बेगूसराय के जयमंगलागढ़ में पिछले कई साल से घर बनाकर रह रहे 200 से अधिक महादलित समुदाय (मुसहर जाति) के लोगों को पुनर्वासित किया जाना है। प्रशासन की ओर से नोटिस के बाद 200 परिवारों को घर खाली करने को कहा गया है। नोटिस को लेकर महादलित परिवारों का कहना है कि हम लोग किसी भी हाल में घर खाली नहीं करेंगे, प्रशासन जहां हमें रहने के लिए जमीन दे रही है, वो रहने लायक ही नहीं है। दरअसल, बिहार के सबसे पहले रामसर साइट काबर झील और शक्तिपीठों में शुमार जयमंगलागढ़ को इको टूरिज्म के रूप में डेवलप किया जाना है। काबर झील को एशिया में मीठे पानी के सबसे बड़ी झील के रूप में जाना जाता है। काबर झील पक्षी विहार में पर्यटन की संभावना को देखते हुए इसे विकसित करने के दिशा में लंबे समय से काम चल रहा था। 2025 में प्रगति यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने एरियल सर्वेक्षण किया था काबर झील को विकसित करने के लिए योजना बनाई गई और 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब प्रगति यात्रा पर बेगूसराय आए थे तो उन्होंने काबर झील का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद काबर झील को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए वन विभाग और जल संसाधन विभाग की ओर से तैयार प्रेजेंटेशन को देखा। कैबिनेट की ओर से करीब 400 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली और तभी से चरणबद्ध तरीके पर इस पर काम चल रहा है। अब जब मुख्यमंत्री समृद्धि यात्रा पर आ रहे हैं तो शासन-प्रशासन उस योजना पर काम करने के लिए तेजी से आगे बढ़ चुकी है। ‘आप लोग अतिक्रमण कर रहे हैं, जल्द से जल्द जमीन खाली करें’ 2 जनवरी को यहां रहने वाले लोगों को नोटिस दिया गया कि आप सब अतिक्रमण कर रह रहे हैं, इसलिए जमीन खाली करें। 20 जनवरी को सुनवाई की तिथि निर्धारित कर सबसे शपथ पत्र भी भरवा लिया गया है। अधिकारी रोज जा रहे हैं और फरवरी के प्रथम सप्ताह में इन लोगों को यहां से हटाकर पुनर्वासित करने की योजना है। नोटिस को लेकर यहां रहने वाले महादलित समुदाय के लोगों का कहना है कि हमारे पूर्वजों ने काबर झील और माता जयमंगला की खोज की थी। पहले ये जंगल था और चारों तरफ पानी ही पानी था। भोजन की तलाश में आगे बढ़ रहे हमारे पूर्वजों ने पानी की धारा पर पेड़ काटकर रख दिया और उसे पुल बनाया। किसी तरह उसे पार करके बीच बीच गढ़ पर आना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उस समय यहां जंगल में हिंसक जानवर रहते थे। पूर्वजों को रहने के लिए कोई घर तो था नहीं, उन लोगों ने धीरे-धीरे मचान बनाकर यहां रहना शुरू किया। जानवर से बचाव के लिए आग जलाकर रात बिताते थे। धीरे-धीरे हमारे समाज की आबादी बढ़ती गई और जगह कर साफ सुथरा कर घर बनाया। जयमंगला माता की पूजा की शुरू की, जिसके बाद धीरे-धीरे लोगों ने आना शुरू किया। बेगूसराय के पहले एसडीओ ने 40 लोगों को 2-2 कट्ठा जमीन का पर्चा दिया था आजादी के बाद 1948 में बेगूसराय के पहले एसडीओ ने यहां 40 लोगों को दो-दो कट्ठा जमीन का पर्चा दिया। उस जमीन पर सरकारी योजना से मिट्टी और खपड़े का घर बना कर दिया गया था। फिर धीरे-धीरे हम लोगों की आबादी बढ़ती गई। 