लखनऊ में ‘विकसित कृषि-विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को लेकर छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। रायबरेली रोड परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल होकर कृषि वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों को संबोधित किया और कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव का आह्वान किया।
लखनऊ में आयोजित यह कृषि विज्ञान कांग्रेस न केवल वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरी है, बल्कि प्रदेश और देश की कृषि नीति को नई दिशा देने का भी काम करेगी।
कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का महासंगम
8 से 10 अप्रैल तक चलने वाली इस कांग्रेस में देशभर के कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी और विशेषज्ञ एक मंच पर जुटे हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के जरिए कृषि क्षेत्र में बदलाव लाना और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को मजबूत करना है।
यूपी की कृषि क्षमता पर सीएम का जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है, जहां प्राकृतिक संसाधनों की भरपूर उपलब्धता है।
उन्होंने बताया कि भारत की कुल आबादी का लगभग 16-17 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में निवास करता है, जबकि देश की कुल कृषि योग्य भूमि का 11 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश के पास है। इसके बावजूद राज्य देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में लगभग 21 प्रतिशत का योगदान देता है।
9 वर्षों में कृषि विकास दर में उल्लेखनीय वृद्धि
सीएम योगी ने कहा कि थोड़े से प्रयास से बड़े परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में सफलता मिली है।
उन्होंने इसे सरकार की नीतियों, तकनीकी सुधार और किसानों की मेहनत का संयुक्त परिणाम बताया।
‘किसान केवल उत्पादक नहीं, उद्यमी भी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रही है।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में किसान खेती के साथ-साथ कारीगर भी होता था और इसी के जरिए वह उद्यमी के रूप में स्थापित होता था। भारत की कृषि की यह परंपरा ‘उत्पादक से उद्यमी’ बनने की कहानी है।
ऐतिहासिक संदर्भों के जरिए कृषि की भूमिका पर प्रकाश
अपने संबोधन में सीएम योगी ने भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब विश्व की 44-45 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर भारत का अधिकार था और उसका आधार कृषि, अन्नदाता किसान और कारीगर थे।
उन्होंने Anandamath और ‘वंदेमातरम’ के संदर्भ में बंगाल के अकाल और औपनिवेशिक शोषण का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे किसानों और कारीगरों की स्थिति को प्रभावित किया गया।
कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जरूरत है कि किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खुद को सिर्फ उत्पादक नहीं, बल्कि उद्यमी के रूप में विकसित करें।
उन्होंने वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे अपने शोध और नवाचारों को सीधे खेत तक पहुंचाएं, जिससे किसानों की आय बढ़े और कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भर बने।


