लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ जिले में पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार की संध्या जिले के विभिन्न छठ घाटों पर हजारों की संख्या में व्रतियों और श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर उमड़ी भीड़ और भक्ति से सराबोर माहौल ने पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब शहर के ब्लॉक मोड़ स्थित वीएम फील्ड, गंडक नदी के तट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर व्रतियों की भारी भीड़ देखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह का उत्साह नजर आया। व्रतधारी महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। हाथों में बाँस से बने सूप में फल, फूल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद लेकर श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को दूध और जल अर्पित किया। पूरे वातावरण में “कांच ही बांस के बहंगिया…” जैसे पारंपरिक छठ गीत गूंजते रहे, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया। प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम छठ पर्व को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी, ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे। इसके साथ ही गोताखोरों की तैनाती भी की गई थी, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति से निपटा जा सके। नगर परिषद और स्थानीय पूजा समितियों द्वारा घाटों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। घाटों को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया, जिससे शाम के समय दृश्य बेहद मनमोहक हो गया। कठिन व्रत के बावजूद उत्साह चरम पर चैती छठ को कार्तिक छठ की तुलना में अधिक कठिन माना जाता है, क्योंकि इस समय गर्मी का असर शुरू हो जाता है। इसके बावजूद व्रतियों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना कर रहे हैं। व्रतियों ने बताया कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मसंयम, शुद्धता और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है। सामाजिक समरसता का दिखा अनूठा उदाहरण गोपालगंज के विभिन्न घाटों पर सामाजिक एकता और समरसता का भी अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हर वर्ग, जाति और समुदाय के लोग एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते नजर आए। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों ने भी व्रतियों की सेवा के लिए शिविर लगाए। कहीं पानी की व्यवस्था की गई, तो कहीं प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इससे व्रतियों को काफी सहूलियत मिली। उषा अर्घ्य के साथ होगा समापन चार दिवसीय इस महापर्व का समापन बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इसके बाद व्रती पारण कर अपना व्रत पूर्ण करेंगे। जिले भर में इस पर्व को लेकर श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। हर ओर छठी मैया के जयकारे और भक्ति गीतों की गूंज से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना हुआ है। लोक आस्था और सूर्य उपासना का महापर्व चैती छठ जिले में पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार की संध्या जिले के विभिन्न छठ घाटों पर हजारों की संख्या में व्रतियों और श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। घाटों पर उमड़ी भीड़ और भक्ति से सराबोर माहौल ने पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब शहर के ब्लॉक मोड़ स्थित वीएम फील्ड, गंडक नदी के तट सहित अन्य प्रमुख घाटों पर व्रतियों की भारी भीड़ देखी गई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह का उत्साह नजर आया। व्रतधारी महिलाएं और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित होकर घाटों पर पहुंचे और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। हाथों में बाँस से बने सूप में फल, फूल, ठेकुआ और अन्य प्रसाद लेकर श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को दूध और जल अर्पित किया। पूरे वातावरण में “कांच ही बांस के बहंगिया…” जैसे पारंपरिक छठ गीत गूंजते रहे, जिससे माहौल और भी भक्तिमय हो गया। प्रशासन की ओर से पुख्ता इंतजाम छठ पर्व को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। प्रमुख घाटों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई थी, ताकि भीड़ नियंत्रण में रहे। इसके साथ ही गोताखोरों की तैनाती भी की गई थी, जिससे किसी भी अनहोनी की स्थिति से निपटा जा सके। नगर परिषद और स्थानीय पूजा समितियों द्वारा घाटों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। घाटों को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया, जिससे शाम के समय दृश्य बेहद मनमोहक हो गया। कठिन व्रत के बावजूद उत्साह चरम पर चैती छठ को कार्तिक छठ की तुलना में अधिक कठिन माना जाता है, क्योंकि इस समय गर्मी का असर शुरू हो जाता है। इसके बावजूद व्रतियों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। 36 घंटे का निर्जला व्रत रखकर श्रद्धालु पूरी निष्ठा के साथ भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना कर रहे हैं। व्रतियों ने बताया कि यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मसंयम, शुद्धता और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देता है। सामाजिक समरसता का दिखा अनूठा उदाहरण गोपालगंज के विभिन्न घाटों पर सामाजिक एकता और समरसता का भी अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हर वर्ग, जाति और समुदाय के लोग एक साथ मिलकर इस पर्व को मनाते नजर आए। स्थानीय युवाओं और स्वयंसेवी संगठनों ने भी व्रतियों की सेवा के लिए शिविर लगाए। कहीं पानी की व्यवस्था की गई, तो कहीं प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इससे व्रतियों को काफी सहूलियत मिली। उषा अर्घ्य के साथ होगा समापन चार दिवसीय इस महापर्व का समापन बुधवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। इसके बाद व्रती पारण कर अपना व्रत पूर्ण करेंगे। जिले भर में इस पर्व को लेकर श्रद्धा, अनुशासन और भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिल रहा है। हर ओर छठी मैया के जयकारे और भक्ति गीतों की गूंज से वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक बना हुआ है।