1984 में तब के डीएम रामसेवक शर्मा ने गुच्छा योजना के तहत 64 लोगों को आवास योजना के तहत घर बना कर दिया। आवास योजना के तहत बने घरों का उद्घाटन करने तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे आए थे, शिलापट्ट भी लगाया गया था। वो शिलापट्ट पिछले साल वन विभाग के लोग उखाड़ कर ले गए। 200 परिवारों को घर दिया, सरकार ने हाईस्कूल, आंगनवाड़ी भी खोला 1984 के बाद अब तक यहां के करीब 200 परिवार को सरकारी आवास योजना से घर दिया गया। पक्के मकान बनाए गए, हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए हाई स्कूल खोल दिया गया। आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था की गई। अब सरकार कह रही है कि हम लोग यहां अतिक्रमण करके बसे हुए हैं, इसलिए हटाया जाएगा, यह साजिश है। प्रशासन हम लोगों को दूसरी जगह जमीन देने की बात कह रही है। ‘जबरदस्ती की गई तो सामूहिक रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे’ महादलित समुदाय के लोगों का कहना है कि धनफर, मेहदा शाहपुर और नहर किनारे जमीन दिखाया गया है। कहा जा रहा है कि वहां बिजली और पानी की व्यवस्था करके जमीन उपलब्ध कराएंगे। प्रशासन आवास योजना देने की बात कर रही है। लेकिन जमीन बहुत निचली है, घर के लिए जो पैसा दिया जाएगा, वह मिट्टी भरने में ही खर्च हो जाएगा। यहां हम लोग काबर झील में नाव चलाते हैं, जयमंगला माता के पास छोटा-मोटा दुकान चला कर जीविकोपार्जन करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें भगा दिया जाएगा तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। सभी जगह गुहार लगा रहे हैं, अगर प्रशासन हटाने आ गई और जबरदस्ती करेगी तो मजबूर होकर हटाना पड़ेगा। तब हम लोग मंझौल अनुमंडल में जाकर सामूहिक रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे। ‘मुख्यमंत्री ने हमारे घरों का उद्घाटन किया, हम अतिक्रमणकारी कैसे हो गए’ स्थानीय निवासी महेश सदा, नागिया देवी, सीता देवी, सुशीला देवी, योगेश्वर सदा आदि ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने इस जगह को खोज साफ सुथरा कर घर बना कर रहना शुरू किया। माता जयमंगला की पूजा अर्चना किया। जितना लोग रहते थे उसको घर बना कर दिया गया, मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया था। अब हम लोग अतिक्रमणकारी कैसे हो गए। गांव के लोगों का कहना है कि जब पूरा मुहल्ला अतिक्रमण कर बसा है तो यहां सरकारी हाई स्कूल कैसे खुल गया, आंगनबाड़ी केंद्र कैसे खुल गया। सरकार को यह सोचना चाहिए। नोटिस दिया गया, हम लोग मूर्ख आदमी शपथ पत्र भी भरवा लिया गया है। जब से नोटिस मिला है, अधिकारी रोज आ रहे हैं। घर मोहल्ला खाली करने के लिए कह रहे हैं, डर से बच्चे बीमार पड़ गए हैं। लंबे समय से जो यहां हमारे बड़े बुजुर्ग रहते आ रहे हैं, उन लोगों ने खाना पीना छोड़ दिया है, घर उजाड़ने की चिंता से सब के सब परेशान हैं। घर खाली नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर बुलडोजर चलाया जाता है तो उससे पहले हम लोगों को ले जाकर सिमरिया में गंगा में फेंक दिया जाए। करीब 4000 लोग यहां रह रहे हैं, वोट भी देते हैं, राशन