Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस साल 19 मार्च से हो रही है। ऐसे में भक्त अभी से माता रानी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने की तैयारियों में जुट गए हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा होती है, लोग पूरी श्रद्धा से उपवास रखते हैं और सात्विक या फलाहारी खाना खाते हैं। त्योहार का समापन नौवें दिन राम नवमी पर व्रत खोलकर किया जाता है। बता दें, साल में दो बार मुख्य रूप से नवरात्रि आती है, एक शारदीय और दूसरी चैत्र। इन पावन दिनों में भक्त माता रानी की विधि-पूर्वक पूजा-अर्चना करने के साथ ही माता रानी का दर्शन करने के लिए अपने आस-पास के प्रसिद्ध मंदिरों में जाते हैं।
ऐसे में अगर आप भी इस नवरात्रि कहीं बाहर जाने की सोच रहे हैं, तो हमारी आज की यह स्टोरी आपके काम आ सकती है। आज की इस स्टोरी में हम माता रानी के 5 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आप इस नवरात्रि माता के दर्शन के लिए अपने दोस्तों या परिवार के साथ जा सकते हैं।
वैष्णो देवी, कटरा (जम्मू-कश्मीर)
अगर आप इस नवरात्रि चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए पहाड़ों की सैर करने के साथ ही माता रानी के दर्शन भी करना चाहते हैं, तो वैष्णो देवी जा सकते हैं। यहां जाते समय बस एक बात का खास ध्यान रखें कि दर्शन के लिए निकलने से पहले अपना आरएफआईडी (RFID) कार्ड जरूर बनवा लें, क्योंकि इस समय इसके बिना यात्रा संभव नहीं है। इसके अलावा नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की काफी भीड़ होती है, इसलिए दर्शन के लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, पर यकीन मानिए वह इंतजार भी भक्ति के रंग में सराबोर कर देता है। गर्मी से दूर पहाड़ों के बीच यहां नवरात्रि का नजारा वाकई देखने लायक होता है।
शीतला माता मंदिर, जयपुर (राजस्थान)
राजस्थान के जयपुर जिले में चाकसू के पास शील की डूंगरी पर स्थित शीतला माता मंदिर का इतिहास करीब 500 साल पुराना है। यहां चैत्र के महीने में एक बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि शीतला माता चेचक जैसी बीमारियों से हमारी रक्षा करती हैं। यहां की सबसे खास बात बसौड़ा की परंपरा है, जहां भक्त माता को ताजे भोजन के बजाय बासी खाने का भोग लगाते हैं। अगर आप राजस्थान की संस्कृति और वहां की परंपराओं को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो इस नवरात्रि यहां जरूर जाएं।
विंध्याचल मंदिर, मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश)
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में स्थित विंध्याचल मंदिर देवी भक्तों के लिए एक अत्यंत पवित्र स्थान है, जो वाराणसी से करीब 70 किलोमीटर दूर है। यहां आपको देवी की असीम शक्ति और गंगा मैया की शांति का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
तारा तारिणी मंदिर, बरहामपुर (ओडिशा)
ओडिशा के बरहामपुर में कुमारी पहाड़ियों पर स्थित तारा तारिणी मंदिर में वैसे तो पूरे महीने ही भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि में यहां की रौनक देखते ही बनती है। मंदिर तक पहुंचने के लिए वैसे तो अब रोप-वे की आधुनिक सुविधा मिल जाती है, लेकिन आज भी बहुत से श्रद्धालु अपनी अटूट श्रद्धा दिखाने के लिए 999 सीढ़ियां चढ़कर ऊपर जाते हैं। इस पहाड़ी की चोटी से आसपास का नजारा बहुत ही खूबसूरत दिखता है और माता के जयकारों से पूरा माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।
शक्तिपीठ, कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
देवभूमि हिमाचल के कांगड़ा जिले में आप एक साथ कई प्रमुख शक्तिपीठों के दर्शन कर सकते हैं। यहां आप ज्वाला जी, चामुंडा देवी मंदिर और ब्रजेश्वरी मंदिर के दर्शन करने के साथ ही पहाड़ों की शांति और सुकून का आनंद ले सकते हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में इन मंदिरों की सजावट और वहां की रौनक दोगुनी हो जाती है। ऐसे में अगर आप प्रकृति की गोद में समय बिताने के साथ ही माता रानी की भक्ति करना चाहते हैं, तो हिमाचल के इन शक्तिपीठों की यात्रा आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकती है।


