भास्कर न्यूज | लातेहार सदर थाना क्षेत्र के कैमा गांव में गुरुवार की रात ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प में चार सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सहित आईआरबी और जैप के कुल 15 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं ग्रामीणों की ओर से भी धीरेन्द्र उरांव, संदीप उरांव समेत आधा दर्जन लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों में एसआई धर्मवीर कुमार सिंह, एसआई मोहन रविदास, एसआई रामाकांत गुप्ता, एसआई राजेश झा, आईआरबी के शैलेंद्र कुमार सिंह, प्रेमचंद पाण्डेय, विजय कुमार सिंह, कन्हैया प्रसाद तथा जैप के जवान रामकिशोर उरांव, तिलेस्फर लकड़ा, कृष्णा मुरारी, लोबिन लकड़ा, गिरिवर प्रसाद, सत्यम कुमार और जवाहर उरांव शामिल हैं। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प के बाद कैमा गांव में भय और दहशत का माहौल है। ग्रामीण किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने से कतराते नजर आए। जब ग्रामीणों को बताया गया कि हम पत्रकार हैं और उनकी समस्याओं को जानने आए हैं, तब करीब आधे घंटे बाद कुछ लोग सामने आए और पूरी घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस गांव के संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को पकड़कर ले जा रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीण घोड़गढ़वा पुल के पास पहुंचे और थाना प्रभारी प्रमोद कुमार सिन्हा से कारण पूछा। ग्रामीणों का कहना था कि यह इलाका पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से संचालित होता है, जहां किसी की गिरफ्तारी से पहले गांव को सूचना देना जरूरी होता है। इसके बाद गांव के अखाड़ा में बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि हरेंद्र उरांव पर लगे आरोपों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस ने हिरासत में लिए गए संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को ग्रामीणों के बीच सौंप दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने एसआई रामाकांत गुप्ता पर धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप भी लगाया। थाना प्रभारी ने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि वरीय अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है और संबंधित एसआई पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मामला शांत हो गया था। घटना को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि गांव में जमीन सर्वे कर रही कंपनी का ड्रोन कैमरा ग्रामीणों द्वारा रख लिया गया था। इसी ड्रोन को छुड़ाने के लिए पुलिस गांव पहुंची थी, लेकिन इस दौरान ग्रामीण उग्र हो गए और झड़प की स्थिति बन गई। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि ड्रोन कैमरा से संबंधित कोई मामला नहीं था। उनका आरोप है कि पुलिस गांव के संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को बेवजह पकड़कर ले जा रही थी। शांत होने के बाद भी पुलिस दोबारा गांव पहुंची और एक जवान के गुम होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज व मारपीट करने लगी, जिससे झड़प हो गई। जिससे मामल बिगड़ गया। एक जवान के गुम करने का बहाना कर की पिटाई ग्रामीणों का आरोप है कि करीब आधे घंटे बाद पुलिस दोबारा गांव पहुंची और एक जवान के गुम होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज व मारपीट करने लगी। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच फिर से झड़प हो गई।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पुलिस ने कई राउंड फायरिंग की। झड़प के बाद गांव के बाहर पुलिस बल तैनात घटना के बाद कैमा गांव के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। यहां एसएसबी 32 बटालियन, जिला पुलिस और आईआरबी के जवानों को लगाया गया है। पुलिस का दावा है कि स्थिति अब पूरी तरह शांत है, हालांकि ग्रामीणों में पुलिस के रवैये को लेकर आक्रोश बना हुआ है। गांव के कुछ युवक लाठी-डंडा लेकर बाइक से गांव के विभिन्न हिस्सों में निगरानी करते नजर आए। ^पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है। उनके निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।