चंडीगढ़ में 75 करोड़ रुपये के क्रेस्ट घोटाले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच तेज हो गई है। ठगी के मास्टरमाइंड विक्रम वधवा को पुलिस ने 7 दिन के रिमांड पर लिया है। यह कार्रवाई चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) में करीब 75 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में की गई है। इससे पहले भी वाधवा नगर निगम के स्मार्ट सिटी फंड में 16.84 करोड़ रुपये के गबन मामले में पुलिस रिमांड पर रह चुका है। जांच में सामने आया है कि सेक्टर-32 स्थित IDFC फर्स्ट बैंक में संचालित CREST के खाते में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य आरोपी रिभव ऋषि, तीम धीमान और अभय कुमार का प्रोडक्शन वारंट लेकर उन्हें आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। यह मामला CREST के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुखविंदर सिंह की शिकायत पर दर्ज किया गया था। 272 संदिग्ध एंट्रियां, 31 लेनदेन पूरी तरह फर्जी जांच में कुल 272 संदिग्ध एंट्रियां सामने आई हैं, जिनमें से 31 लेनदेन पूरी तरह संदिग्ध पाए गए। ये ट्रांजैक्शन न तो अधिकृत अधिकारियों द्वारा किए गए थे और न ही इनके लिए नियमानुसार कोई मंजूरी ली गई थी। जांच एजेंसियों के मुताबिक, ईमेल के जरिए भेजे गए कई बैंक स्टेटमेंट भी फर्जी पाए गए, जिनमें छेड़छाड़ कर घोटाले को अंजाम दिया गया। 600 पेज की रिपोर्ट में कई अधिकारियों के नाम स्मार्ट सिटी फंड घोटाले में चंडीगढ़ नगर निगम ने 600 से अधिक पन्नों की आंतरिक जांच रिपोर्ट EOW को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े कई अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। पुलिस अब इन अधिकारियों की वित्तीय और प्रशासनिक भूमिका की गहन जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच के बाद कुछ अधिकारियों के नाम एफआईआर में शामिल किए जाने की तैयारी है। इससे साफ है कि जांच का दायरा अब सरकारी तंत्र के भीतर तक पहुंच चुका है। बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि CREST के खाते से बड़ी रकम कैपको फिनटेक सर्विसेज, विक्रम वाधवा के निजी खातों और मर्टल बिल्डवेल LLP में ट्रांसफर की गई। वाधवा इस कंपनी में पार्टनर और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता है। इन अवैध लेनदेन के चलते करीब 75.16 करोड़ रुपये की सीधी वित्तीय कमी सामने आई है, जबकि 2 फरवरी तक इस पर 7.88 करोड़ रुपये का ब्याज नुकसान भी दर्ज किया गया है। सरकारी खातों से पैसे निकालने की साजिश पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सरकारी विभागों के खातों में जमा करोड़ों रुपये को अस्थायी निवेश के नाम पर निजी कंपनियों में लगाया और बाद में वापस डालने की योजना बनाई। वाधवा ने पूछताछ में बताया कि उसकी मुलाकात रिभव ऋषि से पंजाब नेशनल बैंक की सेक्टर-17 शाखा के कर्मचारी राकेश कुमार ऋषि के माध्यम से हुई थी। आरोप है कि रिभव ऋषि सरकारी खातों को संभालता था और वहीं से इस पूरे खेल की शुरुआत हुई।


