नगरपालिका परिषद गुना में सफाई व्यवस्था की हकीकत अब सामने आ गई है। शहर में गंदगी क्यों फैली है, इसका जवाब खुद मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) मंजूषा खत्री के औचक निरीक्षण में मिल गया। गुरुवार को निरीक्षण के दौरान वार्ड 16 में जांच के दौरान रजिस्टर में 16 सफाई कर्मचारी दर्ज थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 5 ही काम करते मिले। बाकी 11 कर्मचारी नदारद थे। इससे साफ है कि कागजों में कर्मचारी पूरे हैं, लेकिन जमीन पर नहीं। नगरपालिका के सूत्रों और सियासी हलकों में चर्चा है कि सफाई कर्मचारियों की तैनाती में गड़बड़ी हो रही है। आरोप है कि कुछ पार्षद अपने वार्डों में जरूरत से ज्यादा सफाई कर्मचारी लगवा लेते हैं, लेकिन असल में सफाई नहीं होती। बैठकों में विकास के मुद्दों पर आवाज उठाने वाले यही पार्षद अपने ही वार्डों में व्यवस्था ठीक नहीं रख पा रहे हैं। शहर के 37 वार्डों के सफाई संरक्षकों के आंकड़े भी कई सवाल खड़े करते हैं। वार्ड 14 में 18 सफाई कर्मचारी, वार्ड 16 में 16, वार्ड 23 में 16, वार्ड 34 में 13 कर्मचारी तैनात हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने कर्मचारियों के बावजूद इन वार्डों में गंदगी फैली हुई है। दूसरी ओर वार्ड 8, 37 और 10 जैसे पिछड़े इलाकों में सिर्फ 3 से 5 कर्मचारी हैं, फिर भी वहां की सफाई व्यवस्था इन तथाकथित वीआईपी वार्डों से बेहतर है। 30 हजार की नौकरी वालों ने 3 हजार में रखे कर्मचारी नगरपालिका के सूत्रों ने सफाई व्यवस्था में एक और बड़ा खेल उजागर किया है। जानकारी के मुताबिक कई स्थायी सफाई कर्मचारी, जिन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये वेतन मिलता है, खुद काम पर नहीं आते। वे अपनी जगह 3 से 4 हजार रुपये में दूसरे लोगों को काम पर लगा देते हैं। सीएमओ के निरीक्षण के दौरान ही एक व्यक्ति ने स्वीकार किया कि वह 3 हजार रुपये में किसी और की जगह काम कर रहा है। और भी चौंकाने वाली बात यह है कि 8 से 10 कर्मचारी तो गुना शहर में रहते ही नहीं, फिर भी उनकी हाजिरी लग रही है और सरकारी खजाने से वेतन निकाला जा रहा है। यानी काम कोई और कर रहा है, पैसा कोई और ले रहा है — और कुछ लोग बिना शहर में रहे भी वेतन उठा रहे हैं। इस मामले को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविन्द गुप्ता ने सीएमओ को पत्र लिखा है। उन्होंने सख्त लहजे में सवाल उठाया है कि 11 नवंबर 2025 को जारी आदेश के तीन महीने बाद भी स्थिति क्यों नहीं बदली? सैलरी की फाइल आगे बढ़ाने वाले दरोगाओं पर भी उठे सवाल
अध्यक्ष ने साफ शब्दों में पूछा है कि क्या नगरपालिका का काम दबाव और दादागिरी में चलेगा? जो कर्मचारी सीएमओ के आदेश का पालन नहीं कर रहे, उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? नपाध्यक्ष ने उन मेट और दरोगाओं पर भी सवाल उठाए हैं, जो कर्मचारियों की अनुपस्थिति के बावजूद वेतन की फाइल आगे बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ विरोधी पार्षदों के दबाव में जनता के टैक्स के पैसे की यह बर्बादी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नपा अध्यक्ष ने मांगी रिपोर्ट
अध्यक्ष ने सीएमओ से 7 दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट मांगी है कि अनुपस्थित कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई। अब शहर की जनता भी सवाल कर रही है कि जो पार्षद सदन में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वे अपने वार्ड में हो रही इस गड़बड़ी पर चुप क्यों हैं? अब निगाहें इस बात पर हैं कि सीएमओ मंजूषा खत्री इस पत्र के बाद गायब कर्मचारियों और जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाती हैं।


