‘यहां के श्रोता गजल को समझते हैं’-चंदन दास:15 साल बाद सहरसा पहुंचे गजल गायक, बोले-यहां गाकर संतोष मिलता

‘यहां के श्रोता गजल को समझते हैं’-चंदन दास:15 साल बाद सहरसा पहुंचे गजल गायक, बोले-यहां गाकर संतोष मिलता

मशहूर गजल गायक चंदन दास करीब 15 साल बाद शनिवार रात सहरसा पहुंचे। सर्किट हाउस में उनका स्वागत किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया। लंबे समय बाद सहरसा आगमन पर कलाकार ने खुशी व्यक्त की। मीडिया से बातचीत में चंदन दास ने कहा कि इतने सालों बाद भी सहरसा के लोगों द्वारा उन्हें याद रखना उनके लिए सुखद अनुभव है। उन्होंने यहां के श्रोताओं की सराहना करते हुए कहा कि सहरसा के लोग गजल को सिर्फ सुनते ही नहीं, बल्कि उसकी गहराई और बारीकियों को भी समझते हैं। सहरसा में हर कला विधा को समझने वाले मौजूद उन्होंने शेरो-शायरी की नजाकत और अदायगी की पहचान को यहां के दर्शकों की खासियत बताया।उन्होंने आगे कहा कि सहरसा जैसे शहर कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं। यहां प्रस्तुति देने में एक अलग ही संतोष मिलता है, क्योंकि दर्शकों से भरपूर सम्मान और सराहना प्राप्त होती है। उन्होंने यह भी बताया कि सहरसा में हर कला विधा को समझने वाले लोग मौजूद हैं, जो इस शहर को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। बच्चों में संगीत शिक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर चंदन दास ने कहा कि यह पूरी तरह अभिभावकों पर निर्भर करता है। जिस तरह की सांस्कृतिक सोच परिवार में होती है, वही बच्चों में विकसित होती है। यदि माता-पिता शास्त्रीय और सांस्कृतिक कला को महत्व देंगे, तो बच्चे भी उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे। पहले भी कोसी -उग्रतारा महोत्सव में आ चुके हैं अपने पुराने दौरों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वे पहले भी कोसी महोत्सव और उग्रतारा महोत्सव के दौरान सहरसा आ चुके हैं। उन्होंने इस बार भी यहां के दर्शकों से जुड़ने को लेकर उत्साह व्यक्त किया।चंदन दास बिहार दिवस के अवसर पर शनिवार को प्रेक्षागृह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण होंगे। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति के बाद उनकी प्रस्तुति होगी। इस कार्यक्रम को लेकर शहर में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मशहूर गजल गायक चंदन दास करीब 15 साल बाद शनिवार रात सहरसा पहुंचे। सर्किट हाउस में उनका स्वागत किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी स्नेहा झा ने उन्हें गुलदस्ता भेंट कर सम्मानित किया। लंबे समय बाद सहरसा आगमन पर कलाकार ने खुशी व्यक्त की। मीडिया से बातचीत में चंदन दास ने कहा कि इतने सालों बाद भी सहरसा के लोगों द्वारा उन्हें याद रखना उनके लिए सुखद अनुभव है। उन्होंने यहां के श्रोताओं की सराहना करते हुए कहा कि सहरसा के लोग गजल को सिर्फ सुनते ही नहीं, बल्कि उसकी गहराई और बारीकियों को भी समझते हैं। सहरसा में हर कला विधा को समझने वाले मौजूद उन्होंने शेरो-शायरी की नजाकत और अदायगी की पहचान को यहां के दर्शकों की खासियत बताया।उन्होंने आगे कहा कि सहरसा जैसे शहर कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत होते हैं। यहां प्रस्तुति देने में एक अलग ही संतोष मिलता है, क्योंकि दर्शकों से भरपूर सम्मान और सराहना प्राप्त होती है। उन्होंने यह भी बताया कि सहरसा में हर कला विधा को समझने वाले लोग मौजूद हैं, जो इस शहर को सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाते हैं। बच्चों में संगीत शिक्षा को लेकर पूछे गए सवाल पर चंदन दास ने कहा कि यह पूरी तरह अभिभावकों पर निर्भर करता है। जिस तरह की सांस्कृतिक सोच परिवार में होती है, वही बच्चों में विकसित होती है। यदि माता-पिता शास्त्रीय और सांस्कृतिक कला को महत्व देंगे, तो बच्चे भी उसी दिशा में आगे बढ़ेंगे। पहले भी कोसी -उग्रतारा महोत्सव में आ चुके हैं अपने पुराने दौरों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वे पहले भी कोसी महोत्सव और उग्रतारा महोत्सव के दौरान सहरसा आ चुके हैं। उन्होंने इस बार भी यहां के दर्शकों से जुड़ने को लेकर उत्साह व्यक्त किया।चंदन दास बिहार दिवस के अवसर पर शनिवार को प्रेक्षागृह में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण होंगे। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुति के बाद उनकी प्रस्तुति होगी। इस कार्यक्रम को लेकर शहर में खासा उत्साह देखा जा रहा है।  

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