सीएम मोहन यादव को लगी शगुन की हल्दी की धप्पी, वीडी शर्मा भी नहीं बच पाए

सीएम मोहन यादव को लगी शगुन की हल्दी की धप्पी, वीडी शर्मा भी नहीं बच पाए

MP News: मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में बुंदेलखंड के महाकुंभ के रूप में 300 बेटियों का विवाह हो रहा है। शुक्रवार को हल्दी की रस्म की गई। प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव भी इसमें शामिल हुए और बागेश्वर धाम आकर मंडप का पूजन किया। पूजन के पश्चात बागेश्वर महाराज पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने मुख्यमंत्री को हल्दी लगाकर महोत्सव की शुरुआत की। इस दौरान सीएम ने हल्दी लगने से बचने की कोशिश की लेकिन पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने उन्हें शगुन की हल्दी की धप्पी लगा ही दी। सीएम ने भी धीरेन्द्र शास्त्री को हल्दी की धप्पी लगाई। पास ही बैठे प्रदेश भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा भी शगुन की हल्दी की धप्पी से नहीं बच पाए और धीरेन्द्र शास्त्री ने उन्हें भी सगुन की हल्दी लगाई। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने सभी बेटियों के सुखमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवस्थान संस्कारों को देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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सीएम ने दी विवाह में खर्चे से बचने की सलाह

हल्दी महोत्सव के अवसर पर पधारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वैदिक मंत्रोच्चार और वैदिक परंपरा के अनुरूप बेटियों के मंडप का पूजन किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह महोत्सव से अनावश्यक खर्चों में कटौती होती है। युवाओं की तरक्की में लोग खर्च करें, विवाह में खर्चे से बचें। कन्या विवाह एक यज्ञ के समान है। उन्होंने कहा कि यहां से जिन बेटियों के विवाह हो रहे हैं सरकार उन जोड़ों को रोजगार देने के प्रयास करेगी।

पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने की सीएम की तारीफ

बागेश्वर महाराज पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने सीएम मोहन यादव की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ऐसे राजनेता हैं जो राष्ट्र के साथ संत, महंत और धर्म को साथ लेकर चल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि गौ मंदिर का काम और मंदिरों के स्थानीय न्यासों पर मुख्यमंत्री विशेष ध्यान दे रहे हैं। प्रदेश के मुखिया का सहयोग मिलने से धार्मिक संस्थान और बेहतर ढंग से सनातन के लिए कार्य कर पाते हैं। मंचीय कार्यक्रम के बाद बागेश्वर महाराज ने सभी समाजों के साथ बैठकर समरसता भोज किया। बागेश्वर महाराज के अलावा देश के जाने-माने कथा वाचक, महापुरुष और संत भी इसमें शामिल हुए। समरसता भोज के माध्यम से सबको यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि हम सब एक हैं। आपसी छुआछूत और ऊंच नीच का भाव समाज में दरार पैदा करता है इसलिए हम सब सिर्फ सनातनी बने रहें।

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