवास के बारे में बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि माघ महीने में सभी देवी-देवता संगम तट पर निवास करते हैं। ऐसे यहां रहकर पूजा अर्चना करने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। इसके लिए कल्पवासी 2 से 3 बार गंगा स्नान करते हैं और शिविर में ही पूजा पाठ करते हैं। अपने शिविर में अखंड दीप जलाए रखते हैं।


