Bypass Project Dispute: चित्तौड़गढ़ शहर को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित बाइपास लिंक रोड के निर्माण में इंजीनियरों ने मास्टर प्लान को दरकिनार कर दिया। बाइपास की दूरी अब 6 की बजाय 11 किमी हो गई है।
शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने के लिए विधायक डॉ सुरेश धाकड़ ने चुनाव पूर्व सपना दिखाया था। सपने को धरातल पर उतारने के के लिए गत वर्ष के बजट में इसकी स्वीकृति भी कराई । सरकारी तंत्र ने बजट के बंदरबांट का नया खेल शुरू कर दिया है।
नगर नियोजक के जिस मास्टर प्लान में बाईपास की दूरी मात्र 6 किमी तय थी, सार्वजनिक निर्माण विभाग के इंजीनियरों ने उसे फाइलों में खींचकर 11 किमी लंबा कर दिया है। शहर के बीचों-बीच लगने वाले जाम से निजात मिलने के बजाय, यह नया सर्पिलाकार (घुमावदार) प्रस्ताव केवल ठेकेदारों और रसूखदारों की चांदी करने वाला साबित हो रहा है।
इंजीनियरिंग का अजीब कारनामा: सीधा छोड़कर घुमाव क्यों?
टाउन प्लानर ने जो नक्शा बनाया था, वह तकनीकी रूप से सुगम और सीधा था। लेकिन पीडब्ल्यूडी के नए प्रस्ताव में सड़क को बेवजह 5 किमी का अतिरिक्त फेरा दिया गया है।
सवाल: छह किमी का काम जब करीब 20 करोड़ में बेहतर हो सकता था, तो 36 करोड़ खर्च करने में 11 किमी की लंबी लकीर क्यों खींची गई?
आशंका: जानकारों का कहना है कि सड़क को लंबा करने के पीछे दो ही मकसद हो सकते हैं या तो निर्माण लागत बढ़ाकर मलाई काटना या फिर रास्ते में आने वाले रसूखदारों की जमीनों के भाव बढ़ाना।
इन इलाकों को नहीं मिलेगी राहत
भीलवाड़ा से नीमच और जाट चरछा की ओर जाने वाले भारी वाहन आज भी नए बस स्टैंड, चेंची पुलिया और पुराने बस स्टैंड पर काल बनते हैं। प्रस्तावित बाईपास शहर से इतनी दूर कर दिया गया है कि अधिकांश ट्रक चालक छोटा रास्ता समझकर फिर शहर के भीतर से ही गुजरेंगे। ऐसे में चेंची मार्ग, सुलीमंगरा, ब्रह्मपुरी, रैगर बस्ती और स्कूलों के पास का खतरा टलने वाला नहीं है।
पत्रिका के सवाल
- साहब, मास्टर प्लान बड़ा या पीडब्ल्यूडी ? टाउन प्लानर के पास शहर का भविष्य होता है, उनके छह किमी के प्लान को दरकिनार करने का तकनीकी आधार क्या है?
- ये ‘सांप’ जैसा रास्ता किसके लिए? बाईपास सीधा होने के बजाय सर्पिलाकार क्यों बनाया जा रहा है? क्या यह भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं का ब्लैक स्पॉट नहीं बनेगा?
- जनता की आपत्तियां रद्दी की टोकरी में क्यों? शिविर लगाकर आपत्तियां तो ली गईं, लेकिन क्या एक भी सुझाव को नक्शे में जगह मिली? या यह सिर्फ कागजी खानापूर्ति थी?
सियासी चुप्पी पर उठते सवाल
विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ ने बजट तो स्वीकृत करा दिया, लेकिन प्रोजेक्ट के इस भटकाव पर उनकी चुप्पी हैरान करने वाली है। क्या विधायकजी को अफसरों ने अंधेरे में रखा है या फिर इस 11 किमी वाले खेल को उनकी मूक सहमति प्राप्त है? जनता पूछ रही है कि उसे सुविधा मिलेगी या सिर्फ घुमावदार रास्ता?
इनका कहना है
हमने तीन प्रस्ताव भेजे थे, जो वहां से पास होकर आया, उसी पर काम कर रहे हैं। इससे गांवों को फायदा होगा।
- वीरेन्द्र नायक, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी, बेगूं


