सहारनपुर के शास्त्री नगर स्थित सहगल हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर एक गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर विवादों में घिर गया है। हरियाणा के करनाल जिले की रहने वाली एक महिला के कथित तौर पर निजी अस्पताल में कराए गए गर्भपात को लेकर न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है। मामले को संदिग्ध मानते हुए करनाल के सिविल सर्जन ने तथ्य छिपाने और कन्या भ्रूण हत्या की आशंका जताई है। थाना सदर बाजार पुलिस ने महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजु सहगल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करनाल के गांव पुंडेक निवासी अनुपमा सात अगस्त 2025 को अपने पति शोभित के साथ हरिद्वार जा रही थीं। रास्ते में अचानक पेट दर्द उठने पर वे सहारनपुर के शास्त्री नगर स्थित सहगल हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर पहुंचीं। आरोप है कि वहां मौजूद महिला रोग विशेषज्ञ ने कुछ दवाएं दीं और दो से तीन घंटे आराम करने की सलाह दी। इसी दौरान महिला बेहोश हो गई। जब होश आया तो पति को बताया गया कि गर्भपात हो चुका है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अस्पताल की ओर से न तो कोई पर्ची दी गई और न ही अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई। केवल रजिस्टर में हस्ताक्षर कराकर महिला को कुछ दवाएं देकर छुट्टी दे दी गई। पति शोभित का आरोप है कि इलाज और दवाओं के नाम पर करीब 10 हजार रुपए लिए गए, जिनमें से 2 हजार रुपए ऑनलाइन भुगतान किए गए। जांच में सामने आया कि अनुपमा पहले से तीन बेटियों की मां है। 20 जून 2025 को कराए गए अल्ट्रासाउंड में वह लगभग 12 सप्ताह की गर्भवती पाई गई थी। गर्भपात के समय गर्भ की अवधि करीब 17 सप्ताह बताई जा रही है, जो कानूनन कई सवाल खड़े करती है। इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए कन्या भ्रूण हत्या की आशंका जताई है। मामले की जांच के लिए करनाल से स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम सहारनपुर पहुंची। जांच के दौरान गायनोकॉलोजिस्ट ने लिखित बयान में गर्भपात से साफ इनकार किया, जबकि ओपीडी रजिस्टर में महिला की एंट्री पाई गई। हैरानी की बात यह रही कि टीम द्वारा तैयार किए गए स्पॉट मेमो पर संबंधित डॉक्टरों ने हस्ताक्षर करने से भी इनकार कर दिया। इसे जांच में सहयोग न करने और तथ्य छिपाने के रूप में देखा जा रहा है। करनाल के सिविल सर्जन ने साफ तौर पर कहा कि पूरा प्रकरण संदेह के घेरे में है और इसमें तथ्यों को छिपाने के साथ-साथ कन्या भ्रूण हत्या की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, सहगल हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर के डॉ.अजय सहगल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि महिला पेट दर्द और ब्लीडिंग की शिकायत लेकर आई थी। इलाज में कोई लापरवाही नहीं की गई और उपचार के बाद ही छुट्टी दी गई। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की जांच जारी है।


