गयाजी के विष्णुपद में 18-28 अप्रैल तक गूंजेगा वैदिक मंत्रोच्चार:लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ की तैयारी तेज, पहले दिन निकलेगी भव्य कलश यात्रा

गयाजी के विष्णुपद में 18-28 अप्रैल तक गूंजेगा वैदिक मंत्रोच्चार:लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ की तैयारी तेज, पहले दिन निकलेगी भव्य कलश यात्रा

गयाजी. मोक्षनगरी में एक बार फिर आस्था का आयोजन होने जा रहा है। शहर के ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर परिसर में 18 से 28 अप्रैल 2026 तक भव्य श्री लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ का आयोजन होगा। विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। आज मंदिर परिसर में हुई बैठक में महायज्ञ की रूपरेखा तय की गई और अलग-अलग जिम्मेदारियां भी बांटी गईं। वैदिक परंपरा से होगा आयोजन बैठक में तय किया गया कि पूरा आयोजन वैदिक परंपरा और धार्मिक विधि-विधान के अनुरूप कराया जाएगा। महायज्ञ के प्रधान आचार्य कर्नाटक के आचार्य यादवाचार्य होंगे। वहीं बनारस समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान को संपन्न कराएंगे। श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रवचन का भी विशेष इंतजाम किया गया है। वृंदावन की दीदी हरिदासी और डॉ. सरोज मृणाल वृजवासी कथा के माध्यम से धर्म और भक्ति का संदेश देंगी। 18 अप्रैल को निकलेगी भव्य कलश यात्रा आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ की शुरुआत 18 अप्रैल की सुबह 8 बजे भव्य कलश शोभायात्रा से होगी। विष्णुपद मंदिर से गाजे-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ कलश यात्रा निकलेगी। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह यात्रा फिर मंदिर परिसर में आकर समाप्त होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु कलश लेकर यात्रा में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि पूरा शहर उस दिन भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा। महायज्ञ की धार्मिक प्रक्रिया 19 अप्रैल को वेद स्थापना और देवताओं की अधिष्ठापना से शुरू होगी। इसके बाद 20 अप्रैल से यज्ञ का मुख्य अनुष्ठान प्रारंभ होगा। हर दिन वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन और पूजन का कार्यक्रम चलेगा। मंदिर परिसर में लगातार भक्ति, मंत्रोच्चार व धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल बना रहेगा। विशेष पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन होगा आयोजन का समापन 28 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ होगा। इस दिन विशेष पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन कराया जाएगा। वहीं शाम 5 बजे से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महायज्ञ में देश के विभिन्न राज्यों से संत-महात्मा और विद्वान पंडित शामिल होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। विष्णुपद मंदिर में होने वाला यह महायज्ञ न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि पूरे गया शहर को एक बार फिर आध्यात्मिक माहौल से सराबोर कर देगा। गयाजी. मोक्षनगरी में एक बार फिर आस्था का आयोजन होने जा रहा है। शहर के ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर परिसर में 18 से 28 अप्रैल 2026 तक भव्य श्री लक्ष्मी-नारायण महायज्ञ का आयोजन होगा। विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। आज मंदिर परिसर में हुई बैठक में महायज्ञ की रूपरेखा तय की गई और अलग-अलग जिम्मेदारियां भी बांटी गईं। वैदिक परंपरा से होगा आयोजन बैठक में तय किया गया कि पूरा आयोजन वैदिक परंपरा और धार्मिक विधि-विधान के अनुरूप कराया जाएगा। महायज्ञ के प्रधान आचार्य कर्नाटक के आचार्य यादवाचार्य होंगे। वहीं बनारस समेत देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्वान पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान को संपन्न कराएंगे। श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक प्रवचन का भी विशेष इंतजाम किया गया है। वृंदावन की दीदी हरिदासी और डॉ. सरोज मृणाल वृजवासी कथा के माध्यम से धर्म और भक्ति का संदेश देंगी। 18 अप्रैल को निकलेगी भव्य कलश यात्रा आयोजन समिति के अनुसार महायज्ञ की शुरुआत 18 अप्रैल की सुबह 8 बजे भव्य कलश शोभायात्रा से होगी। विष्णुपद मंदिर से गाजे-बाजे और धार्मिक ध्वजों के साथ कलश यात्रा निकलेगी। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए यह यात्रा फिर मंदिर परिसर में आकर समाप्त होगी। इस दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और श्रद्धालु कलश लेकर यात्रा में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि पूरा शहर उस दिन भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा। महायज्ञ की धार्मिक प्रक्रिया 19 अप्रैल को वेद स्थापना और देवताओं की अधिष्ठापना से शुरू होगी। इसके बाद 20 अप्रैल से यज्ञ का मुख्य अनुष्ठान प्रारंभ होगा। हर दिन वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ हवन और पूजन का कार्यक्रम चलेगा। मंदिर परिसर में लगातार भक्ति, मंत्रोच्चार व धार्मिक अनुष्ठानों का माहौल बना रहेगा। विशेष पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन होगा आयोजन का समापन 28 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ होगा। इस दिन विशेष पूजा के बाद ब्राह्मण भोजन कराया जाएगा। वहीं शाम 5 बजे से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त प्रसाद ग्रहण करेंगे। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि महायज्ञ में देश के विभिन्न राज्यों से संत-महात्मा और विद्वान पंडित शामिल होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसे देखते हुए व्यवस्था और प्रबंधन को लेकर अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। विष्णुपद मंदिर में होने वाला यह महायज्ञ न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि पूरे गया शहर को एक बार फिर आध्यात्मिक माहौल से सराबोर कर देगा।  

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