कबाड़ में बिक रहीं थीं बच्चों की किताबें, सरकारी विभाग का कर्मचारी ही निकला मास्टरमाइंड, भारी संख्या में पुस्तक बरामद चार गिरफ्तार

बेसिक शिक्षा विभाग की सरकारी किताबों के गबन और उन्हें कबाड़ में बेचने के मामले में रामगांव थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 13 हजार से ज्यादा सरकारी पुस्तकें बरामद करने का दावा किया है। गिरफ्तार आरोपियों में विभाग का एक कर्मचारी और कबाड़ी शामिल हैं। जबकि एक आरोपी अब भी फरार है।

इस मामले की शुरुआत 17 फरवरी 2026 को हुई। जब जिला समन्वयक आशुतोष सिंह की ओर से थाना रामगांव में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप था कि सरकारी स्कूलों के लिए आई किताबें अवैध तरीके से कबाड़ी की दुकान पर बेची जा रही हैं। मामला सामने आते ही पुलिस ने जांच तेज कर दी। खुलासे के लिए तीन विशेष टीमें बनाई गईं।

बीएसए कार्यालय का चपरासी समेत चार गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर चार लोगों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपियों में बीएसए कार्यालय में तैनात अनुचर आलोक मिश्रा, कबाड़ी दिलशाद अली, शुभांकर गुप्ता और अर्जुन शामिल हैं। एक अन्य आरोपी समीर अहमद की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

13,082 सरकारी किताबें दो गैस सिलिंडर बरामद

पुलिस के मुताबिक आरोपियों के पास से 13,082 सरकारी किताबें और दो गैस सिलिंडर बरामद किए गए हैं। पूछताछ में यह बात सामने आई कि बीएसए कार्यालय में किताबों की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारी ने लालच में आकर स्टॉक से किताबें निकालकर अपने साथियों के साथ मिलकर बेच दीं।

अब विभाग पर उठ रहे सवाल, इतनी बड़ी संख्या में किताबें कैसे हुई गायब

इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। इतनी बड़ी संख्या में किताबें स्टॉक से गायब कैसे हुईं। इसे लेकर जांच जारी है। अधिकारी पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रहे हैं। ताकि यह पता चल सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि कुछ लोगों ने कबाड़ी की दुकान पर किताबें मिलने का वीडियो वायरल करने की धमकी देकर आरोपी से पैसे मांगने की कोशिश की थी। इस ब्लैकमेलिंग के पहलू की भी जांच की जा रही है। सबूत मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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