^ -प्रमोद कुमार सिन्हा, थाना प्रभारी, लातेहार। भास्कर न्यूज | लातेहार सदर थाना क्षेत्र के कैमा गांव में गुरुवार की रात ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई झड़प में चार सब-इंस्पेक्टर (एसआई) सहित आईआरबी और जैप के कुल 15 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं ग्रामीणों की ओर से भी धीरेन्द्र उरांव, संदीप उरांव समेत आधा दर्जन लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों में एसआई धर्मवीर कुमार सिंह, एसआई मोहन रविदास, एसआई रामाकांत गुप्ता, एसआई राजेश झा, आईआरबी के शैलेंद्र कुमार सिंह, प्रेमचंद पाण्डेय, विजय कुमार सिंह, कन्हैया प्रसाद तथा जैप के जवान रामकिशोर उरांव, तिलेस्फर लकड़ा, कृष्णा मुरारी, लोबिन लकड़ा, गिरिवर प्रसाद, सत्यम कुमार और जवाहर उरांव शामिल हैं। पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई झड़प के बाद कैमा गांव में भय और दहशत का माहौल है। ग्रामीण किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करने से कतराते नजर आए। जब ग्रामीणों को बताया गया कि हम पत्रकार हैं और उनकी समस्याओं को जानने आए हैं, तब करीब आधे घंटे बाद कुछ लोग सामने आए और पूरी घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस गांव के संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को पकड़कर ले जा रही थी। इसकी जानकारी मिलने पर ग्रामीण घोड़गढ़वा पुल के पास पहुंचे और थाना प्रभारी प्रमोद कुमार सिन्हा से कारण पूछा। ग्रामीणों का कहना था कि यह इलाका पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से संचालित होता है, जहां किसी की गिरफ्तारी से पहले गांव को सूचना देना जरूरी होता है। इसके बाद गांव के अखाड़ा में बैठक हुई, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि हरेंद्र उरांव पर लगे आरोपों पर फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ग्रामीणों के अनुसार पुलिस ने हिरासत में लिए गए संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को ग्रामीणों के बीच सौंप दिया था। इस दौरान ग्रामीणों ने एसआई रामाकांत गुप्ता पर धक्का-मुक्की और मारपीट का आरोप भी लगाया। थाना प्रभारी ने लिखित रूप से आश्वासन दिया कि वरीय अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है और संबंधित एसआई पर कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मामला शांत हो गया था। घटना को लेकर पुलिस और ग्रामीणों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस का कहना है कि गांव में जमीन सर्वे कर रही कंपनी का ड्रोन कैमरा ग्रामीणों द्वारा रख लिया गया था। इसी ड्रोन को छुड़ाने के लिए पुलिस गांव पहुंची थी, लेकिन इस दौरान ग्रामीण उग्र हो गए और झड़प की स्थिति बन गई। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि ड्रोन कैमरा से संबंधित कोई मामला नहीं था। उनका आरोप है कि पुलिस गांव के संदीप टाना भगत और विशेष टाना भगत को बेवजह पकड़कर ले जा रही थी। शांत होने के बाद भी पुलिस दोबारा गांव पहुंची और एक जवान के गुम होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज व मारपीट करने लगी, जिससे झड़प हो गई। जिससे मामल बिगड़ गया। एक जवान के गुम करने का बहाना कर की पिटाई ग्रामीणों का आरोप है कि करीब आधे घंटे बाद पुलिस दोबारा गांव पहुंची और एक जवान के गुम होने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों के साथ गाली-गलौज व मारपीट करने लगी। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच फिर से झड़प हो गई।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पुलिस ने कई राउंड फायरिंग की। झड़प के बाद गांव के बाहर पुलिस बल तैनात घटना के बाद कैमा गांव के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। यहां एसएसबी 32 बटालियन, जिला पुलिस और आईआरबी के जवानों को लगाया गया है। पुलिस का दावा है कि स्थिति अब पूरी तरह शांत है, हालांकि ग्रामीणों में पुलिस के रवैये को लेकर आक्रोश बना हुआ है। गांव के कुछ युवक लाठी-डंडा लेकर बाइक से गांव के विभिन्न हिस्सों में निगरानी करते नजर आए। ^पूरे मामले की जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है। उनके निर्देश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।^ -प्रमोद कुमार सिन्हा, थाना प्रभारी, लातेहार।


