राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुसलमान के घर वापसी और हिंदू धर्म में आने की बात की है। इस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उनका समर्थन करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य देश में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है। गिरिराज सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भागवत समाज को जोड़ने की बात करते हैं और उनके वक्तव्य को किसी संकीर्ण राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। घर वापसी तो हो रही है, बहुत लोगों की घर वापसी हुई है और आगे भी होती रहेगी। भारत में जितने लोग हैं, चाहे हिंदू हो या मुसलमान-सब भारतवंशी हैं। सबके पूर्वज एक ही हैं। अगर किसी ने डर से अपना धर्म बदल लिया है तो घर वापसी में आनंद ही आएगा। ‘सांस्कृतिक पहचान’ का मुद्दा गिरिराज सिंह ने कहा कि ‘घर वापसी’ को जबरन धर्म परिवर्तन से जोड़कर देखना गलत है। उन्होंने दावा किया कि यह स्वेच्छा से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं की ओर लौटने की प्रक्रिया है। उनके अनुसार, भारत की सभ्यता हजारों वर्षों पुरानी है और यहां रहने वाले सभी समुदायों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। मदनी पर तीखा प्रहार जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदानी के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मदनी देश को तोड़ने वाली भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, मदनी बुजुर्ग हो गए हैं, लेकिन देश तोड़ने की बात करते हैं। वे जिन्ना की भाषा बोल रहे हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि इस देश में दूसरा जिन्ना पैदा नहीं हो सकता। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था से संचालित देश है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। किसी भी प्रकार की अलगाववादी या विभाजनकारी सोच को जनता स्वीकार नहीं करेगी। 70 साल में 20 करोड़ मुसलमान के घर वापसी की नहीं हुई बात मौलाना अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि जो बातें 70 वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि 20 करोड़ मुसलमानों की घर वापसी कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी मां का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती। मदनी ने कहा कि आज देश के भीतर नफ़रत की आग भड़काई जा रही है, हत्या-हिंसा का माहौल बना हुआ है। दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएं हो रही हैं, गाय के नाम पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है और सरकार खामोशी बनाये हुए है। इसके बावजूद कुछ लोग यह ऐलान करते फिर रहे हैं कि इस देश में वही रहेगा जो उनकी विचारधारा पर चलेगा। यह सोच न केवल भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है बल्कि देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी बेहद खतरनाक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुसलमान के घर वापसी और हिंदू धर्म में आने की बात की है। इस पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने उनका समर्थन करते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य देश में सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है। गिरिराज सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भागवत समाज को जोड़ने की बात करते हैं और उनके वक्तव्य को किसी संकीर्ण राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। घर वापसी तो हो रही है, बहुत लोगों की घर वापसी हुई है और आगे भी होती रहेगी। भारत में जितने लोग हैं, चाहे हिंदू हो या मुसलमान-सब भारतवंशी हैं। सबके पूर्वज एक ही हैं। अगर किसी ने डर से अपना धर्म बदल लिया है तो घर वापसी में आनंद ही आएगा। ‘सांस्कृतिक पहचान’ का मुद्दा गिरिराज सिंह ने कहा कि ‘घर वापसी’ को जबरन धर्म परिवर्तन से जोड़कर देखना गलत है। उन्होंने दावा किया कि यह स्वेच्छा से अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं की ओर लौटने की प्रक्रिया है। उनके अनुसार, भारत की सभ्यता हजारों वर्षों पुरानी है और यहां रहने वाले सभी समुदायों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एक-दूसरे से जुड़ी हुई है। मदनी पर तीखा प्रहार जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदानी के बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि मदनी देश को तोड़ने वाली भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा, मदनी बुजुर्ग हो गए हैं, लेकिन देश तोड़ने की बात करते हैं। वे जिन्ना की भाषा बोल रहे हैं। उन्हें समझ लेना चाहिए कि इस देश में दूसरा जिन्ना पैदा नहीं हो सकता। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था से संचालित देश है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं। किसी भी प्रकार की अलगाववादी या विभाजनकारी सोच को जनता स्वीकार नहीं करेगी। 70 साल में 20 करोड़ मुसलमान के घर वापसी की नहीं हुई बात मौलाना अरशद मदनी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि जो बातें 70 वर्षों में कहने वाले पैदा नहीं हुए थे, आज वो बातें कही जा रही हैं कि 20 करोड़ मुसलमानों की घर वापसी कराई जाएगी। ऐसा लगता है मानो सिर्फ उन्हीं लोगों ने अपनी मां का दूध पिया है, बाकी और किसी ने नहीं जबकि सच्चाई यह है कि हर वह आवाज जो देश को तबाही, बर्बादी, बदअमनी और आपसी दुश्मनी की ओर ले जाए, वह देश के प्रति वफादारी की आवाज नहीं हो सकती। मदनी ने कहा कि आज देश के भीतर नफ़रत की आग भड़काई जा रही है, हत्या-हिंसा का माहौल बना हुआ है। दिनदहाड़े लिंचिंग की घटनाएं हो रही हैं, गाय के नाम पर बेगुनाहों को मौत के घाट उतारा जा रहा है और सरकार खामोशी बनाये हुए है। इसके बावजूद कुछ लोग यह ऐलान करते फिर रहे हैं कि इस देश में वही रहेगा जो उनकी विचारधारा पर चलेगा। यह सोच न केवल भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है बल्कि देश की अखंडता, एकता और शांति के लिए भी बेहद खतरनाक है।


