जहानाबाद में बाल विवाह की रोकथाम के लिए एक जागरूकता रथ को रवाना किया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) राजीव रंजन ने हरी झंडी दिखाकर इस रथ को रवाना किया। यह पहल सरकार द्वारा बाल विवाह को कानूनी अपराध घोषित किए जाने के मद्देनजर की गई है। शदी के लिए लड़की की 18 और लड़के की उम्र 21 होनी चाहिए एसडीओ राजीव रंजन ने बताया कि यह रथ गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कीमत पर बाल विवाह नहीं किया जाना चाहिए, और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार के नियमानुसार, लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इस आयु से पहले शादी करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। यह जागरूकता रथ लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में भी बताएगा। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि लड़के और लड़कियों दोनों को शिक्षित होना चाहिए। शिक्षित होने पर ही वे अच्छे नागरिक बन पाएंगे और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकेंगे। बाल विवाह को रोकना हम सब का कर्तव्य-उप विकास आयुक्त उप विकास आयुक्त ने बताया कि अक्सर नियमों की जानकारी न होने के कारण लोग बाल विवाह कर देते हैं। इसी को रोकने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। न्होंने यह भी संदेश दिया कि बाल विवाह को रोकना केवल जिला प्रशासन का ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के मुखिया, सरपंच और सभी नागरिकों का सामूहिक दायित्व है। लोगों को यह समझना होगा कि बाल विवाह एक कानूनी अपराध है, जिसके लिए सजा भी हो सकती है। जहानाबाद में बाल विवाह की रोकथाम के लिए एक जागरूकता रथ को रवाना किया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) राजीव रंजन ने हरी झंडी दिखाकर इस रथ को रवाना किया। यह पहल सरकार द्वारा बाल विवाह को कानूनी अपराध घोषित किए जाने के मद्देनजर की गई है। शदी के लिए लड़की की 18 और लड़के की उम्र 21 होनी चाहिए एसडीओ राजीव रंजन ने बताया कि यह रथ गांव-गांव जाकर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कीमत पर बाल विवाह नहीं किया जाना चाहिए, और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार के नियमानुसार, लड़की की शादी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। इस आयु से पहले शादी करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। यह जागरूकता रथ लोगों को शिक्षा के महत्व के बारे में भी बताएगा। इसका उद्देश्य यह संदेश देना है कि लड़के और लड़कियों दोनों को शिक्षित होना चाहिए। शिक्षित होने पर ही वे अच्छे नागरिक बन पाएंगे और समाज में सकारात्मक योगदान दे सकेंगे। बाल विवाह को रोकना हम सब का कर्तव्य-उप विकास आयुक्त उप विकास आयुक्त ने बताया कि अक्सर नियमों की जानकारी न होने के कारण लोग बाल विवाह कर देते हैं। इसी को रोकने के लिए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। न्होंने यह भी संदेश दिया कि बाल विवाह को रोकना केवल जिला प्रशासन का ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के मुखिया, सरपंच और सभी नागरिकों का सामूहिक दायित्व है। लोगों को यह समझना होगा कि बाल विवाह एक कानूनी अपराध है, जिसके लिए सजा भी हो सकती है।


