चैती छठ 2026: डूबते सूर्य को आज दिया जाएगा अर्घ्य:गंगा में स्नान कर ठेकुआ-प्रसाद बना रहीं व्रती, पटना के घाटों को सजाया गया

चैती छठ 2026: डूबते सूर्य को आज दिया जाएगा अर्घ्य:गंगा में स्नान कर ठेकुआ-प्रसाद बना रहीं व्रती, पटना के घाटों को सजाया गया

चैती छठ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान जारी है। सोमवार को खरना के साथ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। इस दौरान व्रतियों ने दिनभर उपवास के बाद सायंकाल में भगवान भास्कर की पूजा कर प्रसाद ग्रहण किया। मंगलवार को सायंकालीन अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा। देखें पटना के घाटों की तस्वीरें… चैत्र शुक्ल पंचमी को खरना के दिन व्रतियों ने पूरी निष्ठा और पवित्रता से प्रसाद तैयार किया। यह पर्व पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से रोग, शोक और भय से मुक्ति मिलती है। छठ व्रत करने की परंपरा ऋग्वैदिक काल से चली आ रही है। विष्णु पुराण के अनुसार, तिथियों के बंटवारे के समय सूर्यदेव को सप्तमी तिथि प्राप्त हुई थी, इसीलिए उन्हें इस तिथि का स्वामी भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि चैती छठ महापर्व के अंतर्गत आज मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग में सायंकालीन सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कल 25 मार्च, बुधवार को चैत्र शुक्ल सप्तमी में मृगशिरा नक्षत्र और आयुष्मान योग के सुयोग में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती इस महापर्व को पूर्ण करेंगी। सायंकालीन अर्घ्य से शांति-उन्नति ज्योतिषी झा के मुताबिक शाम को भगवान भास्कर को जल से अर्घ्य देने से मानसिक शांति और जीवन में उन्नति होती है I लाल चंदन, फूल के साथ अर्घ्य से यश की प्राप्ति होती है I कलयुग के प्रत्यक्ष देवता सूर्य को जल में गुड़ मिलाकर अर्घ्य देने से पुत्र और सौभाग्य का वरदान मिलता है I प्रातःकाल में जल में रक्त चंदन, लाल फूल, इत्र के साथ ताम्रपात्र में आरोग्य के देवता सूर्य को अर्घ्य देने से आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होती है I स्थिर एवं महालक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सूर्य को दूध का अर्घ्य देना चाहिए I भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से कई जन्मो के पाप नष्ट होते है I सूर्य की पत्नी उषा व प्रत्युषा की होगी पूजा देवताओ में सूर्य ऐसे देवता है जिनको प्रत्यक्ष देखा जा सकता है I सूर्य की शक्ति का मुख्य स्त्रोत उनकी पत्नी उषा और प्रत्युषा है I छठ में सूर्य के साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है I पहले सायंकालीन अर्घ्य में सूर्य की अंतिम किरण प्रत्युषा और फिर उदीयमान सूर्य की पहली किरण उषा को अर्घ्य देकर नमन किया जाता है I भगवान सूर्य की मानस बहन है षष्ठी देवी आचार्य राकेश झा ने अथर्वेद के हवाले से बताया कि षष्ठी देवी भगवान सूर्य की मानस बहन हैं । इसीलिए भगवान भास्कर के साथ उनकी बहन षष्ठी देवी की पूजा होती है I प्रकृति के षष्टम अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बालकों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। बालक के जन्म के छठे दिन भी षष्ठी मइया की पूजा की जाती है। ताकि बच्चे के दीर्घायु और निरोग रहे। एक अन्य आख्यान के अनुसार कार्तिकेय की शक्ति हैं षष्ठी देवी। षष्ठी देवी को देवसेना भी कहा गया है। अर्घ्य पात्र सूर्य उपासना के महापर्व में भगवान भास्कर को पीतल के पात्र से दूध तथा तांबे के पात्र से जल से अर्घ्य देने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है