पाकुड़ जिले में चैत्र नवरात्रि का समापन शनिवार को सिंदूर खेला के साथ हुआ। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लिया। सुबह से ही दुर्गा मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। नई पोशाकों और सोलह श्रृंगार में सजी महिलाएं पूरी तरह भक्ति भाव में डूबी हुई थीं। सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिला। पाकुड़ जिला मुख्यालय के अलावा हिरणपुर सहित अन्य प्रखंड मुख्यालयों के मंदिरों में भी दशमी तिथि को विशेष भीड़ रही। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन से लेकर नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की गई। नवरात्रि के सातवें दिन मंदिरों में मां की प्रतिमाएं स्थापित कर आम भक्तों के लिए कपाट खोल दिए गए थे। नौवें दिन कुंवारी कन्याओं का पूजन किया गया और रामनवमी मनाई गई। दशमी तिथि को पुरोहितों द्वारा सुबह से ही मां की आराधना की गई। आरती और मंत्रोच्चारण के बीच मां की पूजा संपन्न हुई, जिसके बाद महिलाओं ने सिंदूर खेला में भाग लिया। दशमी तिथि पर चैत्र नवरात्रि का समापन भक्ति भाव से किया गया। चैत्र नवरात्रि के 10 दिनों तक पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था भी काफी पुख्ता रही। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद देखे गए और सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी गई। शहर के छोटी अलीगंज स्थित चैती दुर्गा पूजा मंदिर में दशमी तिथि को लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही थी। आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग दशमी तिथि को मां के दर्शन और आराधना के लिए पहुंचे। पाकुड़ जिले में चैत्र नवरात्रि का समापन शनिवार को सिंदूर खेला के साथ हुआ। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लिया। सुबह से ही दुर्गा मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। नई पोशाकों और सोलह श्रृंगार में सजी महिलाएं पूरी तरह भक्ति भाव में डूबी हुई थीं। सिंदूर खेला के दौरान महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिला। पाकुड़ जिला मुख्यालय के अलावा हिरणपुर सहित अन्य प्रखंड मुख्यालयों के मंदिरों में भी दशमी तिथि को विशेष भीड़ रही। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन से लेकर नौ दिनों तक मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की गई। नवरात्रि के सातवें दिन मंदिरों में मां की प्रतिमाएं स्थापित कर आम भक्तों के लिए कपाट खोल दिए गए थे। नौवें दिन कुंवारी कन्याओं का पूजन किया गया और रामनवमी मनाई गई। दशमी तिथि को पुरोहितों द्वारा सुबह से ही मां की आराधना की गई। आरती और मंत्रोच्चारण के बीच मां की पूजा संपन्न हुई, जिसके बाद महिलाओं ने सिंदूर खेला में भाग लिया। दशमी तिथि पर चैत्र नवरात्रि का समापन भक्ति भाव से किया गया। चैत्र नवरात्रि के 10 दिनों तक पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था भी काफी पुख्ता रही। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद देखे गए और सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी गई। शहर के छोटी अलीगंज स्थित चैती दुर्गा पूजा मंदिर में दशमी तिथि को लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की जा रही थी। आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग दशमी तिथि को मां के दर्शन और आराधना के लिए पहुंचे।


