पच्चीस साल पहले मप्र और छत्तीसगढ़ के बंटवारे का बड़ा झटका 2026 में अब मप्र को लगने वाला है। छग सरकार ने सालों से बंट रही पेंशन में हाल ही में ऐसी गड़बड़ी पकड़ी है, जिसकी 10 हजार करोड़ रुपए की भरपाई अब मप्र सरकार को करनी होगी। मप्र सरकार भी पैसा देने को राजी हो गई है। मशक्कत इस बात की हो रही है कि यह पैसा एकमुश्त न देकर दो-तीन साल की किस्तों में दिया जाए। पहली किस्त का प्रावधान फरवरी में पेश होने वाले बजट में हो सकता है। मप्र की वित्तीय स्थिति चालू वर्ष में वैसे ही घाटे की तरफ जा रही है, इस नए बोझ का असर भी अधिक पड़ने वाला है। वित्त के अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2000 में मप्र-छग के बंटवारे की शर्त थी कि जो भी वित्तीय भार छत्तीसगढ़ पर आएगा, उसमें हर एक रुपए का 26.63% पैसा छग काे देना होगा। शेष 73.37% पैसे की भरपाई मप्र करेगा। पेंशन वितरण में भी यह लागू रहा। बंटवारे की शर्त थी… पेंशन के हर एक रुपए पर 73.37 पैसे मप्र देगा, लेकिन पेंशन बांटते वक्त इसका ध्यान ही नहीं रखा छग की डिमांड पर अब मप्र वित्त विभाग विचार कर रहा है कि इस भारी-भरकम रकम का भुगतान कैसे किया जाए इस तरह बरसों तक होती रही गड़बड़ी
बंटवारे के समय जितने भी पेंशनधारी छत्तीसगढ़ में रह गए और बाद में जो रिटायर हुए, उनकी पेंशन में मप्र अपना हिस्सा 73.37% देता है। सूत्रों के अनुसार हाल ही में छग सरकार में खर्चों का दबाव बढ़ा तो वित्त की टीम ने पड़ताल शुरू की। पेंशन के आंकड़े देखे तो पता चला कि मप्र का शेयर तो मिल ही नहीं रहा। बैंक पेंशन बांट रहे हैं और अकाउंटेंट जनरल की रिपोर्ट पर आरबीआई से पैसा बैंकों के खाते में ट्रांसफर हो रहा है। जितना भी डेटा उपलब्ध था, उसके आधार पर दस साल की लेनदारी निकाल दी गई। दिसंबर 2025 में मप्र को डिमांड भेजी। मप्र वित्त ने इसकी पड़ताल कराई तो डिमांड को सही पाया। अब यह परीक्षण हो रहा है कि यह मोटी रकम छग को कैसे दी जाए। 10 दिन के भीतर होगी अहम बैठक
शुरुआत में पेंशनधारकों की संख्या एक लाख से कम थी, लेकिन ताजा हालात में छग में पेंशनधारकों की संख्या डेढ़ लाख के करीब हो गई है। यानी मप्र से मिलने वाला यह पैसा छग के पेंशनर्स को अब लगातार मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि मप्र और छत्तीसगढ़ के बीच 10 हजार करोड़ को लेकर दस दिन के भीतर बड़ी बैठक होगी। डीआर भी देगी दिक्कत… छग ने हाल में पेंशनर्स की महंगाई राहत को 55 से बढ़ाकर 58% कर दिया है। साथ ही सहमति के लिए इसकी सूचना मप्र को भेज दी है। अब मप्र दोहरी स्थिति में है। यदि छत्तीसगढ़ को सहमति देता है तो उसे मप्र में भी पेंशनर्स की डीआर 3% बढ़ानी पड़ेगी। छत्तीसगढ़ की डिमांड का परीक्षण कर रहे हैं… ‘छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से राशि की मांग की गई है। इसका परीक्षण कर रहे हैं। शासन स्तर पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।’ – मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव, वित्त