I चांदी, स्टील, शीशा व प्लास्टिक के पात्र से सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए I चैती छठ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान जारी है। सोमवार को खरना के साथ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो गया। इस दौरान व्रतियों ने दिनभर उपवास के बाद सायंकाल में भगवान भास्कर की पूजा कर प्रसाद ग्रहण किया। मंगलवार को सायंकालीन अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा। देखें पटना के घाटों की तस्वीरें… चैत्र शुक्ल पंचमी को खरना के दिन व्रतियों ने पूरी निष्ठा और पवित्रता से प्रसाद तैयार किया। यह पर्व पारिवारिक सुख-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से रोग, शोक और भय से मुक्ति मिलती है। छठ व्रत करने की परंपरा ऋग्वैदिक काल से चली आ रही है। विष्णु पुराण के अनुसार, तिथियों के बंटवारे के समय सूर्यदेव को सप्तमी तिथि प्राप्त हुई थी, इसीलिए उन्हें इस तिथि का स्वामी भी कहा जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि चैती छठ महापर्व के अंतर्गत आज मंगलवार को रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग में सायंकालीन सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कल 25 मार्च, बुधवार को चैत्र शुक्ल सप्तमी में मृगशिरा नक्षत्र और आयुष्मान योग के सुयोग में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रती इस महापर्व को पूर्ण करेंगी। सायंकालीन अर्घ्य से शांति-उन्नति ज्योतिषी झा के मुताबिक शाम को भगवान भास्कर को जल से अर्घ्य देने से मानसिक शांति और जीवन में उन्नति होती है I लाल चंदन, फूल के साथ अर्घ्य से यश की प्राप्ति होती है I कलयुग के प्रत्यक्ष देवता सूर्य को जल में गुड़ मिलाकर अर्घ्य देने से पुत्र और सौभाग्य का वरदान मिलता है I प्रातःकाल में जल में रक्त चंदन, लाल फूल, इत्र के साथ ताम्रपात्र में आरोग्य के देवता सूर्य को अर्घ्य देने से आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होती है I स्थिर एवं महालक्ष्मी की प्राप्ति के लिए सूर्य को दूध का अर्घ्य देना चाहिए I भगवान भास्कर को अर्घ्य देने से कई जन्मो के पाप नष्ट होते है I सूर्य की पत्नी उषा व प्रत्युषा की होगी पूजा देवताओ में सूर्य ऐसे देवता है जिनको प्रत्यक्ष देखा जा सकता है I सूर्य की शक्ति का मुख्य स्त्रोत उनकी पत्नी उषा और प्रत्युषा है I छठ में सूर्य के साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है I पहले सायंकालीन अर्घ्य में सूर्य की अंतिम किरण प्रत्युषा और फिर उदीयमान सूर्य की पहली किरण उषा को अर्घ्य देकर नमन किया जाता है I भगवान सूर्य की मानस बहन है षष्ठी देवी आचार्य राकेश झा ने अथर्वेद के हवाले से बताया कि षष्ठी देवी भगवान सूर्य की मानस बहन हैं । इसीलिए भगवान भास्कर के साथ उनकी बहन षष्ठी देवी की पूजा होती है I प्रकृति के षष्टम अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बालकों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। बालक के जन्म के छठे दिन भी षष्ठी मइया की पूजा की जाती है। ताकि बच्चे के दीर्घायु और निरोग रहे। एक अन्य आख्यान के अनुसार कार्तिकेय की शक्ति हैं षष्ठी देवी। षष्ठी देवी को देवसेना भी कहा गया है। अर्घ्य पात्र सूर्य उपासना के महापर्व में भगवान भास्कर को पीतल के पात्र से दूध तथा तांबे के पात्र से जल से अर्घ्य देने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है I चांदी, स्टील, शीशा व प्लास्टिक के पात्र से सूर्य को अर्घ्य नहीं देना चाहिए I  

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