भी लेते हैं, उसे समय तक सब कुछ ठीक था, अब हम लोग गलत हो गए। गलत हम लोग नहीं हुए, बल्कि हम लोगों के साथ गलत किया जा रहा है। मंझौल एसडीओ बोले- पर्यटक प्रोजेक्ट वन विभाग की ओर से प्रस्तावित है मंझौल एसडीओ प्रमोद कुमार का कहना है कि जयमंगला गढ़ पर्यटक स्थल है। इको पर्यटक परियोजना वन विभाग की ओर से प्रस्तावित है। अभी करीब 264 परिवार यहां रह रहे हैं, जिनके लिए जमीन चिह्नित कर दिया गया है और जल्द ही उन्हें वहां भेजा जाएगा। जयमंगलागढ़ के लिए क्या है सरकार की योजना? करीब 400 करोड़ की लागत से जल संसाधन विभाग और वन विभाग काबर और जयमंगला गढ़ के लिए योजना तैयारी की गई है। मेहदा शाहपुर के समीप से बूढ़ी गंडक नदी से काबर झील में पानी लाया जाएगा। मुख्यमंत्री के प्रगति यात्रा के दौरान अनुमंडलीय अस्पताल इसका प्रजेंटेशन दिया गया था। बताया गया था कि कैसे काबर झील को पानी से भर दिया जाएगा, पानी रोकने के चेक डेम भी बनेगा। यहां दूर-दूर लोग नौका बिहार करने और पूजा का अर्चना करने के लिए आते हैं तो उनके लिए आकर्षक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला तैयार की जाएगी। जयमंगला मंदिर से काबर के मुख्य मुहाने तक एक तरह से कॉरिडोर बना दिया जाएगा। डीएम बोले- कोई आंदोलन नहीं हो रहा है, 6 महीने में प्लान का रिजल्ट दिखेगा इस संबंध में डीएम श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि जहां लोगों को बसाया जाएगा, वहां दो हाई मास्ट लाइट भी लगाए जाएंगे। सभी लोग संतुष्ट हैं। जयमंगला गढ़ के विकास के लिए प्लान बनाया गया है। उस प्लान पर हम लोग तेजी से काम कर रहे हैं, 6 महीने में उसका रिजल्ट दिखने लगेगा। बेगूसराय के जयमंगलागढ़ में पिछले कई साल से घर बनाकर रह रहे 200 से अधिक महादलित समुदाय (मुसहर जाति) के लोगों को पुनर्वासित किया जाना है। प्रशासन की ओर से नोटिस के बाद 200 परिवारों को घर खाली करने को कहा गया है। नोटिस को लेकर महादलित परिवारों का कहना है कि हम लोग किसी भी हाल में घर खाली नहीं करेंगे, प्रशासन जहां हमें रहने के लिए जमीन दे रही है, वो रहने लायक ही नहीं है। दरअसल, बिहार के सबसे पहले रामसर साइट काबर झील और शक्तिपीठों में शुमार जयमंगलागढ़ को इको टूरिज्म के रूप में डेवलप किया जाना है। काबर झील को एशिया में मीठे पानी के सबसे बड़ी झील के रूप में जाना जाता है। काबर झील पक्षी विहार में पर्यटन की संभावना को देखते हुए इसे विकसित करने के दिशा में लंबे समय से काम चल रहा था। 2025 में प्रगति यात्रा के दौरान नीतीश कुमार ने एरियल सर्वेक्षण किया था काबर झील को विकसित करने के लिए योजना बनाई गई और 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब प्रगति यात्रा पर बेगूसराय आए थे तो उन्होंने काबर झील का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद काबर झील को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए वन विभाग और जल संसाधन विभाग की ओर से तैयार प्रेजेंटेशन को देखा। कैबिनेट की ओर से करीब 400 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली और तभी से चरणबद्ध तरीके पर इस पर काम चल रहा है। अब जब मुख्यमंत्री समृद्धि यात्रा पर आ रहे हैं तो शासन-प्रशासन उस योजना पर काम करने के लिए तेजी से आगे बढ़ चुकी है। ‘आप लोग अतिक्रमण कर रहे हैं, जल्द से जल्द जमीन खाली करें’ 2 जनवरी को यहां रहने वाले लोगों को नोटिस दिया गया कि आप सब अतिक्रमण कर रह रहे हैं, इसलिए जमीन खाली करें। 