बदली तस्वीर:जहां बच्चे भेजने से डरते थे, आज वही बना शिक्षा का मॉडल स्कूल

बदली तस्वीर:जहां बच्चे भेजने से डरते थे, आज वही बना शिक्षा का मॉडल स्कूल

आजादी के तुरंत बाद 1948 में शंकरनगर खम्हारडीह में पूर्व बुनियादी स्कूल की शुरुआत की गई थी। तय किया गया था कि घुमंतू बच्चों को यहां पढ़ाया जाएगा। कई दशकों तक यहां अपने बच्चो को भी भेजने से डरते थे। एक कमरे में चलने वाले स्कूल में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं थी। राज्य बनने के बाद पिछले पांच साल में इस स्कूल की तस्वीर ही बदल गई। यहां पढ़ाने वाले टीचर शंकरनगर, खम्हारडीह, भावनानगर, शक्तिनगर समेत आसपास की बस्तियों और इलाकों में गए। परिवारवालों को समझाया कि लड़के ही नहीं लड़कियों को भी पढ़ाना जरूरी है। देखते ही देखते ही स्कूल की तस्वीर बदल गई। स्कूल में छात्रों की संख्या इतनी बढ़ी कि पहले पूर्व फिर मिडिल अब हाई स्कूल तक की पढ़ाई हो रही है। स्कूल की तस्वीर ऐसे बदली कि इसे देखने के लिए केंद्रीय शिक्षा विभाग दिल्ली से भी अफसर पहुंचे। जैसे ही पीएमश्री स्कूल की घोषणा हुई रायपुर का यह पहला स्कूल बना जिसे पीएमश्री स्कूल घोषित किया गया। इस स्कूल में छात्रों से ज्यादा छात्राओं की संख्या है। इस स्कूल की पढ़ाई के तरीके को कई जगह पर मॉडल बनाया गया है। यहां की महिला शिक्षक नए और आसान तरीकों से पढ़ाई कराती है। इससे मैथ्स, फिजिक्स और केमिस्ट्री की पढ़ाई आसान हो जाती है। इस स्कूल के नतीजे भी हर साल शत-प्रतिशत रहते हैं। शहर के पहले पीएमश्री स्कूल में एप से पढ़ाई, वेद-योग, खेल का पूरा ध्यान स्कूल ने जिस तेजी से तरक्की की उसे देखते हुए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने यहां अपने सीएसआर मद से पांच लाख रुपए खर्च कर दिए हैं। इस रकम से कमरों में डिजिटल स्क्रीन, कंप्यूटर, सीसीटीवी कैमरे समेत कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। स्कूल के बच्चों को ऑनलाइन, मुस्कान लाइब्रेरी, लैब, टीचिंग कॉर्नर, टीचिंग लर्निंग मटेरियल, मोहल्ला क्लास, बुल्टू के बोल, मोबाइल, कार्टून एप समेत कई तरीकों से पढ़ाई कराई जा रही है। इतना ही नहीं इस स्कूल में बच्चों के खेल और स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है। बच्चों को फिट रखने योग भी कराया जाता है। वेदों से बच्चों को बेहतर जीवन सीखने की सीख दी जा रही है। हो रहा बदलाव… पहले बच्चों को नहीं भेजते थे, बात तक नहीं करते थे
छात्र-छात्राओं को नए तरीके पढ़ाने के लिए राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार से सम्मानित स्कूल की टीचर कामिनी साहू ने बताया कि पहले शिक्षकों का ग्रुप बस्तियों में जाता तो परिवार वाले बात तक नहीं करते थे। वे कहते पढ़ाई से ज्यादा बच्चों को घर का काम करवाना है। धीरे-धीरे परिवारवालों को समझाया। बच्चों ने भी इसमें साथ दिया। जैसे-जैसे बच्चों की संख्या बढ़ती गई वैसे ही स्कूल में सुविधाएं भी बढ़ने लगी। अभी यह स्कूल एक अंग्रेजी मीडियम स्कूल की तरह लगता है। स्कूल की दीवारों में जो पेंटिंग की गई है वो बच्चों और टीचरों ने ही मिलकर की है। जो बच्चों के एक सुखद एहसास कराती है। बढ़ रहीं सुविधाएं… झोपड़ी से शुरू हुआ था यह स्कूल, अब खुद का भवन
पीएमश्री स्कूल खम्हारडीह की प्रधानपाठक दमयंती वर्मा बताती हैं कि 1948 में इस स्कूल की शुरुआत एक झोपड़ी से हुई थी। 20027 में यह मिडिल स्कूल और 2019 में हाई स्कूल का दर्जा मिला। अभी इस स्कूल के पास खुद का भवन, खेल मैदान समेत सभी तरह की सुविधाएं हैं। स्कूल में सहायक शिक्षिका अनुसुइया नागरची, कामिनी साहू, योगेश्वरी वर्मा, माधवी जोशी, विद्या देवांगन, संगीता साहू, आभा शुक्ला, योग शिक्षिका चांदनी श्रीवास और संगीत शिक्षिका ज्योति वर्मा काम कर रही हैं। यानी स्कूल में हर तरह की पढ़ाई और कला के लिए शिक्षक मौजूद है। इस स्कूल की पढ़ाई और नवाचार का जिम्मा महिला टीचरों के कंधों पर ही है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *