चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट- वैशाली ड्रॉ के साथ टॉप पर पहुंचीं:दिव्या देशमुख और प्रज्ञानानंदा हारे; टूर्नामेंट के 4 राउंड बाकी

चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट- वैशाली ड्रॉ के साथ टॉप पर पहुंचीं:दिव्या देशमुख और प्रज्ञानानंदा हारे; टूर्नामेंट के 4 राउंड बाकी

भारतीय ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने FIDE चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के विमेंस कैटेगरी के 10वें राउंड में यूक्रेन की अन्ना मुजिचुक के खिलाफ ड्रॉ खेला। इस ड्रॉ से मिले आधे पॉइंट्स के साथ वैशाली टॉप पर पहुंच गईं। दूसरी ओर, भारतीय ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख को रूस की अलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। ओपन कैटेगरी में भारत के ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा को उज्बेक के जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। प्रज्ञानानंदा इस हार के बाद 7वें नंबर पर खिसक गए। टूर्नामेंट साइप्रस के पाफोस में खेला जा रहा है। अभी चार राउंड बाकी हैं। टॉप-6 खिलाड़ियों के बीच 1 अंक का अंतर 10वें राउंड में वैशाली को खास परेशानी नहीं हुई और खेल बिना उतार-चढ़ाव के ड्रॉ रहा। झू जिनेर को बिबिसारा असाउबायेवा के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जिससे वैशाली को बढ़त मिली। टूर्नामेंट बेहद रोमांचक बना हुआ है। टॉप-6 खिलाड़ियों के बीच 1 पॉइंट का अंतर है। झू जिनेर और अन्ना मुजिचुक 5.5 अंकों के साथ वैशाली से आधा अंक पीछे हैं। 11वें राउंड में वैशाली का मुकाबला गोरियाचकिना से होगा, जबकि दिव्या झू जिनेर के खिलाफ खेलेंगी। गुकेश ने जीता था पिछला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट पिछली बार भारत के डी गुकेश ने इसे जीतकर चीन के डिंग लिरेन को चुनौती दी थी। तब गुकेश कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी बने थे। 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने 1995 में पहली बार कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्या है और क्यों अहम कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे अहम इवेंट माना जाता है, क्योंकि यही तय करता है कि वर्ल्ड चैंपियन को अगला चैलेंजर कौन होगा। इसे वर्ल्ड चैंपियनशिप का सेमीफाइनल भी कहा जाता है। विजेता को सीधे वर्ल्ड चैंपियन से खेलने का मौका मिलता है। यह शतरंज का सबसे बड़ा क्वालिफाइंग टूर्नामेंट है। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट हर दो साल में होता है और विजेता वर्ल्ड चैंपियन को चुनौती देता है। ओपन कैटेगरी के विजेता का मुकाबला भारत के डी गुकेश से, जबकि विमेंस कैटेगरी की विजेता चीन की जू वेनजुन से होगा। कैसे होता है टूर्नामेंट? भारतीय ग्रैंडमास्टर वैशाली रमेशबाबू ने FIDE चेस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट के विमेंस कैटेगरी के 10वें राउंड में यूक्रेन की अन्ना मुजिचुक के खिलाफ ड्रॉ खेला। इस ड्रॉ से मिले आधे पॉइंट्स के साथ वैशाली टॉप पर पहुंच गईं। दूसरी ओर, भारतीय ग्रैंडमास्टर दिव्या देशमुख को रूस की अलेक्जेंड्रा गोर्याचकिना के खिलाफ हार झेलनी पड़ी। ओपन कैटेगरी में भारत के ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा को उज्बेक के जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। प्रज्ञानानंदा इस हार के बाद 7वें नंबर पर खिसक गए। टूर्नामेंट साइप्रस के पाफोस में खेला जा रहा है। अभी चार राउंड बाकी हैं। टॉप-6 खिलाड़ियों के बीच 1 अंक का अंतर 10वें राउंड में वैशाली को खास परेशानी नहीं हुई और खेल बिना उतार-चढ़ाव के ड्रॉ रहा। झू जिनेर को बिबिसारा असाउबायेवा के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा, जिससे वैशाली को बढ़त मिली। टूर्नामेंट बेहद रोमांचक बना हुआ है। टॉप-6 खिलाड़ियों के बीच 1 पॉइंट का अंतर है। झू जिनेर और अन्ना मुजिचुक 5.5 अंकों के साथ वैशाली से आधा अंक पीछे हैं। 11वें राउंड में वैशाली का मुकाबला गोरियाचकिना से होगा, जबकि दिव्या झू जिनेर के खिलाफ खेलेंगी। गुकेश ने जीता था पिछला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट पिछली बार भारत के डी गुकेश ने इसे जीतकर चीन के डिंग लिरेन को चुनौती दी थी। तब गुकेश कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाले भारत के दूसरे खिलाड़ी बने थे। 5 बार के वर्ल्ड चैंपियन विश्वनाथन आनंद ने 1995 में पहली बार कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता था। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट क्या है और क्यों अहम कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे अहम इवेंट माना जाता है, क्योंकि यही तय करता है कि वर्ल्ड चैंपियन को अगला चैलेंजर कौन होगा। इसे वर्ल्ड चैंपियनशिप का सेमीफाइनल भी कहा जाता है। विजेता को सीधे वर्ल्ड चैंपियन से खेलने का मौका मिलता है। यह शतरंज का सबसे बड़ा क्वालिफाइंग टूर्नामेंट है। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट हर दो साल में होता है और विजेता वर्ल्ड चैंपियन को चुनौती देता है। ओपन कैटेगरी के विजेता का मुकाबला भारत के डी गुकेश से, जबकि विमेंस कैटेगरी की विजेता चीन की जू वेनजुन से होगा। कैसे होता है टूर्नामेंट?

​स्पोर्ट्स | दैनिक भास्कर

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