20 जनवरी को सुनवाई की तिथि निर्धारित कर सबसे शपथ पत्र भी भरवा लिया गया है। अधिकारी रोज जा रहे हैं और फरवरी के प्रथम सप्ताह में इन लोगों को यहां से हटाकर पुनर्वासित करने की योजना है। नोटिस को लेकर यहां रहने वाले महादलित समुदाय के लोगों का कहना है कि हमारे पूर्वजों ने काबर झील और माता जयमंगला की खोज की थी। पहले ये जंगल था और चारों तरफ पानी ही पानी था। भोजन की तलाश में आगे बढ़ रहे हमारे पूर्वजों ने पानी की धारा पर पेड़ काटकर रख दिया और उसे पुल बनाया। किसी तरह उसे पार करके बीच बीच गढ़ पर आना शुरू किया। उन्होंने कहा कि उस समय यहां जंगल में हिंसक जानवर रहते थे। पूर्वजों को रहने के लिए कोई घर तो था नहीं, उन लोगों ने धीरे-धीरे मचान बनाकर यहां रहना शुरू किया। जानवर से बचाव के लिए आग जलाकर रात बिताते थे। धीरे-धीरे हमारे समाज की आबादी बढ़ती गई और जगह कर साफ सुथरा कर घर बनाया। जयमंगला माता की पूजा की शुरू की, जिसके बाद धीरे-धीरे लोगों ने आना शुरू किया। बेगूसराय के पहले एसडीओ ने 40 लोगों को 2-2 कट्ठा जमीन का पर्चा दिया था आजादी के बाद 1948 में बेगूसराय के पहले एसडीओ ने यहां 40 लोगों को दो-दो कट्ठा जमीन का पर्चा दिया। उस जमीन पर सरकारी योजना से मिट्टी और खपड़े का घर बना कर दिया गया था। फिर धीरे-धीरे हम लोगों की आबादी बढ़ती गई। 1984 में तब के डीएम रामसेवक शर्मा ने गुच्छा योजना के तहत 64 लोगों को आवास योजना के तहत घर बना कर दिया। आवास योजना के तहत बने घरों का उद्घाटन करने तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे आए थे, शिलापट्ट भी लगाया गया था। वो शिलापट्ट पिछले साल वन विभाग के लोग उखाड़ कर ले गए। 200 परिवारों को घर दिया, सरकार ने हाईस्कूल, आंगनवाड़ी भी खोला 1984 के बाद अब तक यहां के करीब 200 परिवार को सरकारी आवास योजना से घर दिया गया। पक्के मकान बनाए गए, हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए हाई स्कूल खोल दिया गया। आंगनबाड़ी केंद्र बनाए गए, शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था की गई। अब सरकार कह रही है कि हम लोग यहां अतिक्रमण करके बसे हुए हैं, इसलिए हटाया जाएगा, यह साजिश है। प्रशासन हम लोगों को दूसरी जगह जमीन देने की बात कह रही है। ‘जबरदस्ती की गई तो सामूहिक रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे’ महादलित समुदाय के लोगों का कहना है कि धनफर, मेहदा शाहपुर और नहर किनारे जमीन दिखाया गया है। कहा जा रहा है कि वहां बिजली और पानी की व्यवस्था करके जमीन उपलब्ध कराएंगे। प्रशासन आवास योजना देने की बात कर रही है। लेकिन जमीन बहुत निचली है, घर के लिए जो पैसा दिया जाएगा, वह मिट्टी भरने में ही खर्च हो जाएगा। यहां हम लोग काबर झील में नाव चलाते हैं, जयमंगला माता के पास छोटा-मोटा दुकान चला कर जीविकोपार्जन करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें