प्रदेश के गांवों में अब विकास कार्य बिखरी हुई योजनाओं या बिना प्लानिंग के नहीं होंगे। शहरों की तर्ज पर अब गांवों का भी अपना मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा। इसके लिए मुख्यमंत्री विकसित ग्राम अभियान शुरू किया गया है। इसमें तीन चरणों में गांवों को विकसित भारत 2047 के अनुरूप विकसित बनाया जाएगा। इसे गांवों की तात्कालिक मांगों या छोटी-मोटी घोषणाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्य सरकार ने इसके लिए तीन हिस्सों में बांटा है। पहला अल्पकालीन खंड 2030 तक रहेगा। इस दौरान गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास किया जाएगा। बिजली, पानी-सड़क जैसी तत्काल जरूरतों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाएगा। दूसरा भाग मध्यकालीन के रूप में वर्ष 2035 तक निर्धारित किया गया है। इसमें कृषि, सिंचाई सुविधाएं, रोजगार, कौशल विकास और अन्य ग्रामीण आवश्यकताओं को शामिल किया गया है। आखिरी और तीसरा चरण दीर्घकालीन है। इसके अंतर्गत 2047 तक मास्टर प्लान के आधार पर आत्मनिर्भर और सतत ग्राम विकास कराया जाएगा। अभियान के अंतर्गत हर ग्राम पंचायत की एक डायनामिक प्रोफाइल बनाई जाएगी। जिसमें पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों, आधारभूत सुविधाओं और विकास जरूरतों का डिजिटल डेटाबेस शामिल किया जाएगा। साथ ही गांवों का विजुअल मानचित्र तैयार किया जाएगा। यह सारा काम जीआईएस प्लेटफॉर्म, एसएसओ ऐप और प्रगति पोर्टल के माध्यम से होगा। बजट घोषणा 2026-27 के तहत हो रहे शुरू किए गए इस अभियान का मकसद विकसित राजस्थान-2047 के विजन को जमीन पर उतारना है। राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन के माध्यम से ग्राम से लेकर जिला स्तर तक यह पूरा ढांचा तैयार किया जाएगा। राज्य से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक जिम्मेदारी तय की गई है। जिला स्तर पर जिला परिषद सीईओ नोडल अधिकारी होंगे, तो ग्राम स्तर पर वीडीओ को अभियान समन्वयक बनाया गया है। अभियान की मॉनिटरिंग पूरी तरह डिजिटल होगी। यह अभियान 15 मई तक चलेगा। इसी दौरान ग्रामीणों से मिले सुझावों व पंचायत कर्मचारियों के सर्वे डेटा के आधार पर हरेक गांव का मास्टर प्लान स्वीकृत किया जाएगा। ग्रामीण 30 अप्रैल तक दे सकेंगे सुझाव विकसित गांव के लिए जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर पंचायत में सुझाव पेटी रखी जाएगी। ग्रामीण अपने सुझाव इस पेटी में डाल सकते हैं। 20 मार्च से 30 अप्रैल तक यह पेटी पंचायत में रखी जाएगी। पेटी के अलावा ग्रामीण ईमेल के जरिए भी पंचायत अधिकारियों तक अपने सुझाव पहुंचा सकते हैं। हालांकि अभियान के पहले दिन ग्राम विकास अधिकारियों ने ग्राम सभाओं का बहिष्कार किया। इसके चलते सभाएं नहीं हो सकी। प्रदेशाध्यक्ष महावीर शर्मा ने बताया कि हमने ग्राम सभाओं का एजेंडा ही जारी नहीं किया।


