सीटू ने चार श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग की

बोकारो | इस्पात मजदूर मोर्चा, सीटू की ओर से आरएमएचपी कैंटीन रेस्ट रूम में मजदूर सभा को संबोधित करते हुए सचिव इश्तियाक अंसारी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर श्रम संहिताओं को मजदूर समर्थक और आधुनिकीकरण के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तव में आक्रामक हनन है। देश का सर्वोच्च त्रिपक्षीय आधिकारिक मंच, भारतीय श्रम सम्मेलन, ट्रेड यूनियनों के लगातार आग्रह के बावजूद पिछले 10 वर्षों से नहीं बुलाया गया है। सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने इन संहिताओं का सर्वसम्मति से विरोध किया। सरकार ने ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाई गई हर बड़ी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। विपक्ष की उपस्थिति के बिना ही इन संहिताओं को संसद में पारित कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मखौल उड़ाया गया। मौके पर कोषाध्यक्ष देव कुमार, सुरेश साव, संजय अंबेडकर आदि थे। बोकारो | इस्पात मजदूर मोर्चा, सीटू की ओर से आरएमएचपी कैंटीन रेस्ट रूम में मजदूर सभा को संबोधित करते हुए सचिव इश्तियाक अंसारी ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी कर श्रम संहिताओं को मजदूर समर्थक और आधुनिकीकरण के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि वास्तव में आक्रामक हनन है। देश का सर्वोच्च त्रिपक्षीय आधिकारिक मंच, भारतीय श्रम सम्मेलन, ट्रेड यूनियनों के लगातार आग्रह के बावजूद पिछले 10 वर्षों से नहीं बुलाया गया है। सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने इन संहिताओं का सर्वसम्मति से विरोध किया। सरकार ने ट्रेड यूनियनों द्वारा उठाई गई हर बड़ी आपत्ति को नजरअंदाज कर दिया। विपक्ष की उपस्थिति के बिना ही इन संहिताओं को संसद में पारित कर दिया गया, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मखौल उड़ाया गया। मौके पर कोषाध्यक्ष देव कुमार, सुरेश साव, संजय अंबेडकर आदि थे।  

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