भगा दिया जाएगा तो सब कुछ बर्बाद हो जाएगा। सभी जगह गुहार लगा रहे हैं, अगर प्रशासन हटाने आ गई और जबरदस्ती करेगी तो मजबूर होकर हटाना पड़ेगा। तब हम लोग मंझौल अनुमंडल में जाकर सामूहिक रूप से जहर खाकर आत्महत्या कर लेंगे। ‘मुख्यमंत्री ने हमारे घरों का उद्घाटन किया, हम अतिक्रमणकारी कैसे हो गए’ स्थानीय निवासी महेश सदा, नागिया देवी, सीता देवी, सुशीला देवी, योगेश्वर सदा आदि ने बताया कि हमारे पूर्वजों ने इस जगह को खोज साफ सुथरा कर घर बना कर रहना शुरू किया। माता जयमंगला की पूजा अर्चना किया। जितना लोग रहते थे उसको घर बना कर दिया गया, मुख्यमंत्री ने उद्घाटन किया था। अब हम लोग अतिक्रमणकारी कैसे हो गए। गांव के लोगों का कहना है कि जब पूरा मुहल्ला अतिक्रमण कर बसा है तो यहां सरकारी हाई स्कूल कैसे खुल गया, आंगनबाड़ी केंद्र कैसे खुल गया। सरकार को यह सोचना चाहिए। नोटिस दिया गया, हम लोग मूर्ख आदमी शपथ पत्र भी भरवा लिया गया है। जब से नोटिस मिला है, अधिकारी रोज आ रहे हैं। घर मोहल्ला खाली करने के लिए कह रहे हैं, डर से बच्चे बीमार पड़ गए हैं। लंबे समय से जो यहां हमारे बड़े बुजुर्ग रहते आ रहे हैं, उन लोगों ने खाना पीना छोड़ दिया है, घर उजाड़ने की चिंता से सब के सब परेशान हैं। घर खाली नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर बुलडोजर चलाया जाता है तो उससे पहले हम लोगों को ले जाकर सिमरिया में गंगा में फेंक दिया जाए। करीब 4000 लोग यहां रह रहे हैं, वोट भी देते हैं, राशन भी लेते हैं, उसे समय तक सब कुछ ठीक था, अब हम लोग गलत हो गए। गलत हम लोग नहीं हुए, बल्कि हम लोगों के साथ गलत किया जा रहा है। मंझौल एसडीओ बोले- पर्यटक प्रोजेक्ट वन विभाग की ओर से प्रस्तावित है मंझौल एसडीओ प्रमोद कुमार का कहना है कि जयमंगला गढ़ पर्यटक स्थल है। इको पर्यटक परियोजना वन विभाग की ओर से प्रस्तावित है। अभी करीब 264 परिवार यहां रह रहे हैं, जिनके लिए जमीन चिह्नित कर दिया गया है और जल्द ही उन्हें वहां भेजा जाएगा। जयमंगलागढ़ के लिए क्या है सरकार की योजना? करीब 400 करोड़ की लागत से जल संसाधन विभाग और वन विभाग काबर और जयमंगला गढ़ के लिए योजना तैयारी की गई है। मेहदा शाहपुर के समीप से बूढ़ी गंडक नदी से काबर झील में पानी लाया जाएगा। मुख्यमंत्री के प्रगति यात्रा के दौरान अनुमंडलीय अस्पताल इसका प्रजेंटेशन दिया गया था। बताया गया था कि कैसे काबर झील को पानी से भर दिया जाएगा, पानी रोकने के चेक डेम भी बनेगा। यहां दूर-दूर लोग नौका बिहार करने और पूजा का अर्चना करने के लिए आते हैं तो उनके लिए आकर्षक सुविधाओं की पूरी श्रृंखला तैयार की जाएगी। जयमंगला मंदिर से काबर के मुख्य मुहाने तक एक तरह से कॉरिडोर बना दिया जाएगा। डीएम बोले- कोई आंदोलन नहीं हो रहा है, 6 महीने में प्लान का रिजल्ट दिखेगा इस संबंध में डीएम श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि जहां लोगों को बसाया जाएगा, वहां दो हाई मास्ट लाइट भी लगाए जाएंगे। सभी लोग संतुष्ट हैं। जयमंगला गढ़ के विकास के लिए प्लान बनाया गया है। उस प्लान पर हम लोग तेजी से काम कर रहे हैं, 6 महीने में उसका रिजल्ट दिखने लगेगा।


