स्वच्छता सर्वेक्षणः बीकानेर की प्रोसेसिंग यूनिट अधूरी, आगे रहेंगे अलवर-उदयपुर

स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 के िलए टीम मार्च में आएगी। तैयारियों के लिहाज से देखें तो इस बार बीकानेर से ज्यादा उदयपुर और अलवर मजबूत हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह 1500 अंकों का प्रोसेसिंग सेंटर है जो उदयपुर और अलवर में तैयार है। बीकानेर में प्रोसेसिंग का टेंडर डीएलबी ने किया था। इस वजह से ठेकेदार स्थानीय अधिकारियों की सुन नहीं रहा। इसलिए अगर इस बार रैंक गिरी तो उसके लिए डीएलबी जिम्मेदार होगा। दरअसल पिछली बार बीकानेर की प्रदेश में दूसरी रैंक आई थी। उसमें सबसे बड़ी वजह थी सिटीजन फीड बैक क्योंकि सिटीजन फीडबैक में बीकानेर प्रदेश में टॉप पर था। बावजूद इसके 1500 अंकों का प्रोसेसिंग सेंटर पूरा न होने के कारण बीकानेर बीकानेर पिछड़ गया था। 2023 के स्वच्छता सर्वेक्षण में देश में 346 शहरों में 342 वें स्थान पर रहने वाले बीकानेर शहर ने 2025 में तीन से दस लाख आबादी वाली केटेगरी में देश में 48 वां स्थान हासिल किया है। प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा है। बीते समय 12500 अंकों में से कुल 8255 अंक प्राप्त हुए थे। अंकों का प्रतिशत करीब 66 प्रतिशत है। जबकि गत सर्वेक्षण में बीकानेर को महज 29 फीसदी अंक ही प्राप्त हुए थे। चिंता इस बार इसलिए है क्योंकि सबसे ज्यादा 1500 अंकों का जो प्रोसेसिंग सेंटर का काम 2025 में पूरा होना था उसका काम फरवरी 2026 तक सिर्फ 21 प्रतिशत ही हुआ। उसकी मुख्य वजह डीएलबी है। डीएलबी ने प्रोसेसिंग सेंटर के सेंट्रलाइज टेंडर किए थे। इसके पीछे की वजह जयपुर में बैठे अभियंताओं की मोनोपॉली है। ऐसा कहा जाता है कि डीएलबी सिर्फ टेंडर में कमीशनखोरी के लिए सेंट्रलाइज टेंडर कर रहा है मगर उसका खमियाजा शहरों को भुगतना पड़ता है क्योंकि टेंडर लेने के बाद फर्में निकायों के अधिकारियों की कोई सुनवाई नहीं करतीं। बीकानेर में प्रोसेसिंग सेंटर का जो काम पिछले साल ही खत्म होना चाहिए था और उसका काम अब तक सिर्फ 21 प्रतिशत ही हुआ। बीकानेर के वो प्वाइंट जिसकी वजह से रैंक गिरनी तय } प्रोसेसिंग सेंटर : सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत एक प्रोसेसिंग सेंटर बनना था। 2023 में टेंडर होकर 2025 में खत्म होना था। काम अब तक 21 प्रतिशत हुआ। डीएलबी ने उसका समय मार्च 2026 तक बढ़ा दिया मगर अभी भी काम बंद है। नतीजा, इस साल के अंत तक भी काम पूरा नहीं होगा इसलिए सीधे तौर पर 1500 अंक कटेंगे। } गार्बेज फ्री सिटी : इसमें प्रत्येक निकाय को स्टार मिलते हैं। एक स्टार से लेकर 7 स्टार तक मिलते हैं और बेहतर स्टार हासिल करने वाली निकायों को ग्रांट भी अच्छी मिलती है। इसका भी प्लांट तैयार होना था मगर ये भी अधूरा है। इसकी वजह से वल्लभगार्डन पर कचरे का लोड कम नहीं हो रहा। } टूटी सड़कें : हालांकि इसके नंबर सिर्फ 30 ही हैं मगर बेहतर पोजिशन हासिल करने के लिए एक-एक नंबर महत्वपूर्ण है। 20 अंक डस्टबिन टूरिस्ट और इंडस्ट्रियल एरिया में होनी जरूरी है जो नहीं है। } ग्रीन जेान : सड़को के बीच में या किनारे ग्रीनरी होनी चाहिए जिसके 20 अंक हैं। बीकानेर की किसी सड़क पर ग्रीनरी नहीं है। } फुटपाथ : फुटपाथ ना होने या टूटे होने पर भी अंक कटेंगे। बीकानेर में फुटपॉथ कम ही हैं। } सेनेट्री पैड स्कूलों में गीले कचरे और सेनेट्री पैडके निस्तारण की सुविधा नहीं है जबकि इस बार इसके भी अंक हैं। डीएलबी ने किया प्रोसेसिंग यूनिट का टेंडर, ठेकेदार काम नहीं कर रहे, रैंक गिरना तय

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