सहरसा जिले के विराटपुर में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक दिवसीय चण्डी महोत्सव संपन्न हो गया। इस महोत्सव में लोक गायक सुनील छैला बिहारी ने भक्ति, देशभक्ति और लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का आरंभ देवी चण्डी की वंदना से हुआ। इसके बाद सुनील छैला बिहारी ने भक्ति गीतों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की। उन्होंने देशभक्ति गीतों के माध्यम से वीर योद्धाओं और शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी, जिससे पंडाल में देशप्रेम का माहौल बन गया। श्रोताओं ने उनके गीतों पर खूब तालियां बजाईं। छैला बिहारी के गीत पर झूम उठे लोग सुनील छैला बिहारी ने अंगिका भाषा में भी लोकगीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शक झूम उठे। पारंपरिक धुनों और लोक-संस्कृति से जुड़े इन गीतों ने महोत्सव को विशेष बना दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने संगीत का आनंद लिया और कलाकार की प्रस्तुति की सराहना की। महोत्सव के दौरान सुरक्षा, व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जिला प्रशासन की इस पहल से क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। स्थानीय लोगों को एक यादगार संगीतमय शाम का अनुभव हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजकों ने संतोष व्यक्त किया। यह चण्डी महोत्सव लोक-संस्कृति और भक्ति संगीत के माध्यम से लोगों को जोड़ने का एक सफल उदाहरण रहा। सहरसा जिले के विराटपुर में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित एक दिवसीय चण्डी महोत्सव संपन्न हो गया। इस महोत्सव में लोक गायक सुनील छैला बिहारी ने भक्ति, देशभक्ति और लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का आरंभ देवी चण्डी की वंदना से हुआ। इसके बाद सुनील छैला बिहारी ने भक्ति गीतों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की। उन्होंने देशभक्ति गीतों के माध्यम से वीर योद्धाओं और शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी, जिससे पंडाल में देशप्रेम का माहौल बन गया। श्रोताओं ने उनके गीतों पर खूब तालियां बजाईं। छैला बिहारी के गीत पर झूम उठे लोग सुनील छैला बिहारी ने अंगिका भाषा में भी लोकगीत प्रस्तुत किए, जिन पर दर्शक झूम उठे। पारंपरिक धुनों और लोक-संस्कृति से जुड़े इन गीतों ने महोत्सव को विशेष बना दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने संगीत का आनंद लिया और कलाकार की प्रस्तुति की सराहना की। महोत्सव के दौरान सुरक्षा, व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। जिला प्रशासन की इस पहल से क्षेत्र में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला। स्थानीय लोगों को एक यादगार संगीतमय शाम का अनुभव हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन पर प्रशासनिक अधिकारियों और आयोजकों ने संतोष व्यक्त किया। यह चण्डी महोत्सव लोक-संस्कृति और भक्ति संगीत के माध्यम से लोगों को जोड़ने का एक सफल उदाहरण रहा।


