चंडीगढ़ में क्रेस्ट घोटाले के मामले में पुलिस ने करीब 83 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के इस केस में क्रेस्ट के अकाउंट्स विभाग के प्रमुख साहिल कुक्कर को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में चंडीगढ की आर्थिक अपराध शाखा में 12 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज की गई थी। जिसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों—अभय कुमार, सीमा धीमान और रिभव ऋषि—पर लगभग 83,04,85,582 रुपये की ठगी का आरोप है। शिकायत क्रेस्ट सेक्टर-19 के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा दी गई थी। अकाउंट्स हेड की अहम भूमिका सामने आई जांच के दौरान सामने आया कि साहिल कुक्कर का मोबाइल नंबर ही आईडीएफसी बैंक में क्रेस्ट के खाते से जुड़ा हुआ था। खाते से होने वाले सभी लेन-देन की एसएमएस जानकारी इसी नंबर पर आती थी। इसके अलावा, फर्जी बैंक स्टेटमेंट तैयार करने में भी उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। गिरफ्तारी के बाद साहिल कुक्कर को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। अब उसे 3 अप्रैल 2026 को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। कैश ट्रेल खंगाल रही पुलिस पुलिस अब इस मामले में पैसों की पूरी कड़ी (कैश ट्रेल) को खंगाल रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धोखाधड़ी की रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई और किन लोगों तक पहुंची। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है। एक आईएफएस अफसर का नाम आया सामने चंडीगढ़ में क्रेस्ट और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये के घोटाले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा सामने आया है। मामले में गिरफ्तार प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह पर आरोप है कि उसने करीब 2.50 करोड़ रुपये अपनी मां, दोस्त और अपने खातों में ट्रांसफर करवाए। अब इस मामले के तार एक आईएफएस अफसर तक भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। जांच में सामने आया है कि यह मामला चंडीगढ़ प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंच सकता है। सूत्रों के मुताबिक, एक ऑडियो रिकॉर्डिंग और कुछ चैट्स पुलिस के हाथ लगी हैं, जिनमें संबंधित आईएफएस अफसर द्वारा सुखविंदर को गिरफ्तारी से पहले भागने और अग्रिम जमानत लेने की सलाह देने की बात सामने आई है। पुलिस जल्द ही इस आईएफएस अफसर से पूछताछ कर सकती है। वहीं, मामले को गंभीरता से देखते हुए इसे सीबीआई को सौंपने की भी तैयारी की जा रही है। मां और दोस्त के खातों में ट्रांसफर किए पैसे आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व मैनेजर रिभव ऋषि ने पूछताछ में बताया कि सुखविंदर सिंह ने करीब 2.5 करोड़ रुपये अपने खाते, अपनी मां सुरिंदर कौर के खाते और अपने दोस्त दीपक के खाते में ट्रांसफर करवाए। इसके अलावा कैपको फिनटैक और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट नाम की कंपनियों के जरिए भी करोड़ों रुपये का गड़बड़झाला किया गया। आरोप है कि कुछ पैसा नकद लिया गया और बाद में एचडीएफसी बैंक में जमा कराया गया। शेल कंपनियों के कर्मचारियों ने भी किया खुलासा जांच में पता चला है कि शेल कंपनियों से जुड़े कर्मचारियों-मनीष, भूपिंदर सिंह और अमरजीत पाल सिंह-ने माना है कि उन्होंने सुखविंदर को नकद पैसा दिया था। इससे घोटाले का दायरा और बढ़ गया है। इस मामले में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की पूर्व सीएफओ नलिनी भी जांच के घेरे में आ गई हैं। पुलिस ने नलिनी की बहन के घर से कार, लैपटॉप, पेन ड्राइव और जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं। हालांकि नलिनी ने आरोपों को नकारते हुए कहा है कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। उनका कहना है कि वह धार्मिक यात्रा पर गई हुई हैं और लौटने के बाद जांच में शामिल होंगी। ऑडिट मैनेज करने के लिए लगवाए गए सोलर पैनल रिभव ऋषि ने पुलिस पूछताछ में बताया कि हर तीन महीने में बैंक की ऑडिट होती थी। उनकी ब्रांच में ऑडिटर के रूप में नरेश सुखीजा और दीपक कुमार आते थे। ऑडिट में गड़बड़ियों को छिपाने के लिए उन्हें खुश रखने के उद्देश्य से उनके घरों पर सोलर पैनल लगवाए गए। इसके लिए ऋषि ने अपने सेविंग अकाउंट से रकम ट्रांसफर कर क्रेस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर अबरोल के खाते में डाली थी। पुलिस ने हाल ही में सुखविंदर अबरोल को भी गिरफ्तार किया है, जिसे पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है।


