नवादा में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के उद्देश्य से 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, उप विकास आयुक्त नीलिमा साहू ने आज समाहरणालय परिसर से बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान महिला एवं बाल विकास निगम के निर्देश पर मंगलवार को शुरू हुआ था और 8 मार्च 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं के बीच शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना भी है। यह पहल विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 100 दिवसीय यह अभियान तीन चरणों में क्रियान्वित किया जा रहा है। अभियान के प्रथम चरण (27 नवंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025) में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और संबंधित कानूनों की जानकारी दी गई। द्वितीय चरण (1 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026) में धार्मिक स्थलों और विवाह संबंधी सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित कर बाल विवाह को हतोत्साहित करने हेतु संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी चरण के तहत आज बाल विवाह मुक्ति रथ को रवाना किया गया। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों, नेहा ग्रामीण महिला विकास समिति के सदस्यों और विद्यालय के छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के विरुद्ध शपथ दिलाई गई। साथ ही, बाल विवाह उन्मूलन के समर्थन में एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें उपस्थित पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। अभियान के तृतीय चरण (1 फरवरी 2026 से 8 मार्च 2026) में ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं, वार्डों और सामुदायिक स्तर पर सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान ग्रामसभाओं और नगरपालिका वार्ड बैठकों में बाल विवाह को एक विशिष्ट एजेंडा के रूप में शामिल कर जनसामान्य को जागरूक किया जाएगा और रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में प्रभारी जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी अमरनाथ कुमार, डीपीओ आईसीडीएस निरुपमा शंकर, जिला कल्याण पदाधिकारी प्रकाश प्रियरंजन, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी और स्कूली छात्राएं उपस्थित थीं। नवादा में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करने के उद्देश्य से 100 दिवसीय जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में, उप विकास आयुक्त नीलिमा साहू ने आज समाहरणालय परिसर से बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह अभियान महिला एवं बाल विकास निगम के निर्देश पर मंगलवार को शुरू हुआ था और 8 मार्च 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं और महिलाओं के बीच शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता को बढ़ावा देना भी है। यह पहल विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 100 दिवसीय यह अभियान तीन चरणों में क्रियान्वित किया जा रहा है। अभियान के प्रथम चरण (27 नवंबर 2025 से 31 दिसंबर 2025) में जिले के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और संबंधित कानूनों की जानकारी दी गई। द्वितीय चरण (1 जनवरी 2026 से 31 जनवरी 2026) में धार्मिक स्थलों और विवाह संबंधी सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित कर बाल विवाह को हतोत्साहित करने हेतु संवेदीकरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी चरण के तहत आज बाल विवाह मुक्ति रथ को रवाना किया गया। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों, नेहा ग्रामीण महिला विकास समिति के सदस्यों और विद्यालय के छात्र-छात्राओं को बाल विवाह के विरुद्ध शपथ दिलाई गई। साथ ही, बाल विवाह उन्मूलन के समर्थन में एक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया, जिसमें उपस्थित पदाधिकारियों ने हस्ताक्षर किए। अभियान के तृतीय चरण (1 फरवरी 2026 से 8 मार्च 2026) में ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं, वार्डों और सामुदायिक स्तर पर सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान ग्रामसभाओं और नगरपालिका वार्ड बैठकों में बाल विवाह को एक विशिष्ट एजेंडा के रूप में शामिल कर जनसामान्य को जागरूक किया जाएगा और रोकथाम के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे। इस कार्यक्रम में प्रभारी जिला सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी अमरनाथ कुमार, डीपीओ आईसीडीएस निरुपमा शंकर, जिला कल्याण पदाधिकारी प्रकाश प्रियरंजन, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी और स्कूली छात्राएं उपस्थित थीं।


