अररिया में जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में समाहरणालय के आत्मन सभागार में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले में चल रही बाल संरक्षण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और संबंधित विभागीय अधिकारियों को बच्चों के बेहतर संरक्षण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला चिकित्सा पदाधिकारी, सहायक निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, श्रम अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य, किशोर न्याय परिषद के सदस्य और जिला खेल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बाल संरक्षण को एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताया जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने बाल संरक्षण को एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय इतना महत्वपूर्ण है कि सभी विभागों को आपसी समन्वय और पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। बच्चों के हित में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) को जिले में अनाथ बच्चों की स्थिति का व्यापक सर्वेक्षण कराने का स्पष्ट निर्देश दिया। इस सर्वे की पूरी रिपोर्ट 23 मार्च 2026 तक उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य अनाथ बच्चों की सटीक संख्या, उनकी स्थिति और जरूरतों का आकलन कर उन्हें तत्काल संरक्षण व सहायता प्रदान करने की योजना बनाना है। RTE के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया इसके अतिरिक्त, जिला पदाधिकारी ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया कि RTE के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार वास्तव में मिल सके। बैठक में बाल श्रम, बाल विवाह, किशोर न्याय, स्वास्थ्य सेवाएं, खेलकूद और शिक्षा जैसे बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर गहन चर्चा हुई। सभी विभागों से बच्चों के हित में अधिक सक्रिय और समन्वित भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। जिला प्रशासन का यह प्रयास जिले में बच्चों के समग्र विकास और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन निर्देशों के क्रियान्वयन से अररिया जिले में बाल कल्याण की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा। अररिया में जिला पदाधिकारी विनोद दूहन की अध्यक्षता में समाहरणालय के आत्मन सभागार में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की त्रैमासिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले में चल रही बाल संरक्षण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई और संबंधित विभागीय अधिकारियों को बच्चों के बेहतर संरक्षण के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। बैठक में सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला चिकित्सा पदाधिकारी, सहायक निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, श्रम अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष व सदस्य, किशोर न्याय परिषद के सदस्य और जिला खेल पदाधिकारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बाल संरक्षण को एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताया जिला पदाधिकारी विनोद दूहन ने बाल संरक्षण को एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि यह विषय इतना महत्वपूर्ण है कि सभी विभागों को आपसी समन्वय और पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। बच्चों के हित में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (आईसीडीएस) को जिले में अनाथ बच्चों की स्थिति का व्यापक सर्वेक्षण कराने का स्पष्ट निर्देश दिया। इस सर्वे की पूरी रिपोर्ट 23 मार्च 2026 तक उपलब्ध कराने को कहा गया है। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य अनाथ बच्चों की सटीक संख्या, उनकी स्थिति और जरूरतों का आकलन कर उन्हें तत्काल संरक्षण व सहायता प्रदान करने की योजना बनाना है। RTE के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया इसके अतिरिक्त, जिला पदाधिकारी ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी को निर्देशित किया कि RTE के सभी प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर, वंचित और जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार वास्तव में मिल सके। बैठक में बाल श्रम, बाल विवाह, किशोर न्याय, स्वास्थ्य सेवाएं, खेलकूद और शिक्षा जैसे बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर गहन चर्चा हुई। सभी विभागों से बच्चों के हित में अधिक सक्रिय और समन्वित भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। जिला प्रशासन का यह प्रयास जिले में बच्चों के समग्र विकास और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन निर्देशों के क्रियान्वयन से अररिया जिले में बाल कल्याण की स्थिति में सकारात्मक बदलाव आएगा।


